नयी दिल्ली, 11 अक्टूबर (भाषा) मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपना आंदोलन तेज करते हुए विपक्षी दल सोमवार को उच्चतम न्यायालय तक मार्च करेंगे। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधान न्यायाधीश से मिलने का समय मांगा है, ताकि उनके समक्ष ‘‘वोट चोरी’’ का मुद्दा उठाया जा सके।
गांधी और खरगे दोनों ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत को पत्र लिखकर सोमवार शाम चार से पांच बजे के बीच मुलाकात का समय मांगा है, ताकि उन्हें एक ज्ञापन सौंपा जा सके।
राहुल गांधी ने कहा कि विपक्षी दलों, नागरिक संगठनों के प्रतिनिधियों और युवाओं का एक समूह सोमवार को उच्चतम न्यायालय तक मार्च करेगा। इस दौरान प्रधान न्यायाधीश को एक ज्ञापन सौंपकर ‘वोट चोरी’ पर रोक लगाने, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की जायेगी।
कांग्रेस ने सोमवार के विरोध प्रदर्शन को ‘‘चलो दिल्ली—लोकतंत्र के लिए मार्च’’ नाम दिया है। पार्टी ने कहा कि प्रदर्शनकारी दोपहर डेढ़ बजे कनॉट प्लेस-बाराखंभा रोड चौराहे पर एकत्र होंगे।
गांधी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि उच्चतम न्यायालय तक मार्च में शामिल भारतीय किसी भी राजनीतिक दल, लैंगिक, जाति, समुदाय और राज्य की सीमाओं से ऊपर उठकर एकजुट होंगे।
उन्होंने कहा, ‘‘कल देश के युवा दिल्ली में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरे। वे अपने दिलों में नफरत या गुस्सा नहीं, बल्कि प्रेम लेकर आये थे। पुलिसकर्मियों और भाजपा के ‘गुंडों’ ने उनकी पिटाई की। हम ऐसा भारत नहीं चाहते।’’
गांधी ने पोस्ट में कहा, ‘‘कल हम भारतीय के रूप में उच्चतम न्यायालय तक मार्च करेंगे। इस मार्च में हम राजनीतिक दल, लैंगिक, जाति, समुदाय और राज्य के भेदभाव से ऊपर उठकर एकजुट होंगे। युवा, सभी विपक्षी दल, नागरिक संगठन और लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले तथा भारत के संविधान के साथ खड़े सभी लोग हमारे साथ कदम से कदम मिलाकर चलेंगे।’’
गांधी ने कहा, ‘‘नरेन्द्र मोदी, अमित शाह, अजीत डोभाल और मोहन भागवत भारत की आवाज को दबा नहीं सकते। ये कायर हमें डरा-धमका नहीं सकते। इन्हें सत्ता से हटना होगा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हम प्रेम, भाईचारे और देशभक्ति की भावना के साथ मिलकर मार्च करेंगे। डरो मत।’’ उन्होंने कहा कि ‘‘कल पूरा भारत’’ उच्चतम न्यायालय तक मार्च करेगा।
गांधी ने यह आरोप भी लगाया कि शनिवार को पुलिस और भाजपा के गुंडों ने प्रदर्शनकारियों की पिटाई की थी।
इससे पहले, बेंगलुरु में खरगे ने कहा था कि उन्होंने और राहुल गांधी ने ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर प्रधान न्यायाधीश से दखल का आग्रह करने के लिए सोमवार को उनसे मुलाकात का समय मांगा है।
शुक्रवार को ‘इंडिया’ गठबंधन के विभिन्न विपक्षी दलों के नेताओं ने संसद से विजय चौक तक मार्च निकाला और बाद में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक ज्ञापन सौंपा।
बेंगलुरु में खरगे ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देशभर में ‘‘अराजकता पैदा की है।’’ उन्होंने कहा कि शनिवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन के दौरान भारी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती और लोगों को हिरासत में लिया जाना दिखाता है कि सरकार युवाओं के आंदोलन से ‘‘डरी हुई’’ है।
खरगे ने प्रधान न्यायाधीश से मुलाकात के बारे में कहा, ‘‘हमने शाम चार से पांच बजे के बीच का समय मांगा है। हम उन्हें अपनी बात भी बताएंगे, क्योंकि हम मांग नहीं कर सकते। हम उनसे हाथ जोड़कर केवल अनुरोध ही कर सकते हैं।’’
खरगे ने कहा, ‘‘हम हाथ जोड़कर उन्हें स्थिति से अवगत कराएंगे। गृह मंत्री और प्रधानमंत्री देश में अराजकता पैदा कर रहे हैं और हर जगह अघोषित आपातकाल लगा दिया गया है।’’
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि उन्होंने और राहुल गांधी ने प्रधान न्यायाधीश को पत्र भी लिखे हैं।
उन्होंने बेंगलुरु में मीडिया से बातचीत के दौरान की गई अपनी टिप्पणियों का एक वीडियो ‘एक्स’ पर साझा किया।
कांग्रेस अध्यक्ष ने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘कल हम प्रधान न्यायाधीश से मिलने भी जा रहे हैं। मैंने पत्र लिखा है और राहुल गांधी ने भी पत्र लिखा है। हमने शाम चार से पांच बजे के बीच मुलाकात का समय मांगा है। इस दौरान हम उन्हें हालात से अवगत कराएंगे।’’
शनिवार को दिल्ली में सुरक्षा के नाम पर लगाई गई पाबंदियों का जिक्र करते हुए खरगे ने कहा कि सड़कों को बंद कर दिया गया, संचार सेवाएं बाधित थीं, हवाई अड्डे तक पहुंच सीमित कर दी गई और मोबाइल नेटवर्क बंद कर दिया गया।
उन्होंने दावा किया, ‘‘कल करीब 32,000 पुलिसकर्मियों और 7,500 सीआरपीएफ (केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल) कर्मियों को तैनात किया गया था। यह अपने आप में दिखाता है कि सरकार युवाओं के आंदोलन से कितना डरती है।’’
खरगे ने आरोप लगाया कि इन सभी घटनाओं से पता चलता है कि सरकार भारत में लोकतंत्र को शांतिपूर्ण ढंग से काम नहीं करने देना चाहती। उन्होंने कहा, ‘‘हम लोकतंत्र और लोगों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।’’
कांग्रेस महासचिव के. सी. वेणुगोपाल ने कहा कि जब भी लगता है कि अमित शाह के अधीन दिल्ली पुलिस इससे निचले स्तर पर नहीं गिर सकती, वह उससे भी नीचे गिर जाती है।
वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि समाचार एजेंसियों के संवाददाताओं, मलयालम पत्रकारों, स्वतंत्र ब्लॉगर और यूट्यूबर, खासकर महिलाओं, को हिरासत में लिया गया और उनके साथ मारपीट की गई। उन्होंने इस कार्रवाई को ‘‘पूरी तरह अक्षम्य’’ करार दिया।
उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘दिल्ली पुलिस ने पूरे शहर को यातना गृह में तब्दील कर दिया है, जहां अपने मौलिक अधिकारों का इस्तेमाल कर रहे निर्दोष नागरिकों का पीछा किया जा रहा है, उनकी पिटाई की जा रही है और उन्हें हिरासत में लिया जा रहा है।’’
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि ‘‘छात्रों, युवाओं और विपक्षी नेताओं की आवाज दबाने के लिए बल का बर्बर इस्तेमाल और तानाशाहीपूर्ण प्रयास’’ भारत में लोकतंत्र की नींव पर हमला हैं।
रमेश ने कहा, ‘‘सत्ता के अहंकार और किसी भी कीमत पर कुर्सी से चिपके रहने की जिद में मोदी सरकार ने संविधान का घोर अपमान किया है।’’
शनिवार को ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) द्वारा आहूत प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रीय राजधानी में विपक्ष के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं सहित 7,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया। प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर पहुंचने से रोकने के लिए मेट्रो और ट्रेन सेवाओं पर पाबंदियां लगाई गईं तथा दिल्ली के कुछ हिस्सों में इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गईं।
विपक्षी दल प्रधानमंत्री और भाजपा पर ‘‘वोट चोरी’’ के जरिए चुनावों में ‘‘धांधली’’ का आरोप लगाते हुए मंगलवार से प्रदर्शन कर रहे हैं और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाने की मांग कर रहे हैं।
भाषा आशीष अविनाश
अविनाश
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