मुंबई, छह मार्च (भाषा) विपक्षी गठबंधन महा विकास आघाडी (एमवीए) ने शुक्रवार को देवेंद्र फडणवीस सरकार के महाराष्ट्र बजट (2026-27) की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यह ‘ठेकेदार-केंद्रित’ कवायद है, जिसमें किसानों, मध्यम वर्ग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की अनदेखी की गई है।
शिवसेना (उबाठा) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने आरोप लगाया कि सरकार ने चुनावी वादों से किसानों और नागरिकों को गुमराह किया है और बजट में कोई ठोस उपाय घोषित करने में विफल रही।
ठाकरे ने कहा, ‘‘चुनाव के दौरान किसानों से वादा किया गया था कि ऋण माफी के माध्यम से उनके ‘सतबारा’ (7/12 भूमि अभिलेख) को साफ किया जाएगा। हालांकि, बजट में इस संबंध में कोई स्पष्ट घोषणा नहीं है। इसके बजाय, ऋण माफी पर कई शर्तें लगा दी गई हैं।’’
उन्होंने कहा कि पिछली महा विकास आघाडी सरकार ने बिना किसी शर्त के समयबद्ध तरीके से दो लाख रुपये तक के कृषि ऋण माफ किए थे।
उन्होंने कहा कि कोविड-19 के दौरान भी नियमित रूप से ऋण चुकाने वाले किसानों को 50,000 रुपये का प्रोत्साहन दिया गया था।
लाडकी बहिन योजना पर सवाल उठाते हुए ठाकरे ने कहा कि सरकार ने महिला लाभार्थियों को 2,100 रुपये देने का वादा किया था, लेकिन बजट में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि यह राशि कैसे प्रदान की जाएगी।
उन्होंने राजमार्ग परियोजनाओं के लिए आवंटित भारी धनराशि की भी आलोचना करते हुए कहा कि बजट आम नागरिकों के बजाय ठेकेदारों के पक्ष में प्रतीत होता है।
मुंबई के वर्ली क्षेत्र से विधायक ने कहा, ‘‘ठेकेदारों के लिए स्पष्ट योजनाएं हैं, लेकिन किसानों, श्रमिकों और आम लोगों के लिए कुछ भी ठोस नहीं है। यह बजट मात्र विकास के भ्रम को दर्शाता है।’’
सरकार की वित्तीय रणनीति पर कटाक्ष करते हुए ठाकरे ने कहा कि यह बजट कर्ज लेकर दिवाली मनाने जैसा है।
उन्होंने बुलेट ट्रेन परियोजना की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि आम मुंबईवासियों को अहमदाबाद जाने से क्या लाभ होगा।
ठाकरे ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘आज का बजट महाराष्ट्र के बजट से अधिक ठेकेदारों के बजट जैसा लग रहा था, लंबे भाषण का हर मिनट ठेकेदारों के लिए नीतियों और घोषणाओं पर ही खर्च हुआ। इतने खर्च के बावजूद काम की गुणवत्ता बेहद खराब है, हाल ही में हुए सड़क निर्माण कार्यों को ही देख लीजिए।’’
महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि बजट में बड़े-बड़े आंकड़े और खोखली घोषणाएं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन घोषणाओं के पीछे राज्य की अर्थव्यवस्था दिवालियापन की ओर बढ़ रही है।
कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने कहा कि बजट ‘जनता को गुमराह करने के लिए शब्दों और आंकड़ों का एक हमला’ है।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शप) के नेता शशिकांत शिंदे ने भी बजट की आलोचना करते हुए इसे भ्रामक बताया। उन्होंने कहा, ‘‘एक साल के बजट में अगले 20 वर्षों के सपने क्यों दिखाए जा रहे हैं? यह बजट ग्रामीण अर्थव्यवस्था की उपेक्षा करता है और उद्योगपतियों और ठेकेदारों का पक्षधर है।’’
भाषा संतोष रंजन
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