नई दिल्ली: पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर चलाए एक साल हो गया है, लेकिन इसका असर अब भी अदालतों और केस फाइलों में दिख रहा है. जब दोनों देश युद्ध के कगार पर थे, घातक मिसाइलें तैयार थीं और सेना पूरी तरह अलर्ट थी, उसी समय भारत के अंदर एक शांत लड़ाई भी चल रही थी, जिसमें कथित मुखबिर, डिजिटल सबूत और संदिग्ध वफादारी शामिल थे.
लेकिन अब, ऑपरेशन सिंदूर की पहली बरसी पर, यह गुप्त लड़ाई कमजोर पड़ती दिख रही है. 2025 में गिरफ्तारियां तेज़ी से हुईं, आरोप गंभीर थे, लेकिन अब केस कमज़ोर पड़ गए हैं, जांच की धार कम हो गई है और कई आरोपी ज़मानत पर बाहर आ चुके हैं. अब बस फाइलों का ढेर बचा है, जो आगे बढ़ता नहीं दिख रहा और अदालतों में आरोप साबित करने में सिस्टम सफल नहीं हो पा रहा.
भारतीय सशस्त्र बलों ने जब पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों और लॉन्चपैड पर ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया, उसके तुरंत बाद पुलिस और जांच एजेंसियों ने उन लोगों पर नज़र रखनी शुरू कर दी, जिन पर पाकिस्तान के साथ काम करने का शक था और जो सीमा से जानकारी भेजकर ऑपरेशन को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर सकते थे. इसमें सेना की मूवमेंट की तस्वीरें और भारत के एस-400 एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल सिस्टम की जानकारी भी शामिल थी.
पंजाब, हरियाणा और राजस्थान पुलिस ने कई लोगों को गिरफ्तार किया और उन पर जासूसी और गोपनीय जानकारी साझा करने का आरोप लगाया. कुछ मामलों में, सेना ने लोगों को पकड़कर राज्य पुलिस को सौंप दिया.
करीब एक साल बाद, दिप्रिंट ने इन 9 मामलों की स्थिति और जांच व आरोपियों के हाल का जायज़ा लिया.
पंजाब पुलिस द्वारा जांच किए जा रहे 4 मामलों में से एक में अभी तक चार्जशीट दाखिल नहीं हुई है, जबकि बाकी तीन मामलों में आरोप तय करने की बहस चल रही है. पंजाब पुलिस द्वारा गिरफ्तार सभी आरोपी जमानत पर बाहर हैं.
दूसरी ओर, हरियाणा पुलिस द्वारा गिरफ्तार चार आरोपियों में से सिर्फ एक ही जमानत पर बाहर है. बाकी मामलों की सुनवाई अलग-अलग अदालतों में चल रही है.
राजस्थान पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया आरोपी अभी भी हिरासत में है और उस मामले में आरोप तय करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है.
एक मामले में, मिलिट्री इंटेलिजेंस ने एक व्यक्ति को हिरासत में लिया था, क्योंकि वह एस-400 एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल सिस्टम को देख रहा था. लेकिन बाद में पता चला कि वह सिर्फ एक जिज्ञासु आम नागरिक था, कोई मुखबिर नहीं. उसके खिलाफ कोई केस दर्ज नहीं किया गया और उसे छोड़ दिया गया.
‘जासूसी’ के आरोप में पंजाब में गिरफ्तारियां
भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम होने के करीब 24 घंटे बाद, पंजाब पुलिस के एक बयान में कहा गया कि उन्होंने नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान हाई कमीशन से चल रहे एक बड़े जासूसी नेटवर्क का खुलासा किया है.
मलेरकोटला जिला पुलिस के अनुसार, जब दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर था, तब पाकिस्तान के नागरिक एहसान-उर-रहीम उर्फ दानिश, जो हाई कमीशन में काम करता था, मलेरकोटला के दो भारतीय—यामीन मोहम्मद और गजाला, से संवेदनशील जानकारी निकाल रहा था और उसे पाकिस्तान सरकार तक पहुंचा रहा था.
विदेश मंत्रालय ने दानिश को देश से बाहर निकाल दिया और पंजाब पुलिस ने यामीन मोहम्मद और गजाला को गिरफ्तार कर लिया.
दिप्रिंट ने उस समय रिपोर्ट की थी कि गजाला कथित तौर पर दानिश से पाकिस्तान हाई कमीशन में मिली थी, जब वह वीजा के लिए आवेदन करने गई थी. इसके बाद दोनों दोस्त बन गए और व्हाट्सऐप और टेलीग्राम पर बात करने लगे. पंजाब पुलिस को पता चला कि यामीन 2018 और 2022 में दो बार पाकिस्तान गया था, जबकि गजाला हाल में दो बार पाकिस्तान हाई कमीशन गई थी.
पंजाब पुलिस को यह भी पता चला कि गजाला के बैंक खाते में 30,000 रुपये आए थे, जिन्हें उसने इस कथित नेटवर्क के दूसरे लोगों को दे दिया, जिसमें यामीन भी शामिल था. करीब एक महीने बाद, एक और स्थानीय व्यक्ति सलीम खान को भी इस कथित नेटवर्क का हिस्सा होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया.
हालांकि इतने बड़े जासूसी आरोपों के बावजूद, तीनों अब जमानत पर बाहर हैं और पुलिस अभी तक चार्जशीट दाखिल नहीं कर पाई है, लेकिन यह अकेला ‘सीमा पार जासूसी नेटवर्क’ नहीं था, जिसे पंजाब पुलिस ने पकड़ा. लगभग उसी समय, पंजाब के पुलिस महानिदेशक गौरव यादव ने बताया कि उनकी टीम ने गुरदासपुर के दो युवकों द्वारा चलाए जा रहे एक और जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है.
करणबीर सिंह और सुखप्रीत सिंह को 15 मई को गिरफ्तार किया गया. उन पर सीमा क्षेत्र में सेना की मूवमेंट की फोटो और वीडियो साझा करने का आरोप था. गुरदासपुर पुलिस ने दावा किया कि उनके फोन में ऐसे सबूत मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि वे अमेरिका में बैठे हैंडलर गुरलाल सिंह के कहने पर पाकिस्तान को संवेदनशील जानकारी भेज रहे थे. उन पर विदेश में बैठे लोगों से चैट करने का भी आरोप था.
पंजाब पुलिस ने अदालत में कहा, “एक वीडियो में सह-आरोपी मोटरसाइकिल चलाते हुए दिख रहा है, जब आरोपी पीछे बैठकर वीडियो बना रहा था. दूसरे वीडियो में उसका चेहरा साफ दिख रहा है. ये सभी वीडियो भारतीय सेना की मूवमेंट से जुड़े हैं. ये वीडियो सुखप्रीत सिंह के मोबाइल में चैट के साथ जुड़े हुए मिले.”
उनका मामला अदालत में ज्यादा आगे नहीं बढ़ा है और इस महीने की शुरुआत में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने करणबीर और सुखप्रीत को जमानत दे दी. अभी आरोपों पर बहस शुरू नहीं हुई है और अदालत पूरक चार्जशीट का इंतजार कर रही है.
3 जून 2025 को तरनतारन पुलिस ने सीमा जिले से गगनदीप सिंह को गिरफ्तार किया. उस पर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सेना की तैनाती, रणनीतिक जगहों और मूवमेंट से जुड़ी संवेदनशील जानकारी इकट्ठा करने और साझा करने का आरोप था.
डीजीपी यादव ने दावा किया कि गगनदीप पिछले पांच साल से पाकिस्तान में बैठे खालिस्तान समर्थक गोपाल सिंह चावला के संपर्क में था, और उसने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े 20 लोगों को संवेदनशील जानकारी भेजी थी.
सितंबर में, जिला अदालत ने गगनदीप को जमानत दे दी, बिना आरोपों की सच्चाई पर कोई टिप्पणी किए. मामला अभी आरोप तय करने के चरण में है.
4 जून को पंजाब पुलिस ने यूट्यूब इंफ्लुएंसर जसबीर सिंह को भी गिरफ्तार किया. उस पर पाकिस्तान में बैठे ‘हैंडलर्स’ से संपर्क में रहने और उन्हें गोपनीय जानकारी देने का आरोप था.
पंजाब पुलिस ने दावा किया कि ‘जान महल’ नाम का यूट्यूब चैनल चलाने वाला जसबीर कई बार पाकिस्तान गया था और आईएसआई एजेंटों के संपर्क में था. वह भारतीय सेना की मूवमेंट की जानकारी भी उनके साथ साझा करता था. उस पर हरियाणा की यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा और दानिश से भी करीबी संबंध होने का आरोप था.
जसबीर ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका दायर की और कहा कि वह पहले नॉर्वे में रहता था और उसके कई विदेशी संपर्क थे, जिन्हें अभियोजन पक्ष ने पाकिस्तान से जुड़ा बताकर पेश किया.
पिछले साल अक्टूबर में हाई कोर्ट ने जसबीर के खिलाफ कार्रवाई पर रोक लगा दी और उसे जमानत दे दी. कोर्ट ने कहा कि जिन वीडियो के आधार पर उसके खिलाफ केस बना, पहली नजर में वे आम लोगों के लिए खुले स्थानों और विषयों से जुड़े लगते हैं.
इसके अलावा, हाई कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर पाया कि जसबीर का पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों से कोई संबंध था या उसके पास कोई गोपनीय जानकारी थी.
हरियाणा पुलिस के मामले अदालत में अटके
जहां पंजाब पुलिस ‘जासूसों’ पर कार्रवाई जारी रखे हुए थी, वहीं हरियाणा पुलिस भी तेज़ी से सक्रिय हो गई और निगरानी पर खास ध्यान दिया.
कैथल पुलिस ने पटियाला के खालसा कॉलेज के छात्र देवेंद्र सिंह को गिरफ्तार किया. उस पर व्हाट्सऐप और स्नैपचैट के जरिए पाकिस्तानी खुफिया एजेंटों को भारतीय सेना से जुड़ी जानकारी देने का आरोप था. पुलिस ने यह भी कहा कि करतारपुर साहिब और ननकाना साहिब जाने के बाद देवेंद्र का झुकाव पाकिस्तान की तरफ हो गया था और उसने एक पाकिस्तानी एजेंट के कहने पर 1,500 रुपये किसी को ट्रांसफर किए थे.
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने पिछले महीने अभियोजन के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा कि न तो संवेदनशील जानकारी साझा करने का कोई सबूत दिया गया और न ही पाकिस्तान के प्रति किसी झुकाव का. अदालत ने पिछले महीने की शुरुआत में उसे जमानत दे दी, जबकि छात्र के खिलाफ अभी तक आरोप तय भी नहीं हुए हैं.
पाकिस्तान हाई कमीशन के कर्मचारी का साया हरियाणा में भी दिखा, क्योंकि पुलिस ने दानिश और एक अन्य कर्मचारी आसिफ बलोच से जुड़े कम से कम तीन मामले दर्ज किए.
16 मई को हिसार पुलिस ने यूट्यूब इंफ्लुएंसर ज्योति मल्होत्रा को जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया. उस पर पाकिस्तानी खुफिया एजेंटों से संपर्क रखने, संवेदनशील जगहों की फोटो और वीडियो साझा करने का आरोप है. उस पर दानिश, उसके साथियों और पाकिस्तानी एजेंटों से संपर्क में रहने का भी आरोप है.
दिप्रिंट ने पहले रिपोर्ट की थी कि मल्होत्रा तब से जेल में है. पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने मार्च में उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी, और मामला अभी आरोप तय करने की बहस के चरण तक भी नहीं पहुंचा है.
करीब उसी समय, नूंह जिले की पुलिस ने स्थानीय युवक अरमान को इसी तरह के आरोपों में गिरफ्तार किया. उसने कथित तौर पर माना कि वह दानिश के संपर्क में था और पैसों के बदले भारतीय सेना की गतिविधियों की गुप्त जानकारी उसे देता था.
हरियाणा पुलिस ने आरोप लगाया कि अरमान के पास डिफेंस एक्सपो की तस्वीरें और जानकारी थी, जिसे उसने पाकिस्तान के मोबाइल नंबरों पर भेजा. उस पर ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया और वह अब भी जेल में है. मामला अब अभियोजन पक्ष के गवाहों की जांच के चरण में है.
18 मई को नूंह जिला पुलिस ने एक और स्थानीय युवक मोहम्मद तारिफ को गिरफ्तार किया और उसके फोन में कई पाकिस्तानी नंबर मिलने का दावा किया. चार्जशीट में उस पर फोन का डेटा मिटाने का आरोप भी लगाया गया.
पुलिस ने आरोप लगाया, “पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह दिल्ली स्थित पाकिस्तान हाई कमीशन में तैनात आसिफ बलोच को भारतीय सेना की गतिविधियों और गोपनीय खुफिया जानकारी भेज रहा था. उसने यह भी माना कि इसके बदले उसे समय-समय पर पैसे मिलते थे.”
वह फिलहाल जेल में है और अदालत अभियोजन के सबूतों की जांच कर रही है.
राजस्थान में नौसेना का क्लर्क हिरासत में
युद्धविराम के एक महीने बाद, राजस्थान पुलिस की खुफिया शाखा ने नई दिल्ली स्थित नौसेना मुख्यालय में तैनात क्लर्क विशाल यादव को गिरफ्तार किया. उस पर ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी गोपनीय जानकारी लीक करने का आरोप है.
पुलिस ने आरोप लगाया कि वह सोशल मीडिया के जरिए ‘प्रिया शर्मा’ नाम की एक महिला आईएसआई हैंडलर के संपर्क में था और पैसों के बदले नौसेना मुख्यालय से रणनीतिक जानकारी साझा करता था.
पुलिस ने अपने बयान में कहा, “डिवाइस से मिली चैट और दस्तावेजों की जांच से पता चलता है कि विशाल यादव ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी पाकिस्तानी महिला हैंडलर को नौसेना और रक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारी भेज रहा था. इससे साफ है कि वह लंबे समय से इस जासूसी नेटवर्क का सक्रिय हिस्सा था.”
विशाल यादव फिलहाल न्यायिक हिरासत में है और जयपुर की अदालत में उसकी चार्जशीट पर विचार किया जाना बाकी है.
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