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Tuesday, 16 June, 2026
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ओडिशा सरकार दृष्टि बाधित व्यक्ति, उसकी बुजुर्ग मां को कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दे : न्यायालय

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नयी दिल्ली, 16 जून (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने गरीबी में जीवनयापन कर रहे एक दृष्टि बाधित व्यक्ति और उसकी 80 वर्षीय मां की स्थिति का संज्ञान लेते हुए ओडिशा सरकार को मंगलवार को निर्देश दिया कि वह इन लोगों को सभी सामाजिक सुरक्षा लाभ और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराए।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ ने मीडिया में आई खबरों के आधार पर स्वतः संज्ञान लेते हुए जापा भुए और उनकी बुजुर्ग मां राधिका भुए की सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई निर्देश जारी किए।

शीर्ष अदालत ने ओडिशा सरकार को निर्देश दिया कि वह मां-बेटे को मुहैया कराए गए कल्याणकारी योजनाओं के लाभ को लेकर एक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करे।

राधिका और उनके दृष्टिबाधित बेटे जापा ओडिशा के सुबर्णपुर जिले में रहते हैं। राधिक का बेटा जन्म से ही दृष्टिहीन है और अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए मां पर निर्भर है।

मीडिया में आई खबरों के मुताबिक, जापा के पिता के निधन के बाद परिवार की आर्थिक हालत खराब हो गई है। मां और बेटा एक जर्जर ढांचे में रहते हैं।

शीर्ष अदालत ने कहा, ‘‘हमें जन्म से दृष्टिहीन जापा भुए और उनकी मां राधिका भुए के गुजारे और सम्मानजनक जीवन की चिंता है… ओडिशा सरकार और उसके अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया जाता है कि अगले आदेश तक उन्हें सभी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।’’

ओडिशा सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता ने सुनवाई के दौरान बताया कि राधिका भुए को वृद्धा पेंशन और दिव्यांगता पेंशन के अलावा एक घर भी आवंटित किया गया है।

पीठ ने कहा कि अदालत का ध्यान इस बात पर है कि क्या राज्य की कल्याणकारी योजनाओं से जरूरतमंद लोगों को सम्मानजनक जीवन मिल पाया है।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने राज्य सरकार के अधिवक्ता से कहा, ‘‘हमें इस बात की चिंता है कि क्या राधिका भुए और उनके दृष्टिबाधित बेटे को सम्मानजनक जीवन दिया जा सकता है।’’

पीठ ने राज्य सरकार से मां और बेटे, दोनों के लिए उपलब्ध सामाजिक सुरक्षा उपायों के बारे में भी जानकारी मांगी।

पीठ ने निर्देश दिया कि जापा भुए को ‘पैरालीगल’ स्वयंसेवक के तौर पर काम दिया जाए और उन्हें दिया जाना वाला मानदेय कानून के तहत तय न्यूनतम मजदूरी से कम न हो।

न्यायायल ने टिप्पणी की कि जापा भुए अन्य दिव्यांग लोगों को उनके कानूनी अधिकारों और राज्य एवं केंद्र की कल्याणकारी योजनाओं के तहत मिलने वाली सुविधाओं के बारे में जानने में मदद कर सकते हैं।

पीठ ने जमीनी हालात का जायजा लेने के लिए ओडिशा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव को भुए परिवार से व्यक्तिगत रूप से मिलने और बातचीत करने का आदेश दिया।

न्यायालय ने कहा कि राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को परिवार के रहन-सहन की स्थिति, कल्याणकारी लाभों और किसी भी अतिरिक्त सहायता की जरूरत के बारे में विस्तार से एक व्यापक रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी जाती है।

पीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत में जमा की जाने वाली रिपोर्ट में यह भी बताया जाए कि क्या मां किसी आवास योजना के तहत अलग घर पाने की हकदार है।

न्यायालय ने इस मामले को जुलाई के तीसरे हफ्ते में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया और राज्य सरकार को अपने निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने का आदेश दिया।

भाषा धीरज पारुल

पारुल

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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