भुवनेश्वर, 16 फरवरी (भाषा) ओडिशा सरकार ने सोमवार को कहा कि वह पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार (खजाने) की सूची बनाने के लिए पूरी तरह से तैयार है और यह प्रक्रिया जल्द ही शुरू होगी।
राज्य सरकार का यह बयान ओडिशा उच्च न्यायालय के उस हालिया निर्देश के बाद आया है, जिसमें राज्य सरकार को रत्न भंडार में आभूषणों और अन्य मूल्यवान वस्तुओं की सूची तैयार करने का लंबे समय से लंबित काम तीन महीने के भीतर पूरा करने को कहा गया था।
जगन्नाथ मंदिर के अधिकारियों ने 17 जनवरी को यह निर्णय लिया कि राज्य सरकार की मंजूरी के बाद पुनर्निर्मित रत्न भंडार में रखे गए आभूषणों और मूल्यवान वस्तुओं की सूची तैयार करने का काम ‘‘किसी शुभ दिन’’ से शुरू होगा।
रत्न भंडार में एक भीतरी और एक बाहरी कक्ष है। बाहरी कक्ष देवी-देवताओं के दैनिक उपयोग के लिए खुला रहता है, जबकि भीतरी कक्ष को 46 वर्षों के अंतराल के बाद 14 जुलाई, 2024 को सूची तैयार करने के कार्य और संरचना की मरम्मत के लिए खोला गया था।
सोने, हीरे, चांदी के आभूषण, बहुमूल्य पत्थरों और अन्य आभूषणों की पिछली सूची 1978 में बनायी गयी थी।
मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) ने सोमवार को सूची बनाने की तैयारियों की समीक्षा की।
इस बीच, विपक्षी बीजू जनता दल (बीजद) के प्रवक्ता लेनिन मोहंती ने राज्य की भाजपा सरकार से भगवान जगन्नाथ और उनके खजाने को लेकर राजनीति करना बंद करने को कहा।
मोहंती ने पत्रकारों से कहा, ‘‘भाजपा ने भगवान जगन्नाथ के नाम का इस्तेमाल करके जनता को गुमराह किया और सत्ता में आई। सत्ता में आने के बाद पार्टी ने रत्न भंडार की मरम्मत और सूची तैयार करने का वादा किया था। वे लगभग 20 महीने से सत्ता में हैं, लेकिन उन्होंने सूची तैयार नहीं की है। भगवान के खजाने की सूची के लिए उच्च न्यायालय के निर्देश की आवश्यकता पड़ी।’’
भाषा गोला सुरेश
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