नई दिल्ली: युमनाम खेमचंद सिंह की अगुवाई वाली BJP सरकार को मणिपुर में सत्ता संभाले करीब सात महीने हो चुके हैं, लेकिन सरकार अब भी सिर्फ चार कैबिनेट मंत्रियों के साथ चल रही है. खुद मुख्यमंत्री करीब 20 ऐसे विभाग संभाल रहे हैं, जिन्हें अभी किसी को नहीं सौंपा गया है.
फरवरी 2026 में राज्य में राष्ट्रपति शासन खत्म होने के बाद खेमचंद सिंह को मुख्यमंत्री बनाया गया था. केंद्र ने फरवरी 2025 में राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया था, इसके चार दिन बाद एन. बीरेन सिंह ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था. राज्य विधानसभा, जिसमें BJP बहुमत में थी, को निलंबित अवस्था में रखा गया था.
राज्य के कम से कम दो मंत्रियों और BJP के कई वरिष्ठ नेताओं ने दिप्रिंट को बताया कि कैबिनेट का विस्तार होने में देरी से राज्य में फैसले लेने और सरकार चलाने पर असर पड़ रहा है. राज्य मई 2023 से जातीय तनाव से जूझ रहा है.
मणिपुर में मंत्रिपरिषद में मुख्यमंत्री समेत कुल 12 मंत्री हो सकते हैं. इसका मतलब है कि कैबिनेट में सात और मंत्रियों को शामिल करने की जगह है. लेकिन कैबिनेट का विस्तार कब होगा, या होगा भी या नहीं, इसे लेकर कोई स्पष्टता नहीं है. ऐसे में राज्य मुख्यमंत्री और उनके चार कैबिनेट सहयोगियों के भरोसे चल रहा है.
चार कैबिनेट मंत्रियों में से दो उपमुख्यमंत्री खुले तौर पर एक-दूसरे से भिड़ रहे हैं. इनमें से एक, लोसी डिखो ने पिछले हफ्ते आठ अन्य नगा विधायकों के साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा. इसमें दूसरे उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन, जो कुकी समुदाय से हैं, पर कुकी उग्रवादियों के साथ मिलीभगत करने और नागाओं के खिलाफ हिंसा बढ़ाने का आरोप लगाया गया.
किपगेन ने इन आरोपों से इनकार किया है.
राज्य के एक वरिष्ठ BJP नेता और मौजूदा विधायक ने दिप्रिंट को बताया कि उन्होंने कई बार मुख्यमंत्री के सामने कैबिनेट विस्तार का मुद्दा उठाया है.
BJP विधायक, जो बीरेन सिंह की अगुवाई वाली सरकार में मंत्री रह चुके हैं, ने कहा, “मुख्यमंत्री ने राज्यपाल अजय भल्ला और दिल्ली में केंद्रीय नेतृत्व, जिसमें गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल हैं, से मुलाकात की है और कैबिनेट का विस्तार करने की मांग रखी है. लेकिन ऐसा लगता है कि हाईकमान ने अभी तक इसकी मंजूरी नहीं दी है.”
वरिष्ठ नेता ने कहा कि हर गुजरते दिन के साथ कैबिनेट विस्तार की संभावना कम होती दिख रही है. उन्होंने कहा, “मौजूदा सरकार का कार्यकाल अगले साल फरवरी में खत्म हो जाएगा. अब बहुत कम समय बचा है. अगर अभी कैबिनेट का विस्तार भी होता है, तो नए मंत्रियों के पास चुनाव से पहले अपना काम दिखाने के लिए बहुत कम समय होगा. शायद यही वजह है कि केंद्रीय नेतृत्व इसके पक्ष में नहीं है.”
लोसी डिखो ने गुरुवार को दिप्रिंट को दिए इंटरव्यू में कहा कि कैबिनेट का विस्तार न होने से सरकार का काम प्रभावित हुआ है. उन्होंने कहा, “मैं हमेशा मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह से कहता हूं कि कैबिनेट का विस्तार करें, जिम्मेदारी बांटें. लेकिन मुझे नहीं पता कि मुख्यमंत्री या केंद्रीय नेतृत्व की सोच क्या है. अभी हम सिर्फ पांच लोग जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. हमारे लिए यह बहुत मुश्किल है.”
डिखो ने आगे कहा, “मैं उपमुख्यमंत्री हूं, लेकिन मेरे पास दो विभागों के अलावा कोई और ताकत नहीं है. अगर हम जिम्मेदारियां बांट दें और दूसरे मंत्रियों को भी काम दें, तो यह स्थिति बदली जा सकती है. लेकिन मुझे नहीं पता कि उनकी सोच क्या है…. दूसरे विधायक भी नाराजगी जता रहे हैं.”
विभाग
मुख्यमंत्री वित्त, कार्मिक और प्रशासनिक सुधार, योजना, IT समेत 20 से ज्यादा ऐसे विभाग संभाल रहे हैं, जिन्हें अभी किसी को नहीं सौंपा गया है.
गोविंदास कोंथौजम, जिन्हें पूर्व मुख्यमंत्री बीरेन सिंह का करीबी माना जाता है, गृह, खेल और युवा मामलों के विभाग संभाल रहे हैं.
दो उपमुख्यमंत्रियों में से सेनापति के नगा विधायक डिखो के पास लोक स्वास्थ्य इंजीनियरिंग विभाग और वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग हैं. वहीं कांगपोकपी के कुकी विधायक नेमचा किपगेन को ग्रामीण विकास, पंचायती राज, जनजातीय मामले और पहाड़ी विभाग दिए गए हैं.
चौथे कैबिनेट मंत्री, नेशनल पीपुल्स पार्टी के खुराइजम लोकेन सिंह, कला, संस्कृति और पर्यटन विभाग संभालते हैं.
राज्य के एक वरिष्ठ BJP विधायक ने नाम न बताने की शर्त पर दिप्रिंट को बताया कि मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह के पास जो कई विभाग हैं, उनमें काम प्रभावित हो रहा है. BJP विधायक ने कहा, “राज्य में फिर से तनाव बढ़ रहा है. मुख्यमंत्री स्थिति संभालने की पूरी कोशिश कर रहे हैं. उनके पास 20 से ज्यादा विभाग हैं और उनके पास हर विभाग को देखने का समय नहीं है. यह इंसानी तौर पर संभव नहीं है.”
उन्होंने कहा कि राज्य के नेतृत्व के हाथ बंधे हुए हैं, क्योंकि उन्हें पूरी तरह से अधिकार नहीं दिए गए हैं.
विधायक ने कहा, “मुख्यमंत्री को वित्त या दूसरे मामलों में पूरी आजादी नहीं दी गई है. उन्हें हर चीज के लिए राज्यपाल से सलाह करनी पड़ती है. वह अपने दम पर बड़े तबादले तक नहीं कर सकते. हर चीज के लिए उन्हें हरी झंडी का इंतजार करना पड़ता है. इससे शासन व्यवस्था प्रभावित हो रही है. जातीय हिंसा के कारण विस्थापित हुए हजारों लोगों का पुनर्वास भी उस गति से नहीं हो रहा है, जिस गति से होना चाहिए.”
दूसरे BJP विधायक ने कहा कि केंद्र मणिपुर के साथ एक अनाथ की तरह व्यवहार कर रहा है. विधायक ने कहा, “राज्य BJP को ही देख लीजिए. पार्टी हाईकमान ने अभी तक प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं की है. पूरी स्थिति अस्त-व्यस्त है.”
मई 2023 में मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच जातीय संघर्ष शुरू होने के बाद राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ गई थी. इसके बाद राष्ट्रपति शासन लगाया गया. उस समय N. बीरेन सिंह की BJP की अगुवाई वाली सरकार स्थिति को काबू में करने में नाकाम रही थी. आखिरकार सिंह ने फरवरी 2025 में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. वह लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने के तीन साल बाद पद से हटे.
राष्ट्रपति शासन के दौरान हिंसा में काफी कमी आई थी, लेकिन पिछले कुछ महीनों में पहाड़ी इलाकों में फिर तनाव बढ़ गया है, जहां कुकी और नगा समुदाय एक-दूसरे से लड़ रहे हैं. मैतेई अब इस संघर्ष में शामिल नहीं हैं.
प्रशासन में भी फैसले लेने को लेकर असमंजस
राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि प्रशासन में भी फैसले लेने को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है.
अधिकारी ने कहा, “मई 2023 से राज्य जातीय आधार पर बंटा हुआ है. मैतेई अब इम्फाल घाटी में रह रहे हैं, जबकि सभी कुकी पहाड़ी इलाकों में या राज्य के बाहर चले गए हैं. सरकार के सभी विभाग, चाहे सचिवालय हो या पुलिस, अस्पताल हों या स्कूल और कॉलेज, घाटी में सिर्फ मैतेई और पहाड़ियों में सिर्फ कुकी लोगों के साथ काम कर रहे हैं. हमें लगा था कि जब कोई सरकार सत्ता संभालेगी, तो धीरे-धीरे सामान्य स्थिति वापस आएगी. लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ.”
इस हफ्ते की शुरुआत में मणिपुर को अपना पांचवां मुख्य सचिव मिला. राजीव सिंह ठाकुर 1995 बैच के राजस्थान कैडर के IAS अधिकारी हैं, जिन्हें मणिपुर कैडर में प्रतिनियुक्त किया गया है. ठाकुर ने पुनीत कुमार गोयल की जगह ली है, जो 31 अगस्त को रिटायर हो गए. गोयल से पहले, मई 2023 के बाद से मणिपुर में लगातार तेजी से तीन मुख्य सचिव बदले जा चुके हैं.
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