नई दिल्ली: पहलगाम आतंकी हमले की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के सामने कई चुनौतियां थीं. घटना स्थल दूर-दराज के इलाके में था और CCTV फुटेज जैसे अहम सबूत भी मौजूद नहीं थे, जिससे जांच और मुश्किल हो गई.
मामले में पहला महत्वपूर्ण सुराग तब मिला, जब NIA ने 1,113 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की. इनमें आसपास के ‘ढोकों’ (घुमंतू पशुपालकों की झोपड़ियों) में रहने वाले 500 से ज्यादा लोग शामिल थे.
एक स्थानीय व्यक्ति ने बताया कि उसने 21 अप्रैल 2025 को, यानी नरसंहार से एक दिन पहले, तीन हथियारबंद लोगों को पोनीवाला परवेज अहमद जोठर के ढोक में जाते देखा था. वहां उसके साथ उसका चाचा बशीर अहमद जोठर भी मौजूद था. बाद में यही तीन लोग आतंकी निकले.
उस व्यक्ति ने यह भी बताया कि अगले दिन दोपहर में उसने उन्हीं तीनों लोगों को परवेज और बशीर के साथ बैसरन के घास के मैदानों में देखा था.
इसके अलावा उस व्यक्ति ने आतंकवाद विरोधी एजेंसी को कई और महत्वपूर्ण जानकारियां भी दीं. अपने बयान में उसने कहा कि आतंकियों ने उसे देख लिया था, लेकिन उन्होंने उसे इसलिए छोड़ दिया क्योंकि वह उनके कहने पर कलमा पढ़ सका था.
इन्हीं खुलासों ने बाद में पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) के प्रमुख और अन्य आरोपियों के खिलाफ NIA की चार्जशीट का आधार तैयार किया.
गृह मंत्रालय (MHA) के आदेश के बाद NIA ने 27 अप्रैल को आधिकारिक तौर पर पहलगाम आतंकी हमले की जांच अपने हाथ में ली थी. इसके बाद एजेंसी ने 15 दिसंबर को चार्जशीट दाखिल की.
‘इनाम’ के तौर पर मिले 3,000 रुपये
21 अप्रैल की शाम बशीर अपने भाई के ढोक में था. तभी उसकी बहन ने उससे कहा कि वह अपने भतीजे के ढोक में मौजूद दो बच्चों, जिनमें एक 10 महीने का बच्चा भी था, का हालचाल देख आए.
रास्ते में बशीर जंगल में अपने घोड़े को देख रहा था, तभी उसने कथित तौर पर तीन हथियारबंद लोगों को पेड़ों के पीछे से निकलते देखा. चार्जशीट में कहा गया है कि उन्होंने अल्लाह के नाम पर रहने के लिए सुरक्षित जगह और खाने का इंतजाम करने को कहा.
NIA के मुताबिक, बशीर उन तीनों आतंकियों को अपने भतीजे परवेज के ढोक में ले गया, जहां परवेज अपनी पत्नी और छोटे बच्चे के साथ मौजूद था. परवेज ने आतंकियों को पानी दिया. उन्होंने कहा कि वे लंबी दूरी तय करके आए हैं और बहुत थके और प्यासे हैं.
जब आतंकियों ने कहा कि अल्लाह की राह में लड़ने वालों और कश्मीरी मुसलमानों की आजादी के लिए जिहाद करने वालों को पानी पिलाने से उसे ‘सवाब’ मिलेगा, तब परवेज को समझ आ गया कि वे ‘मुजाहिद’ हैं.
इसके अलावा, उनकी उर्दू में पंजाबी लहजा होने से परवेज को एहसास हुआ कि वे स्थानीय कश्मीरी नहीं हैं. आतंकियों के कहने पर परवेज ने तीनों को अपने ढोक में कंबलों और बिस्तरों के नीचे छिपा दिया और अपनी पत्नी से चाय बनाने को कहा.
चाय पीने के बाद आतंकियों में से एक ने रात का खाना बनाने को कहा. इसके बाद परवेज की पत्नी ने चावल और टमाटर से बनी एक डिश तैयार की. चार्जशीट के मुताबिक, करीब पांच घंटे रुकने के बाद आतंकी रात लगभग 10 बजे वहां से चले गए.
जाते समय वे फटे हुए कपड़े में 10 रोटियां और पॉलीथिन बैग में कुछ सब्जियां साथ ले गए. उन्होंने मसाले, बर्तन, कंबल और तिरपाल भी साथ ले गए. बशीर ने जांचकर्ताओं को बताया कि इन सब मदद के बदले आतंकियों ने परवेज को 3,000 रुपये दिए.
NIA की चार्जशीट के अनुसार, बैसरन से बरामद कंबलों और तिरपाल से लिए गए DNA नमूने बशीर के DNA नमूने से मेल खाते हैं. इससे आतंकी हमले से पहले की घटनाओं की पुष्टि हुई.
अगले दिन बैसरन के पास आतंकियों को देखने के बावजूद परवेज और बशीर अपने रोजमर्रा के काम में लगे रहे और पर्यटकों को घोड़े पर घुमाने का काम करते रहे. वे दोपहर 1 बजे तक पर्यटकों का इंतजार करते रहे और फिर नीचे शहर लौट गए.
NIA ने चार्जशीट में कहा, “अगले दिन बैसरन में उन्हीं आतंकियों को दोबारा देखने के बावजूद परवेज (A-6) चुप रहा. यह लगातार चुप्पी गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की धारा 19 के तहत ‘जानकारी छिपाने’ की श्रेणी में आती है.”
एजेंसी ने पिछले साल जून में दोनों पोनीवालों को गिरफ्तार कर लिया था.
हमले के तीन महीने बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद को बताया था कि तीनों आतंकी—फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान शाह, हबीब ताहिर उर्फ जिब्रान और हमजा अफगानी—श्रीनगर के बाहरी इलाके दाचीगाम जंगल में मुठभेड़ में मारे गए.
चार्जशीट के मुताबिक, बशीर और परवेज को शवगृह ले जाया गया, जहां उन्होंने पुष्टि की कि जिन आतंकियों को उन्होंने अपने यहां ठहराया था, वही ऑपरेशन महादेव में मारे गए थे.
पहलगाम आतंकी हमला: कड़ी कैसे मिली
बैसरन के घास के मैदानों से फॉरेंसिक टीम ने 38 खाली कारतूस बरामद किए. इनसे न सिर्फ यह पता चला कि पर्यटक स्थल पर कितनी भारी फायरिंग हुई थी, बल्कि NIA की जांच की एक बड़ी पहेली भी सुलझ गई.
मारे गए आतंकियों से बरामद दो AK-47 राइफल और एक M-4 कार्बाइन को जांच के लिए चंडीगढ़ फॉरेंसिक लैब भेजा गया. रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि बैसरन से मिले कारतूस उन्हीं हथियारों से चलाए गए थे, जो ऑपरेशन महादेव में बरामद हुए थे.
पिछले साल जून में तैयार की गई चंडीगढ़ लैब की रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि बैसरन और गांदरबल जिले के गगनगीर सुरंग क्षेत्र से मिले कारतूस एक ही हथियार से चलाए गए थे.
चार्जशीट में NIA ने कहा, “सबूतों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया है कि दोनों मामलों में इस्तेमाल हुई M-4 कार्बाइन एक ही है और दोनों घटनाओं के बीच संबंध है.”
इस निष्कर्ष के बाद एजेंसी को शक हुआ कि यह आतंकी मॉड्यूल पिछले कुछ वर्षों में हुए अन्य आतंकी हमलों में भी शामिल हो सकता है. इसके बाद NIA ने जम्मू-कश्मीर के पुंछ-राजौरी सेक्टर समेत अन्य घटनास्थलों से जुटाए गए नमूनों की भी जांच करवाई.
पिछले साल नवंबर में तैयार हुई एक और फॉरेंसिक रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि यही M-4 कार्बाइन दिसंबर 2023 और मई 2024 में सेना और वायुसेना के जवानों पर हुए घात लगाकर किए गए हमलों में भी इस्तेमाल हुई थी.
इसके अलावा, जून 2024 में रियासी जिले में यात्री बस पर हुए हमले में भी इसी हथियार के इस्तेमाल के सबूत मिले. इस हमले में 9 श्रद्धालुओं की मौत हुई थी और 40 से ज्यादा लोग घायल हुए थे.
इसी तरह, अमेरिकी मूल के इस हथियार का इस्तेमाल अक्टूबर में गांदरबल में हुए उस हमले में भी किया गया था, जिसमें छह निर्माण मजदूरों समेत सात लोगों की हत्या कर दी गई थी.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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