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Monday, 24 August, 2026
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दिल्ली में बिना वैध PUC सर्टिफिकेट दौड़ रहे सरकारी वाहनों पर NGT सख्त, कार्रवाई के दिए निर्देश

NGT ने कहा कि सरकारी और किराए पर लिए गए वाहनों पर PUC नियमों को जमीन पर पूरी गंभीरता से लागू किया जाए.

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नई दिल्ली: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने दिल्ली सरकार को सरकारी और सरकारी काम के लिए किराए पर लिए गए वाहनों पर प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUCC) के नियमों को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है. ट्रिब्यूनल ने कहा कि नियमों को जमीन पर पूरी गंभीरता से लागू किया जाना चाहिए.

NGT की अध्यक्षता चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और एक्सपर्ट मेंबर डॉ. अफरोज अहमद की बेंच ने कहा कि अगर दिल्ली की सड़कों पर कोई सरकारी वाहन वैध PUCC के बिना चलता पाया जाता है, तो संबंधित एजेंसियां उसके खिलाफ जरूरी सुधारात्मक और दंडात्मक कार्रवाई करें.

ट्रिब्यूनल ने दिल्ली सरकार के संबंधित विभागों को 7 अप्रैल 2026 को जनरल एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट (GAD), GNCTD की ओर से जारी सर्कुलर का पालन सुनिश्चित करने को भी कहा. इस सर्कुलर के मुताबिक, सरकारी काम के लिए इस्तेमाल होने वाले सभी सरकारी और किराए पर लिए गए वाहनों के पास हर समय वैध PUCC होना जरूरी है.

सर्कुलर में साफ कहा गया है कि बिना वैध PUC सर्टिफिकेट वाले किसी भी वाहन को सरकारी काम के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाएगा.

ये निर्देश जितेंद्र महाजन की ओर से दायर एक आवेदन पर सुनवाई के दौरान दिए गए. आवेदन में दिल्ली में सरकारी वाहनों की ओर से नियमों का पालन नहीं किए जाने समेत कई मुद्दे उठाए गए थे. सुनवाई के दौरान आवेदक ने अपनी दलील सरकारी वाहनों के कथित तौर पर बिना वैध PUCC चलने तक सीमित कर दी.

ट्रिब्यूनल ने दिल्ली सरकार की ओर से पेश किए गए आंकड़ों पर भी ध्यान दिया. सरकार के हलफनामे के मुताबिक, 19 जून 2025 तक दिल्ली में डीजल, पेट्रोल या CNG से चलने वाले 30,995 एक्टिव रजिस्टर्ड सरकारी वाहन थे. इनमें इलेक्ट्रिक वाहन शामिल नहीं थे. इनमें से 14,569 वाहनों के पास वैध PUCC था, जबकि 12,399 के PUCC की अवधि खत्म हो चुकी थी. वहीं, 4,027 वाहनों का PUCC डेटा उपलब्ध नहीं था.

सरकार ने ट्रिब्यूनल को बताया कि 24 जून 2025 तक पेट्रोल पंपों पर लगे ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) सिस्टम के जरिए वैध PUCC की अवधि खत्म हो चुके 1,360 वाहनों का पता लगाया गया और नवगति की ओर से उनके चालान किए गए.

आवेदन में बताए गए 106 वाहनों की स्थिति का भी आदेश में जिक्र किया गया. इनमें 102 सरकारी और चार निजी वाहन थे. इनमें से 30 के पास वैध PUCC था, 60 के PUCC की अवधि खत्म हो चुकी थी और उनका चालान किया गया था. चार वाहन कबाड़ घोषित किए जा चुके थे, दो को कबाड़ घोषित करने की प्रक्रिया चल रही थी, तीन वाहन चल नहीं रहे थे, पांच ऐसे वाहन थे जिनकी उपयोग की अवधि खत्म हो चुकी थी और उनके खिलाफ धारा 133 के तहत नोटिस जारी किए गए थे, जबकि दो वाहनों को कबाड़ में भेज दिया गया था.

ट्रिब्यूनल ने कहा कि दिल्ली सरकार ने एक ऐसा सिस्टम बताया है, जिसमें 498 महत्वपूर्ण जगहों पर लगाए गए ANPR कैमरों को VAHAN पोर्टल से जोड़ा गया है. इनमें पेट्रोल पंप और ISBT भी शामिल हैं. यह सिस्टम बिना वैध PUCC वाले वाहनों की पहचान करता है. नियमों का उल्लंघन मिलने पर अपने आप चालान जारी हो जाता है.

सरकार ने यह भी बताया कि PUCC से जुड़े नियमों के उल्लंघन पर उसका सिस्टम सरकारी और निजी वाहनों में कोई अंतर नहीं करता. यानी नियमों का पालन नहीं करने पर सरकारी वाहनों का भी चालान किया जा सकता है.

NGT ने यह भी ध्यान दिया कि PUCC सॉफ्टवेयर में ऐसा सिस्टम मौजूद है, जो 10 साल से ज्यादा पुराने डीजल वाहनों और 15 साल से ज्यादा पुराने पेट्रोल वाहनों को PUC सर्टिफिकेट जारी होने से रोकता है. यह नियम सरकारी और निजी दोनों वाहनों पर समान रूप से लागू होता है.

ट्रिब्यूनल ने यह भी बताया कि दिल्ली में करीब 950 PUC सेंटर चल रहे हैं. परिवहन विभाग ने मई 2023 से मई 2025 के बीच 2,050 निरीक्षण किए. इस दौरान 274 एडवाइजरी और 76 कारण बताओ नोटिस जारी किए गए, 146 चेतावनियां दी गईं और 17 सेंटरों का संचालन निलंबित या बंद किया गया.

बेंच ने कहा कि आवेदक की यह मांग कि PUCC के नियम सरकारी और सरकारी काम के लिए किराए पर लिए गए वाहनों पर भी सख्ती और समान रूप से लागू होने चाहिए, दिल्ली सरकार ने इसका विरोध नहीं किया.

इन परिस्थितियों को देखते हुए ट्रिब्यूनल ने कहा कि सरकार के हलफनामे में बताए गए नियम लागू करने के सिस्टम को “जमीन पर पूरी गंभीरता से लागू किया जाना चाहिए.”

NGT ने संबंधित GNCTD विभाग को 7 अप्रैल 2026 के सर्कुलर का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया.

इसके साथ ही NGT ने मूल आवेदन का निपटारा कर दिया.

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