नई दिल्ली: नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) पेपर लीक की जांच अपने हाथ में लेने के कुछ घंटों बाद ही, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने राजस्थान के जयपुर में करीब दो दर्जन संदिग्धों को हिरासत में लिया है, यह जानकारी दिप्रिंट को मिली है.
इनमें भारतीय जनता पार्टी के युवा संगठन भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के स्थानीय सदस्य दिनेश बिवाल भी शामिल हैं. उनके भाई मंगीलाल बिवाल को भी हिरासत में लिया गया है. दिप्रिंट ने BJYM से प्रतिक्रिया मांगी है, जवाब मिलने पर रिपोर्ट अपडेट की जाएगी.
दिनेश के सोशल मीडिया अकाउंट पर BJP के विधायकों और राज्य स्तर के नेताओं के साथ कई तस्वीरें भरी हुई हैं. दोनों भाई मूल रूप से ग्रामीण जयपुर के रहने वाले हैं, लेकिन पिछले पांच-छह साल से सीकर में रह रहे थे.
शिक्षा मंत्रालय की शिकायत पर CBI ने मंगलवार शाम को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की उन धाराओं के तहत मामला दर्ज किया, जो आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, चोरी और सबूत मिटाने जैसे अपराधों से जुड़ी हैं. इसके साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम की संबंधित धाराएं भी लगाई गई हैं.
इन दोनों की गिरफ्तारी के बाद विपक्षी कांग्रेस पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी. पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली BJP सरकार से जांच में देरी पर सवाल उठाए और राज्य पुलिस की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) द्वारा FIR दर्ज न करने को मुद्दा बनाया.
जांच से जुड़े सूत्रों ने कहा कि बिवाल भाइयों का “संदिग्ध” इतिहास रहा है, जो इस मामले में मिले सबूतों के बाद सामने आया.
जांच से जुड़े एक सूत्र ने कहा, “पिछले साल उनके परिवार के चार सदस्य NEET में पास हुए थे, जिससे शक होता है कि उन्हें प्रश्नपत्रों तक गैरकानूनी पहुंच थी.”
SOG की शुरुआती जांच के अनुसार, दिनेश बिवाल ने गुरुग्राम के एक करियर काउंसलर से 15 लाख रुपये में प्रश्नपत्र खरीदा था, जिसने कथित तौर पर यह पेपर मुख्य आरोपी शुभम खैरनार से लिया था.
गुरुग्राम के उस काउंसलर की पहचान यश यादव के रूप में हुई है. एक अन्य सूत्र ने दिप्रिंट को बताया, “दिनेश ने पिछले साल भी यादव से प्रश्नपत्र खरीदे थे और उसके परिवार के चारों उम्मीदवार पास हो गए थे.”
इस साल दिनेश बिवाल ने कथित तौर पर 29 अप्रैल को, यानी 3 मई को होने वाली NEET परीक्षा से चार दिन पहले, प्रश्नपत्र हासिल कर लिया था. सूत्रों ने कहा कि यादव ने यही पेपर बिहार और जम्मू-कश्मीर के कई लोगों को भी बेचा था.
इस बीच, CBI ने एक संदिग्ध की पहचान की है, जिसका नाम धनंजय लोखंडे है. उसने कथित तौर पर पेपर की फिजिकल कॉपी कुरियर के जरिए खैरनार तक पहुंचाई थी.
सूत्रों के अनुसार, महाराष्ट्र के अहिल्यानगर का रहने वाला लोखंडे पिछले कुछ महीनों से पुणे के वाघोली इलाके में रह रहा था.
जांच से जुड़े तीसरे सूत्र ने दिप्रिंट को बताया, “लोखंडे वही व्यक्ति था जिसने पेपर की फिजिकल कॉपी खैरनार तक पहुंचाई थी. उसकी पहचान उस कंसाइनमेंट की तकनीकी जानकारी के आधार पर हुई जो खैरनार को मिला था.”
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