नई दिल्ली: जयराम रमेश ने नीट-यूजी 2026 परीक्षा रद्द होने को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) में सिर्फ सुधार नहीं, बल्कि “पूरी तरह से पुनर्गठन” की जरूरत है और इसे “मोदी सरकार के भ्रष्ट गुर्गों” से दूर रखा जाना चाहिए.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए जयराम रमेश ने कहा कि 16 जून 2024 को शिक्षा मंत्री ने खुद माना था कि एनटीए को “काफी सुधार” की जरूरत है, लेकिन दो साल बाद भी कोई ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं देती.
उन्होंने कहा कि हालिया नीट-यूजी पेपर लीक और परीक्षा रद्द होना एनटीए की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है. रमेश ने संसद की स्थायी समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि 2024 में एनटीए द्वारा कराई गई 14 राष्ट्रीय परीक्षाओं में से 5 में पेपर लीक और गड़बड़ियों के मामले सामने आए थे.
कांग्रेस नेता ने कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET) को लेकर भी सरकार की आलोचना की. उन्होंने कहा कि CUET लागू होने से शैक्षणिक संस्थानों का पूरा अकादमिक कैलेंडर बिगड़ गया है और रिजल्ट में देरी के कारण छात्र निजी विश्वविद्यालयों की तरफ जा रहे हैं.
उन्होंने कहा कि जेईई मेन्स 2025 में आंसर की में गलती के कारण 12 सवाल हटाने पड़े थे. रमेश ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने वर्षों पुरानी प्रवेश और परीक्षा व्यवस्था को खत्म कर एक केंद्रीकृत संस्था बनाई है, जो भ्रष्टाचार से घिरी हुई है और संसद के प्रति जवाबदेह भी नहीं है.
इस बीच, केंद्र सरकार ने नीट-यूजी 2026 परीक्षा रद्द कर दी है. 3 मई को आयोजित हुई इस परीक्षा पर पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोप लगे थे. सरकार ने मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी है.
एनटीए ने बयान जारी कर कहा कि केंद्रीय एजेंसियों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों से मिले इनपुट के बाद परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठे, जिसके बाद परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया गया.
एजेंसी ने स्पष्ट किया कि मई 2026 परीक्षा के लिए छात्रों का रजिस्ट्रेशन, उम्मीदवारों का डेटा और परीक्षा केंद्र पहले जैसे ही मान्य रहेंगे. दोबारा परीक्षा के लिए नया रजिस्ट्रेशन या अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा.