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Tuesday, 4 August, 2026
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ASI में करीब 35% पद खाली, अलग-अलग विभागों में बड़ी संख्या में वैकेंसी

संसद में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण में 3,073 पद खाली हैं, जबकि स्मारकों को बचाने और उनके संरक्षण पर सरकार का खर्च बढ़ रहा है.

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नई दिल्ली: केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत द्वारा संसद में दिए गए आंकड़ों से पता चला है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) कर्मचारियों की भारी कमी से जूझ रहा है. एएसआई में कुल 8,755 पद मंजूर हैं, लेकिन इनमें से 3,073 पद खाली हैं.

शेखावत ने लोकसभा में लिखित जवाब में एएसआई में पुरातत्वविदों, संरक्षण सहायकों, इंजीनियरों और दूसरे तकनीकी कर्मचारियों के खाली पदों की जानकारी दी.

एएसआई के पुरातत्व विभाग में मंजूर 420 पदों में से 191 पद खाली हैं. संरक्षण विभाग में, जिसमें संरक्षण सहायक और इंजीनियर शामिल हैं, मंजूर 831 पदों में से 447 पद खाली हैं.

सर्वेयर, ड्राफ्ट्समैन, विज्ञान, शिलालेख, बागवानी और वास्तुकार विभागों में मंजूर 440 पदों में से 191 पद खाली हैं. लाइब्रेरी, एमटीएस, प्रशासन, स्टेनोग्राफर और फोटोग्राफर विभागों में मंजूर 7,064 पदों में से 2,244 पद खाली हैं.

आंकड़ों से पता चलता है कि हर विभाग में करीब आधे पद खाली हैं.

हालांकि, एएसआई में काम कर रहे 5,682 कर्मचारियों में से 2,034 अनारक्षित वर्ग, 1,983 ओबीसी, 205 ईडब्ल्यूएस, 1,048 एससी और 412 एसटी वर्ग से हैं. उदाहरण के लिए, एएसआई के रायपुर सर्किल में पुरातत्वविदों, संरक्षण कर्मचारियों और दूसरे तकनीकी कर्मचारियों के मंजूर 68 पदों में से 28 पद खाली हैं.

शेखावत ने कहा, “भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण में कर्मचारियों की संख्या पर्याप्त है या नहीं, इसकी लगातार समीक्षा की जाती है. अलग-अलग सर्किलों में मंजूर पदों की संख्या तय करते समय काम की जरूरत, उनके क्षेत्र में आने वाले केंद्रीय संरक्षित स्मारकों (CPMs)/स्थलों की संख्या और दूसरी प्रशासनिक जरूरतों को ध्यान में रखा जाता है. उपलब्ध कर्मचारियों की तैनाती की भी समय-समय पर समीक्षा की जाती है, ताकि केंद्रीय संरक्षित स्मारकों और स्थलों का संरक्षण, रखरखाव और प्रबंधन ठीक से किया जा सके.”

भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक ने पिछले 13 वर्षों में दो बार कर्मचारियों की कमी का मुद्दा उठाया है. इस मामले को देखने के लिए 2022 में एक बार और फरवरी 2026 में दोबारा एक संसदीय समिति भी बनाई गई थी.

हाल ही में परिवहन, पर्यटन और संस्कृति पर बनी संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट में भी एएसआई के संरक्षण वाले उन स्थलों को लेकर चिंता जताई गई, जहां सुरक्षा के लिए कर्मचारी मौजूद नहीं हैं. समिति ने मंत्रालय को सुझाव दिया कि वह “राज्य सरकारों के साथ मिलकर खतरे में मौजूद नॉन-एएसआई विरासत इमारतों और स्थलों की सूची तैयार करे.”

स्मारकों के संरक्षण के लिए फंड

शेखावत ने पिछले पांच वर्षों में स्मारकों के संरक्षण के लिए दिए गए फंड की जानकारी भी साझा की.

2025-26 में मोदी सरकार ने देशभर के संरक्षित स्मारकों के संरक्षण, सुरक्षा और आसपास के पर्यावरण के विकास के लिए 376.88 करोड़ रुपये दिए.

2024-25 में स्मारकों के संरक्षण के लिए 313.43 करोड़ रुपये दिए गए. 2021-26 के बीच मोदी सरकार ने संरक्षित स्मारकों के संरक्षण के लिए कुल 1,796.55 करोड़ रुपये दिए. भारत में एएसआई द्वारा संरक्षित स्मारकों और स्थलों की संख्या सिर्फ 3,688 है.

शेखावत ने कहा, “एएसआई इन स्मारकों और स्थलों का संरक्षण 2014 की राष्ट्रीय संरक्षण नीति और प्राचीन स्मारक तथा पुरातत्व स्थल एवं अवशेष (AMASR) अधिनियम, 1958 और उसके तहत बनाए गए नियमों के अनुसार करता है. इन सभी स्मारकों और स्थलों का संरक्षण, रोजाना रखरखाव और देखभाल जरूरत और उपलब्ध संसाधनों के हिसाब से नियमित रूप से की जाती है. ये सभी स्मारक और स्थल संरक्षण की अच्छी स्थिति में हैं.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)

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