नई दिल्ली: राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने विशेष अभियान के तहत 3,800 से ज्यादा बच्चों को बाल मजदूरी से बचाया है. महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के तहत काम करने वाले NCPCR ने 12 जून को “Pan-India Rescue and Rehabilitation” अभियान शुरू किया था, जो 31 अगस्त तक चला.
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, NCPCR ने राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन, जिला मजिस्ट्रेटों, श्रम विभागों, पुलिस और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर बच्चों को बाल मजदूरी से बचाने के लिए अभियान चलाया. इसमें उन बच्चों की भी पहचान की गई जो मानव तस्करी और शोषण के खतरे में थे.
NCPCR ने संबंधित अधिकारियों से बाल मजदूरी और मानव तस्करी वाले संवेदनशील इलाकों में अभियान तेज करने और लक्षित तरीके से बच्चों को बचाने के लिए कहा था. राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से बचाए गए बच्चों की संख्या, दर्ज FIR, पुनर्वास, परिवार में वापस भेजने, बच्चों को दोबारा शिक्षा से जोड़ने, मुआवजे और आगे की कार्रवाई से जुड़ा नियमित डेटा भी मांगा गया.
अभियान की निगरानी और जमीनी स्तर की समस्याओं को दूर करने के लिए NCPCR ने जिला प्रशासन के साथ बैठकें भी कीं. इन बैठकों में बचाव अभियान की समीक्षा, काम में आ रही दिक्कतों को दूर करने, समय पर Action Taken Reports (ATR) जमा करने और संबंधित विभागों और एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल पर चर्चा की गई.
NCPCR ने सोशल मीडिया और दूसरे संचार माध्यमों के जरिए जागरूकता अभियान भी चलाया. इसमें बाल मजदूरी की शिकायत करने, बच्चों को बचाए जाने के बाद उनके पुनर्वास और उन्हें दोबारा शिक्षा से जोड़ने की जरूरत के बारे में जानकारी दी गई.
मंत्रालय के मुताबिक, अभियान की लगातार निगरानी के चलते NCPCR ने राज्य सरकारों के साथ मिलकर 3,800 से ज्यादा बच्चों को बचाया. अभियान के दौरान 575 से ज्यादा FIR भी दर्ज की गईं.