इंफाल: सुरक्षा से जुड़े सूत्रों ने दिप्रिंट को बताया कि मणिपुर के पहाड़ी जिलों कांगपोकपी, कामजोंग और उखरुल में शुक्रवार से नागा और कुकी समुदायों के बीच हिंसा फिर भड़क गई है. इस ताजा हिंसा में संदिग्ध नागा और कुकी उग्रवादियों ने कम से कम नौ लोगों की हत्या कर दी और एक दर्जन से ज्यादा घरों को आग लगा दी.
हालांकि, शनिवार शाम तक मणिपुर पुलिस की तरफ से मरने वालों की सही संख्या की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई थी. यह हिंसा ऐसे समय में हुई, जब मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह दिल्ली में थे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर रहे थे.
मुख्यमंत्री ने X पर एक पोस्ट में कहा कि उनकी सरकार मणिपुर के लोगों के लिए लंबे समय तक शांति, स्थिरता और सभी को साथ लेकर विकास करने के अपने संकल्प पर कायम है.
इस हिंसा का मुख्य केंद्र कामजोंग जिले का चासाद गांव था, जहां शुक्रवार रात संदिग्ध उग्रवादियों ने 42 साल की एक कुकी महिला की हत्या कर दी. हालांकि कामजोंग जिले में नागा समुदाय की आबादी ज्यादा है, लेकिन चासाद गांव में कुकी समुदाय के काफी लोग रहते हैं.
महिला की मौत के बाद तनाव बढ़ने लगा. दोनों तरफ के संदिग्ध हथियारबंद समूहों ने दूसरे समुदाय के घरों में आग लगाना शुरू कर दिया. इसके बाद हुई हिंसा में शनिवार सुबह चासाद गांव में 22 साल के एक कुकी युवक की हत्या कर दी गई.
It was a privilege to meet the Hon’ble Prime Minister, Shri @narendramodi ji, in New Delhi today.
I deeply appreciate his visionary leadership and unwavering commitment to the development of Manipur. Guided by his leadership, our government remains steadfast in its resolve to… pic.twitter.com/de4bABVyC9
— Khemchand Yumnam (@YKhemchandSingh) October 10, 2026
इसके बाद हथियारबंद लोगों ने कामजोंग जिले के एक तांगखुल नागा जनजाति के गांव में गोलीबारी की. इसमें नागा समुदाय के दो गांव के स्वयंसेवकों की मौत हो गई.
शनिवार को दोनों समुदायों के बीच झड़पें फैलकर कांगपोकपी जिले तक पहुंच गईं. इस जिले में कुकी समुदाय की आबादी ज्यादा है, लेकिन कुछ इलाकों में नागा समुदाय के लोग भी रहते हैं. एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कांगपोकपी के तापोन और मकुई अशांग गांवों में सुरक्षा बलों और संदिग्ध उग्रवादियों के बीच भारी गोलीबारी हुई. इन दोनों गांवों में नागा समुदाय के लोग ज्यादा रहते हैं.
इसके बाद हुई गोलीबारी में कम से कम चार नागा नागरिकों की मौत हो गई.
वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि शनिवार को उखरुल में संदिग्ध उग्रवादियों ने एक गाड़ी पर गोलीबारी की, जिसमें एक नेपाली व्यक्ति की मौत हो गई. नागा बहुल तमेनलोंग जिले और नागा-कुकी मिली-जुली आबादी वाले नोनी जिले में भी तनाव की खबरें सामने आई हैं.
एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने शनिवार शाम बताया कि हालात को काफी हद तक काबू में कर लिया गया है. हालांकि, प्रभावित जिलों में दोनों समुदायों के बीच अभी भी तनाव बना हुआ है.
कुकी-जो समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले सामाजिक संगठन कुकी इनपी मणिपुर ने शनिवार शाम एक बयान जारी किया. संगठन ने कामजोंग जिले के चासाद, उखरुल जिले के याओलेन और कांगपोकपी के आईटी रोड इलाके में आम कुकी-जो नागरिकों पर किए गए हमलों की कड़ी निंदा की. संगठन ने इन हमलों को एक के बाद एक किए गए, आपस में जुड़े, बिना किसी उकसावे के और बेहद क्रूर हमले बताया.
कुकी इनपी के सूचना और प्रचार सचिव जांगहौलुन हाओकिप की ओर से जारी बयान में कहा गया, “ये कायरतापूर्ण हमले NSCN-IM और NSCN-ईस्टर्न फ्लैंक के लोगों ने किए. इसमें राज्य के सुरक्षा बलों, जिनमें तांगखुल राज्य पुलिस और इंडियन रिजर्व बटालियन शामिल हैं, ने भी उनका साथ दिया.”
मणिपुर के नागा समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले सबसे बड़े संगठन यूनाइटेड नागा काउंसिल (UNC) ने भी “हथियारबंद कुकी उग्रवादियों द्वारा नागा गांवों पर किए गए लक्षित हमलों” की निंदा की.
UNC की कार्यकारी समिति के सचिव ए.सी. थोत्सो ने दिप्रिंट से कहा, “पिछले 48 घंटों में चार नागा नागरिकों की हत्या कर दी गई है. कांगपोकपी के मकुई अशांग गांव में एक नागा नागरिक का बेरहमी से सिर काटे जाने की घटना पर UNC कड़ी आपत्ति जताता है. यह अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है.”
उन्होंने आगे कहा, “इतनी बड़ी संख्या में सुरक्षा बल होने के बावजूद उन्होंने नागा गांवों को कुकी समुदाय के हमलों से बचाने के लिए असुरक्षित छोड़ दिया है.”
मणिपुर पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कुछ पहाड़ी जिलों में कुकी और नागा समुदायों के बीच झड़पों को नियंत्रित करना सुरक्षा बलों के लिए कई बार मुश्किल हो जाता है. इसकी वजह यह है कि इन जिलों में दोनों समुदायों के लोग रहते हैं.
अपना नाम नहीं बताने की शर्त पर अधिकारी ने कहा, “उदाहरण के लिए, कांगपोकपी कुकी बहुल जिला है. लेकिन यहां कुछ ऐसे इलाके भी हैं, जहां नागा और कुकी दोनों समुदायों के लोग रहते हैं. यहां तनाव बहुत जल्दी बढ़ जाता है.”
तीन साल से जारी संघर्ष
मणिपुर में 3 मई 2023 से जातीय संघर्ष जारी है. उस दिन राज्य के तीन प्रमुख समुदायों में से दो, मैतेई और कुकी समुदायों के बीच पहली बार हिंसा भड़की थी.
पिछले साल फरवरी में तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था. इसके बाद हिंसा में कुछ समय के लिए कमी आई थी. लेकिन इस साल फरवरी में राष्ट्रपति शासन खत्म होने और युमनाम खेमचंद सिंह के मुख्यमंत्री बनने के बाद तनाव फिर बढ़ गया.
लेकिन इस बार जातीय हिंसा मैतेई और कुकी समुदायों के बीच होने के बजाय कुकी और नागा समुदायों के बीच होने लगी.
2023 से अब तक तीनों समुदायों के 300 से ज्यादा लोगों की हिंसा में मौत हो चुकी है और 60,000 से ज्यादा लोग अपने घर छोड़कर दूसरी जगहों पर रहने को मजबूर हुए हैं.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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