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Sunday, 11 October, 2026
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दीपके, दास और रांका को मिली रिहाई: एक साल तक शांति भंग करने वाली गतिविधि से दूर रहने की शर्त

दिल्ली पुलिस ने शनिवार को दीपके और CJP के प्रवक्ता रांका और दास को हिरासत में ले लिया था, जब वे अपने नियोजित ‘जंतर मंतर 2.0’ आंदोलन में भाग लेने के लिए मुंबई से दिल्ली पहुंचे थे.

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नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के तीन बड़े नेता अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को रविवार सुबह हिरासत से रिहा कर दिया गया. पार्टी के संस्थापक के वकील ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में यह जानकारी दी. रविवार सुबह तीनों को दिल्ली कैंट में एक एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया था और उनकी रिहाई कुछ शर्तों के साथ हुई है. एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की शर्तों के मुताबिक, अगले एक साल तक तीनों ऐसा कोई काम नहीं कर सकते, जिससे शांति भंग हो या अशांति फैले.

दिल्ली पुलिस ने शनिवार को मुंबई से दिल्ली पहुंचे दीपके और CJP के प्रवक्ता रांका और दास को उस समय हिरासत में ले लिया था, जब वे अपने तय कार्यक्रम ‘जंतर मंतर 2.0’ आंदोलन में हिस्सा लेने के लिए पहुंचे थे. शनिवार को उनकी अपील पर राजधानी के अलग-अलग इलाकों में बड़ी संख्या में समर्थक जुटे थे. लेकिन प्रशासन की तरफ से लगाए गए सख्त प्रतिबंधों और लोगों को हिरासत में लिए जाने के कारण प्रदर्शनकारी उस तरह इकट्ठा नहीं हो सके, जैसे जुलाई में CJP के प्रदर्शन के दौरान हुए थे. जुलाई में यह प्रदर्शन भारत में सरकारी परीक्षाओं से जुड़ी शिकायतों को लेकर किया गया था.

तीनों नेताओं को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत हिरासत में लिया गया था. एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने हिरासत से जुड़े अपने आवेदन में दिल्ली पुलिस ने संहिता की धारा 126 और 170 का हवाला दिया था.

धारा 170 पुलिस को यह अधिकार देती है कि अगर उसे पता चलता है कि कोई व्यक्ति ऐसा अपराध करने की योजना बना रहा है, जो संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है, और उस अपराध को किसी दूसरे तरीके से रोकना संभव नहीं है, तो पुलिस बिना वारंट या मजिस्ट्रेट के आदेश के उस व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकती है.

वहीं, BNSS की धारा 126 के तहत, अगर शांति भंग होने या सार्वजनिक अशांति फैलने की आशंका हो, तो एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट हिरासत में लिए गए लोगों से शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड भरवा सकता है.

हिरासत के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब दिल्ली पुलिस ने शनिवार को राजधानी की सड़कों से हिरासत में लिए गए हजारों प्रदर्शनकारियों को रिहा कर दिया. इनमें पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टियों के कई वरिष्ठ नेता शामिल थे. कई वामपंथी नेताओं और छात्र संगठनों के नेताओं, जैसे नेहा बोरा, को भी शनिवार दोपहर हिरासत में लिया गया था. बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया.

दीपके और अन्य नेताओं की गैरमौजूदगी में CJP की कमान संभाल रहे अजिंक्य शिंदे ने रविवार को भी प्रदर्शन करने का ऐलान किया था. उन्होंने कहा था कि उनका आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है.

एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने हुई यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब दिल्ली में हुए प्रदर्शनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कुछ ही घंटों बाद विशेष सुनवाई होनी है. तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद और वकील मेनका गुरुस्वामी ने विपक्षी नेताओं की हिरासत को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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