नई दिल्ली: मणिपुर में गैर-आदिवासी मैतेई और आदिवासी ईसाई कुकी समुदायों के बीच जातीय संघर्ष भड़कने के तीन साल से थोड़ा अधिक समय बाद, राज्य सरकार और सुरक्षा तंत्र हाल की उन घटनाओं को लेकर बढ़ती चिंता में हैं जिनमें नागा, जो एक और आदिवासी समुदाय है, कुकी समुदाय के साथ टकराव में आए हैं.
नागा, जो मणिपुर की लगभग 24 प्रतिशत आबादी हैं और मुख्य रूप से पहाड़ी जिलों उखरुल, सेनापति, चंदेल, तेंगनौपाल और तमेंगलोंग में बसे हैं, वे मई 2023 से शुरू हुए मैतेई-कुकी संघर्ष से ज्यादातर दूर रहे थे.
हालांकि, फरवरी से नागा और कुकी के बीच कम से कम 17 हिंसक घटनाएं हुई हैं, जिनमें दोनों तरफ लगभग एक दर्जन लोगों की मौत हुई है. दोनों समुदायों के घरों में तोड़फोड़ और आगजनी की गई है. पिछले हफ्ते तनाव फिर बढ़ गया जब दोनों तरफ से 44 नागा और कुकी नागरिकों को बंधक बनाया गया. हालांकि ज्यादातर अपहृत लोगों को छोड़ दिया गया है, लेकिन 14 कुकी अभी भी नागाओं के पास बंधक हैं, जबकि छह नागा पुरुष कथित तौर पर कुकी के पास बंधक हैं.
सुरक्षा तंत्र के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दिप्रिंट को बताया कि हाल की घटनाओं में बढ़ोतरी के साथ उनकी प्राथमिक चिंता अब “मैतेई-कुकी से हटकर नागा-कुकी” हो गई है.
“ध्यान इस पर है कि नागा और कुकी के बीच किसी भी ऐसी घटना को फैलने से रोका जाए. रैपिड एक्शन फोर्स की दो कंपनियां पहले ही घाटी से हटाकर कांगपोकपी और सेनापति भेजी जा चुकी हैं, जहां कुकी और नागा साथ रहते हैं,” उस अधिकारी ने कहा, जिन्होंने नाम नहीं छापने की शर्त रखी.
अधिकारी ने बताया कि शुरुआत में जब उखरुल के लितान गांव में पहली घटना हुई, तो टांगखुल नागा और कुकी के बीच टकराव हुआ था. धीरे-धीरे, लेकिन अन्य नागा जनजातियां जैसे रोंगमेई, लियांगमेई और ज़ेलियांग भी इसमें शामिल हो गईं.
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, दोनों समुदायों के बीच शुरुआती घटनाओं में से एक उखरुल में हुई थी, जब एक नागा शिक्षक ने इलाके से गुजरते हुए कुछ कुकी युवकों को बैठकर शराब पीते देखा. उन्होंने कथित तौर पर उन्हें रोकने को कहा, जिससे विवाद हो गया.
इसके बाद दोनों पक्षों ने आरोप और प्रत्यारोप लगाए. नागाओं ने कुकी पर वसूली के आरोप लगाए, आरोप लगाया कि उनमें से कुछ उग्रवादी संगठनों से जुड़े हैं, और कथित तौर पर उन्हें उखरुल छोड़ने को कहा. जवाब में कुकी ने भी नागाओं पर ऐसे ही आरोप लगाए, जिससे तनाव और बढ़ गया.
यह टकराव जल्द ही झगड़ों और फिर हिंसा में बदल गया, जिससे फरवरी से लगातार नागरिकों के अपहरण, बंधक संकट और गाँवों में आगजनी का सिलसिला शुरू हो गया.
अधिकारियों की चिंता बेवजह नहीं है. नागा और कुकी के बीच लंबे समय से संघर्ष का इतिहास रहा है. आखिरी बड़ा टकराव 1992 में हुआ था, जो पाँच साल से अधिक चला था. इसमें लगभग 1,000 लोग मारे गए थे और हजारों विस्थापित हुए थे.
2016 में यूनाइटेड नागा काउंसिल ने राष्ट्रीय राजमार्ग 2 और 37 को 136 दिनों तक बंद रखा था ताकि उस समय ओक्रम इबोबी सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार द्वारा मणिपुर में सात नए जिलों—जिरीबाम, कांगपोकपी, काकचिंग, तेंगनौपाल, नोनी, फेरज़ावल और कांगपोकपी—के गठन का विरोध किया जा सके.
नागाओं का कहना था कि ये जिले उनके पूर्वजों की जमीन पर अतिक्रमण करके बनाए गए हैं.
नागा की भागीदारी के पीछे क्या है
मणिपुर सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों ने दिप्रिंट को बताया कि नागाओं के कुकी संघर्ष में शामिल होने के पीछे कोई एक कारण नहीं है. उन्होंने कहा कि यह राजनीतिक आकांक्षाओं, जमीन और संसाधनों को लेकर असुरक्षा, और नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड (NSCN-IM) के इसाक-मुइवा गुट के भीतर विभाजन, और अलग हुए गुटों जैसे ईस्टर्न फ्लैंक द्वारा प्रभाव बढ़ाने की कोशिशों का मिश्रण है.
“यह बहुत जटिल है. नागाओं के इस संघर्ष में खिंचने के पीछे कई कारण हैं. राजनीतिक आकांक्षाओं के अलावा, एक कारण अपनी जमीन को लेकर असुरक्षा भी हो सकती है,” एक अधिकारी ने कहा.
अधिकारी ने कहा कि नागा अपनी जमीन को लेकर बहुत संवेदनशील हैं. “हालांकि दोनों समुदाय वर्षों से साथ रहते आए हैं, लेकिन कुकी द्वारा अलग प्रशासन की मांग के साथ नागा को यह डर हो सकता है कि इससे कुकी उनकी जमीन पर दावा कर सकते हैं,” एक अधिकारी ने कहा.
एक और मुद्दा दोनों समुदायों के बीच संसाधनों का बंटवारा है. घाटी क्षेत्रों से कुकी के विस्थापन के बाद कई लोग पहाड़ियों में चले गए, जिनमें नागा क्षेत्रों में बसे इलाके भी शामिल हैं, जिससे स्थानीय संसाधनों पर दबाव बढ़ गया. अब जब कुकी अधिक मुखर हो रहे हैं, तो नागाओं के साथ तनाव बढ़ गया है, जिससे छोटे विवाद भी अब टकराव का रूप लेने लगे हैं.
“पच्चीस साल पहले, कुकी नागाओं को टैक्स देते थे क्योंकि वे नागा गांवों में रहते थे. उन्होंने यह लिखित रूप में भी दिया था कि वे नागा क्षेत्रों में रह रहे हैं, इसके लिए आभारी हैं और संसाधनों के उपयोग के लिए अपना हिस्सा देंगे. अब वे ऐसा नहीं कर रहे हैं, जो एक विवाद का कारण बन गया है,” एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया.
अधिकारी ने कहा कि कुकी—जिनके पास उग्रवादी समूह और हथियार भी हैं—अब अपने प्रभाव को अधिक मजबूती से दिखा रहे हैं, और नागा जिन संसाधनों को अपना मानते हैं वहाँ उनकी मौजूदगी असंतोष का कारण बन गई है.
अधिकारी ने आगे बताया कि यह संघर्ष आर्थिक कारणों से भी जुड़ा है. वांगली–दीमापुर सड़क अब एक महत्वपूर्ण मार्ग बन गई है; पहले मोरेह का यही महत्व था. इस रास्ते से अधिकतर व्यापार और कुछ हद तक तस्करी भी होती है. इस मार्ग पर नियंत्रण भी दोनों समुदायों के बीच एक बड़ा विवाद बन बन गया है, एक खुफिया स्रोत ने बताया.
सरकार का एक हिस्सा यह भी मानता है कि कुकी-नागा झड़पें कुछ हितधारकों द्वारा युनाम खेमचंद सिंह की तीन महीने पुरानी सरकार को अस्थिर करने की कोशिश हो सकती हैं. “राष्ट्रपति शासन के दौरान हिंसा कम हो गई थी, लेकिन नई सरकार बनने के बाद अचानक फिर से हिंसा बढ़ गई है,” एक वरिष्ठ राज्य सरकार अधिकारी ने कहा.
सिंह को राज्य में एक साल की राजनीतिक अनिश्चितता के बाद मुख्यमंत्री बनाया गया था, जब पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने इस्तीफा दिया और राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया गया था.
सुरक्षा एजेंसियां NSCN-IM और ईस्टर्न फ्लैंक के बीच दरार को भी इस संघर्ष के लिए जिम्मेदार मानती हैं—जो अप्रैल 2024 में NSCN-IM से अलग हुआ था—और दोनों गुट कथित तौर पर नागा बहुल क्षेत्रों में अपना दबदबा बनाने की कोशिश कर रहे हैं.
“हमें हाल की झड़पों में अलग-अलग एनएससीएन गुटों के कैडरों की भागीदारी की जानकारी मिली है. 28 मार्च को कामजोंग जिले के होंगबेई गांव में NSCN-IM और ईस्टर्न फ्लैंक के बीच घात लगाकर हमला हुआ था, जिसमें बाद वाले के चार कैडर मारे गए,” पहले बताए गए सुरक्षा अधिकारी ने कहा.
अधिकारी ने आगे कहा कि तीन दिन बाद उखरुल में भीड़ ने NSCN-IM के शीर्ष नेताओं के घरों में तोड़फोड़ की, जिनमें वी. एस. अतेम भी शामिल हैं, जो NSCN-IM के महासचिव थुइंगालेंग मुइवा के उप हैं. “एनएससीएन के भीतर की दरार अब खुलकर सामने आ रही है, और अलग-अलग गुट अपने प्रभाव क्षेत्र स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं.”
NSCN-IM पिछले दो दशकों से भारत सरकार के साथ शांति वार्ता में शामिल है. 2015 में फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर होने के बावजूद वार्ता में बहुत प्रगति नहीं हुई है.
दिप्रिंट ने मणिपुर के मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह और उपमुख्यमंत्री लोसी दीखो, जो नागा समुदाय से हैं, से कई बार कॉल और व्हाट्सएप संदेश के जरिए प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिया. जवाब मिलने पर इस रिपोर्ट को अपडेट किया जाएगा.
आरोप और प्रत्यारोप
ईस्टर्न फ्लैंक, नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड और कुकी समुदायों से जुड़ी मौजूदा झड़पें अब तक दोनों समुदायों के बीच मौजूद रहे समीकरणों के टूटने का संकेत देती हैं.
1992 के संघर्ष के बाद, जो पांच साल तक चला था, दोनों समुदायों ने सुलह कर ली थी और पहाड़ी इलाकों में साथ रहने लगे थे. “सेनापति और उखरुल जैसे नागा बहुल जिलों में भी कुकी गांव हैं. कुकी बहुल जिलों में भी नागा, कुकी गांवों के पास रहते हैं. लेकिन अब परिस्थितियां कुछ हद तक बदल गई हैं, जहां ईस्टर्न फ्लैंक, NSCN और मैतेई उग्रवादी कमजोर कुकी समुदाय पर हमले कर रहे हैं और नागाओं को इसमें खींचने की कोशिश कर रहे हैं,” कुकी नेशनल ऑर्गनाइजेशन (KNO) के प्रवक्ता सेलियन हाओकिप ने दिप्रिंट को बताया.
केएनओ और यूनाइटेड पीपुल्स फ्रंट (UPF) ने केंद्र और मणिपुर सरकार के साथ एक त्रिपक्षीय समझौता किया है, जिसे सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस (SOO) कहा जाता है, जिसका उद्देश्य शत्रुता को समाप्त करना, राजनीतिक बातचीत करना और संवैधानिक ढांचे के भीतर स्वशासन की मांगों का समाधान करना है.
हाओकिप के अनुसार, कुछ नागाओं को मैतेई लोगों द्वारा भी भड़काया जा रहा है. “कुकी और नागा कई पीढ़ियों से साथ रहते आए हैं. उखरुल जिले के लितान गाँव में 7 फरवरी की घटना दो नशे में धुत लोगों—एक टांगखुल और एक कुकी—के बीच हुई एक अलग झड़प थी. दोनों समुदाय इस मुद्दे को सुलझाना चाहते थे, लेकिन अगले दिन हथियारबंद टांगखुल लोगों ने हमारे गांव को जला दिया. इसके बाद स्थिति बिगड़ती चली गई,” उन्होंने कहा और जोड़ा कि अधिकतर टांगखुल और NSCN-IM संघर्ष नहीं चाहते.
हाओकिप ने आगे कहा, “पूर्व-औपनिवेशिक समय में मैतेई और कुकी के बीच अच्छे संबंध थे. ब्रिटिशों ने प्रशासनिक सुविधा के लिए उन्हें एक साथ जोड़ दिया था. हाल के समय में कुकी समुदाय को बार-बार उकसावे का सामना करना पड़ा है. हम अपने पड़ोसियों के साथ शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व चाहते हैं. लेकिन हमें अपने लोगों की रक्षा करनी है और अपने गाँवों को जलने से बचाना है; हमें आत्मरक्षा करनी होगी.”
दूसरी ओर, नागा समुदाय कुकी पर यह आरोप लगाता है कि उन्होंने 13 मई को कांगपोकपी जिले के लेइलोन गाँव से अपहृत अपने छह लोगों को अभी तक नहीं छोड़ा है.
यूनाइटेड नागा काउंसिल (UNC) की वर्किंग कमेटी के सचिव ए.सी. थोत्सो ने दिप्रिंट को बताया कि कुकी समुदाय ने उस आतिथ्य को भूल दिया है जो नागाओं ने मैतेई-कुकी संघर्ष के चरम पर उन्हें दिया था. “उन्होंने हमारी मेहमाननवाजी का जवाब गोलियों से दिया—खुद को पीड़ित दिखाते हुए आक्रामक बनकर,” उन्होंने कहा.
थोत्सो ने आगे कहा कि कुकी अब नागाओं और उनके इतिहास पर हमला कर रहे हैं, क्योंकि वे नागा क्षेत्र में अलग प्रशासन की मांग कर रहे हैं. “उन्होंने हमारी उदारता को हल्के में लिया है. कुकी जो कर रहे हैं वह हमारे इलाके में संगठित और समन्वित बाहरी आक्रमण का गंभीर रूप है.”
थोत्सो ने आगे कहा कि उनके पास इस बात के सबूत हैं कि कुकी सशस्त्र समूह, जिन्होंने केंद्र और मणिपुर सरकार के साथ सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस (SOO) समझौता किया है, हाल की नागाओं पर हमलों में शामिल हैं.
“इससे गंभीर राजनीतिक सवाल उठे हैं, जो यह संकेत देते हैं कि एक प्रॉक्सी व्यवस्था उभर रही है जो हमारी जमीन, पहचान और नागा समुदाय के सामूहिक अधिकारों के लिए खतरा है. यह इंडो-नागा संघर्ष विराम शांति प्रक्रिया और एनएससीएन तथा भारत सरकार के बीच हुए फ्रेमवर्क समझौते को कमजोर करने की एक सुनियोजित नीति हो सकती है, और इसे गंभीर चिंता के साथ देखा जाना चाहिए,” उन्होंने कहा.