Saturday, 28 May, 2022
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‘मुगल डकैत थे’: मनोज मुंतशिर को इतिहास पता नहीं तो चुप रहें, वह कवि हैं कविता ही करें- इतिहासकार

दिप्रिंट से बात करते हुए इतिहासकार आदित्य मुखर्जी ने भी मनोज मुंतशिर के वायरल वीडियो को एक तरह का बकवास बताया.

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नई दिल्ली: हिंदी सिनेमा के गीतकार मनोज मुंतशिर उर्फ मनोज शुक्ला का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है, जिसमें वो मुगल शासक अकबर, हुमायूं, जहांगीर जैसे शासकों को ‘डकैत’ कह रहे हैं. इसके अलावा एक चैनल को दिए इंटरव्यू में वह भारत के मध्यकालीन इतिहास को कलर्ड यानि कि रंग देने वाला बता रहे हैं.

मुंतशिर कहते हैं कि इतिहास को 90% वामपंथी इतिहासकारों ने लिखा है, जिसमें राष्ट्र निर्माण नहीं, एक एजेंडा सेट करने की कोशिश की गई है.

मनोज मुंतशिर का फिल्म केसरी के लिए लिखा गाना तेरी मिट्टी में मिल जावां बेहद ही चर्चित हुआ. हाल ही में ओटीटी प्लेटफार्म डिज्नी+ हॉट स्टार पर अजय देवगन अभिनीत आने वाली फिल्म भुज:द प्राइड ऑफ इंडिया  में अरिजीत सिंह की आवाज में देशभक्ति गीत देश मेरे खूब सुना जा रहा है. इसके अलावा जुबिन नौटियाल की आवाज में गाया गया उनका लिखा गाना हम नवा मेरे काफी हिट हुआ है.

दिप्रिंट से बात करते हुए देश के जाने-माने इतिहासकार एस इरफान हबीब वायरल वीडियो जो कि मुंतशिर ने ट्विटर पर 24 अगस्त को अपलोड किया है को लेकर और चैनल के इंटरव्यू में मनोज मुंतशिर की कही बातों को बचकाना और इतिहास की समझ से परे बताते हैं.

एस इरफान हबीब दिल्ली में रहने वाले मॉडर्न इंडिया के इतिहासकार हैं और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ एजुकेशनल प्लानिंग एंड एडमिनिस्ट्रेशन (NUEPA) के मौलाना अबुल कलाम आजाद के प्राध्यापक (चेयर) पद से रिटायर्ड हैं.

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हबीब कहते हैं, ‘ये बातें इतनी बकवास हैं कि बात करने के भी लायक नहीं हैं. वह जो कह रहे हैं उसमें बड़ा जिंगोइज्म (अंध राष्ट्रभक्ति) है. मीडिया इनको बेवजह लेजिटिमेसी (वैधता) दे रहा है. उन्होंने कुछ पढ़ा-लिखा है नहीं.’

मुंतशिर के वायरल वीडियो में मुगल शासकों को डकैत बताने की बात पर इरफान कहते हैं, ‘जो लोग इतिहास से परिचित नहीं हैं, जिनका दिमाग कुंठित है, जो खुद प्रिज्यूडिस (पहले से मान बैठे) हैं तो उस आइने से देखेंगे तो पता नहीं कौन क्या दिखाई देगा.’

वह कहते हैं कि डाकू तो लूटकर ले जाते हैं, वे (मुगल) डाकू थे तो लूटकर कहां ले गए.

इसकी तुलना ब्रिटिशों से करते हुए हबीब कहते हैं, ‘विलियम डेलरिम्पल ने ईस्ट-इंडिया कंपनी पर किताब लिखी है, जिसमें उन्होंने ईस्ट-इंडिया कंपनी को लुटेरा बताया है, जो बहुत हद तक सही है. क्योंकि अंग्रेजों का हिंदुस्तान से कोई मतलब नहीं था. वे यहां से सारा माल लूटकर ले गए. उनको तो जरूर हम कह सकते हैं कि वे डाकू थे.’


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गौरतलब है कि वायरल वीडियो में मनोज मुंतशिर कहते हैं कि ‘हमारे घर तक आने वाली सड़कों के नाम तक अकबर, हुमायूं, जहांगीर जैसे ग्लोरिफाइड डकैत के नाम पर रख दिए गए हैं और हम रिबन काटते मौकापरस्त नेताओं को देखकर तालियां बजाते रहे.’

मुगलों की सत्ता में राजपूत भी शामिल थे

इतिहासकार एस इरफान हबीब कहते हैं, ‘उन तथाकथित डाकुओं के साथ कौन शामिल थे, पूरा राजपुताना शामिल था, अकबर के मनसबदार मानसिंह, जयसिंह शामिल थे. फिर तो सभी मिलकर लूट रहे थे.’ वह कहते हैं कि पूरा मुगल एम्पायर एक कोलाबरेटिव प्रोजेक्ट था जो कि इन्हें (मुंतशिर को) पता नहीं. बहुत सारे लोगों को जिनको मुगलों ने हटाया ही नहीं, उनसे सिर्फ टैक्स लेते थे और वे राजा बने रहे. वे (राजपूत) सभी मुगल एम्पायर के औपचारिक हिस्सा थे.

वह आगे कहते हैं कि ‘अकबर ने तो खुशी-खुशी राजपूतों के परिवारों में शादी की. राजपूत मानसिंह तो उनके मनसबदार थे. बीरबल, टोडरमल तो उनके 9 रत्नों में से थे. और ये लोग खुशी से रह रहे थे.’

वह कहते हैं, ‘महाराणा प्रताप का जनरल तो मुसलमान था. शिवाजी के तोपखाने का हेड मुसलमान था. उस समय मामला हिंदू-मुसलमान का था ही नहीं, वे शासक थे. आज हम इन्हें हिंदू-मुसलमान बना रहे हैं.’

चैनल के इंटरव्यू में मुंतशिर कहते हैं कि ‘फिल्मों में दिखाया जाता है कि जोधा-अकबर का प्यार कृष्ण और राधा की तरह था, जो कि शर्मनाक है. जोधा अकबर की तीसरी रानी थीं, इतिहास के तथ्य बताते हैं कि 40 और रानियां थीं. इसके अलावा उनके परी खाने में न जाने कितनी रानियां थीं.’

इतिहासकार हबीब इस पर कहते हैं कि वह इतिहास का एक कालखंड था. उस जमाने में हिंदू राजाओं की भी अनेक रानियां होती थीं. राजपूत राजा अनेक रानियां रखते थे.

’21वीं सदी में जो बुरा लगता है वह उस समय बुरा नहीं था’

इरफान हबीब कहते हैं, ’21वीं सदी में जो आपको बुरा लगता है वह उस समय बुरा नहीं था. उस समय मेडुअल (मध्यकालीन) मूल्य थे, एंशिएंट मूल्य थे और उस समय ऐसा पूरी दुनिया में होता था. जो चीजें उस समय सही लगती थीं आज बुरी लगती हैं.’

हबीब कहते हैं, ‘21वीं सदी के लिए मध्यकालीन भारत में आप हीरो नहीं ढूंढ़ सकते. वह हीरो अपनी कमियों के साथ आएगा. वे चीजें उस समय के लिए ही सही थीं और कांटेस्क्ट स्पेशिफिक (संदर्भ विशेष) में ही सही थीं. अगर आज उस संदर्भ से बाहर इतिहास को पढ़ेंगे तो आपको परेशानी होगी.’

मुंतशिर इंटरव्यू में कहते हैं कि ‘मुगल-ए-आज़म जैसी फिल्म में अकबर शानदार उर्दू में डायलाग बोलते हैं लेकिन अकबर के समय में उर्दू नहीं बोली जाती थी. और सब हमें सही लगता है.’

हबीब कहते हैं कि फिर तो रामायण, महाभारत के जो सीरियल हिंदी में बने हैं वह भी गलत हैं. उस समय तो हिंदी नहीं बोली जाती थी.


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‘दक्षिणपंथियों को इतिहास लिखने से किसने रोका’

मुंतशिर चैनल के इंटरव्यू में कहते हैं कि 90% इतिहासकार वामपंथी रहे हैं, जिन्होंने कलर्ड इतिहास यानि इतिहास को खास रंग दिया है. और दक्षिणपंथी इस मामले में आलसी रहे हैं.

इस पर इरफान कहते हैं कि फिर आप ही ठीक से क्यों नहीं लिख लेते. और आलसी होने की जिम्मेदारी दूसरों की कैसी है? वह कहते हैं कि पिछले सात साल से मोदी सरकार है, एक भी इतिहास की फैक्ट बेस्ड ढंग की किताब तो आई नहीं. आखिर दक्षिणपंथियों को इतिहास लिखने से किसने रोका था. सच यह है कि इन लोगों में वह क्षमता ही नहीं है, फैक्ट आप लेते नहीं, आर्काइव से आपका कोई लेना-देना नहीं है.

हबीब कहते हैं कि ये लोग इमैजिनरी फैक्ट बोलते हैं, जो कि वे खुद सोचते हैं, वही उनका फैक्ट बन जाता है.

‘लालकिले में आज भी मीना बाजार लगता है’

मुंतशिर वायरल वीडियो में कहते हैं, ‘आगरे के किला के सामने मीना बाजार लगवाने वाले को हम जिल्ले इलाही यानि खुदा की परछाई कहते हैं. आखिर यह कैसा खुदा है जिसकी परछाई इतनी काली है?’

इसके जवाब में इतिहासकार हबीब कहते हैं, ‘लालकिले में आज भी मीना बाजार लगता है. यह एक मार्केट होता था. इसमें कौन सी बुराई है?’


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‘प्राइमरी की किताबों में ग से गणेश कभी नहीं था’

वायरल वीडियो में मुंतशिर की इस बात पर कि पहले ग से गणेश पढ़ाया जाता था लेकिन 70 के दशक में इसे ग से गधा कर दिया गया. इस पर इरफान हंसते हुए कहते हैं, ‘ग से गणेश तो कभी था ही नहीं, ग से गमला ही था. ये सब केवल जज्बात से खेलने की बातें हैं.’

इरफान कहते हैं कि आदमी जो काम अच्छी तरह कर सकता है उसे वही करना चाहिए. अगर आपको इतिहास की जानकारी नहीं है तो आप उस पर न बोलें. आप कविता कर सकते हैं वहीं करो. वरना ऐसी बातें लूज टॉक (हल्की बात) होकर रह जाती हैं.’

मुंतशिर की इस बात पर कि मैं ब्राह्मण हूं लेकिन रावण की पूजा नहीं करता जो कि ब्राह्मण था, इसी तरह मुसलमानों को भी गलत लोगों की पूजा नहीं करनी चाहिए.

इस पर हबीब कहते हैं, ‘मुसलमान भला कहां अकबर, बाबर की पूजा करता है. अकबर, बाबर पर टिप्पणी से किसी मुसलमान को बुरा नहीं लगता. बुरा तब लगता है जब इतिहास को गलत तरीके से पेश किया जाता है. आज अलग जमाना है. वह एक अलग समय था.’

मनोज मुंतशिर को इतिहासकार ने बताया ‘जोकर’

दिप्रिंट से बात करते हुए इतिहासकार आदित्य मुखर्जी ने मुंतशिर के वायरल वीडियो को एक तरह का बकवास बताया.

उन्होंने कहा, ‘आपको नाली में ही कुछ ढूंढ़ना है तो आपको गंध मिलेगी ही. अब आपको यही खोजना है कि कहां कब किसने किसको मारा, तो आपको इतिहास में वही मिलेगा.’

मनोज मुंतशिर के मुगलों के राष्ट्र निर्माता नहीं कहने के सवाल पर मुखर्जी कहते हैं, ‘जो चीज आपको पसंद नहीं उसे खारिज कर देना चाहते हैं. इतिहास को एक डिसिप्लीन (अनुशासन) में पढ़ना और समझना होता है. दुनिया के स्कॉलर ने इसे लिखा है, आप इसे कैसे खारिज कर सकते हैं. झूठ फैलाने से अच्छा है कि आप इसे खुद लिखिए. सच क्या है वह इतिहासकार ही बताएगा.’

मुखर्जी वामपंथी इतिहासकारों द्वारा इतिहास को विकृत करने के आरोप पर कहते हैं, ‘आईसीएचआर (भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद) ने आजादी का अमृत महोत्सव का एक पोस्टर लगाया है जिसमें जवाहरलाल नेहरू को साफ तौर से हटा दिया गया है. ब्रिटिश जेलों में उनके बिताए 9 साल बेकार हो गए. इसके बजाय उन्होंने वीडी सावरकर की तस्वीर लगाई है, जिन्होंने अंग्रेजों से बेहद शर्मनाक और अपमानजनक तौर से माफी मांगी. क्या यह इतिहास की विकृति नहीं है?’

फिल्म बिरादरी के अभिनेता ऋचा चड्ढा, गीतकार और निर्देशक नीरज घायवान ने भी गीतकार मुतंशिर की टिप्पणी को ‘प्रॉब्लमैटिक (समस्यात्मक)’ कहा है.

दिप्रिंट ने इस विवाद को लेकर मनोज मुंतशिर से ई-मेल पर संपर्क करने की कोशिश की है और ट्विटर पर डायरेक्ट मैसेज किया है लेकिन अभी तक उनका कोई जवाब नहीं आया है. अगर उनका जवाब आता है तो स्टोरी को अपडेट किया जाएगा.


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