scorecardresearch
Thursday, 22 October, 2026
होमदेशमोदी ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान पोलिश बच्चों को आश्रय देने वाले ‘नेक महाराजा’ को याद किया

मोदी ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान पोलिश बच्चों को आश्रय देने वाले ‘नेक महाराजा’ को याद किया

Text Size:

नयी दिल्ली, 22 अक्टूबर (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को नवानगर के महाराजा जाम साहब की मानवीय विरासत को याद किया, जिन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान विस्थापित हुए पोलिश बच्चों को आश्रय दिया था।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और पोलैंड के बीच दोस्ती की जड़ें मानवता और करुणा की एक साझा विरासत में निहित हैं।

यहां ‘हैदराबाद हाउस’ में अपने पोलिश समकक्ष डोनाल्ड टस्क के साथ बातचीत के बाद मोदी ने मीडिया के लिए जारी बयान में कहा कि पोलैंड के लोग जाम साहब को बहुत सम्मान के साथ याद करते हैं और वहां उन्हें ‘गुड महाराजा’ (नेक महाराजा) के रूप में जाना जाता है।

नवानगर के महाराजा जाम साहब, सर दिग्विजयसिंहजी रणजीतसिंहजी जडेजा की कहानी—जिन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध की त्रासदी के कारण विस्थापित हुए पोलिश बच्चों को आश्रय दिया था—दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों के महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक है।

पोलैंड में उन्हें ‘गुड महाराजा’ के रूप में जाना जाता है और वारसॉ में एक चौराहे का नाम ‘गुड महाराजा स्क्वायर’ है।

गुजरात के जामनगर में स्थित नवानगर के राजपरिवार के अलावा, महाराष्ट्र के कोल्हापुर के पूर्व राजपरिवार ने भी युद्ध के कारण विस्थापित हुई पोलिश महिलाओं और बच्चों को आश्रय दिया था।

टस्क की मौजूदगी में अपनी बात रखते हुए मोदी ने कहा, “भारत और पोलैंड के बीच दोस्ती केवल राजनयिक संबंधों पर नहीं, बल्कि मानवता और करुणा की साझा विरासत पर टिकी है।”

उन्होंने कहा कि दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जामनगर और कोल्हापुर के राजघरानों ने भारत में पोलैंड के हजारों बच्चों और परिवारों को आश्रय दिया था।

मोदी ने कहा, “आज भी पोलैंड के लोग जाम साहब को बहुत सम्मान के साथ ‘दोबरी महाराजा’ यानी ‘नेक महाराजा’ के रूप में याद करते हैं।”

प्रधानमंत्री ने 2022 में संघर्ष-ग्रस्त यूक्रेन से भारतीय छात्रों की सुरक्षित वापसी में पोलैंड की ओर से दी गई मदद को भी याद किया और कहा, “पोलैंड ने मानवता की इसी भावना को आगे भी कायम रखा।”

मोदी ने कहा कि उन्हें इस बात की खुशी है कि ‘जामसाहब मेमोरियल यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम’ के जरिये पोलैंड के युवा भारत आ रहे हैं और “हमारी ऐतिहासिक दोस्ती को एक नयी पीढ़ी तक पहुंचा रहे हैं।”

इस कार्यक्रम की घोषणा मोदी ने अगस्त 2024 में पोलैंड की अपनी राजकीय यात्रा के दौरान की थी और यह भारत-पोलैंड रणनीतिक साझेदारी के लिए पांच-वर्षीय कार्य योजना (2024–2028) का हिस्सा है।

मोदी ने कहा कि आज की दुनिया “अनिश्चितता और बदलाव के दौर” से गुजर रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में भी भारत और पोलैंड विकास, प्रौद्योगिकी और नवाचार के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहे हैं।

पोलिश भाषा में अपनी टिप्पणी में टस्क ने कहा कि मोदी ने एक ऐसी बात का जिक्र किया है, जो “हमारी यादों में अभी भी बहुत ताजा है – जी हां, ‘गुड महाराजा’ के बारे में।”

उन्होंने कहा, “वह हमारे दिलों में, हमारी यादों में और राष्ट्रीय स्मृति में बने रहे—सिर्फ एक प्रतीक के रूप में नहीं, क्योंकि बात सिर्फ प्रतीकों की नहीं है। हम एक ऐसी व्यावहारिक मदद की बात कर रहे हैं, जिसके लिए बहुत अधिक समर्पण की जरूरत थी।”

भाषा प्रशांत पारुल

पारुल

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

share & View comments