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Sunday, 26 April, 2026
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मंत्रियों को अधिकारियों की एसीआर पर राय देने का अधिकार होना चाहिए: महाराज

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देहरादून, 25 अप्रैल (भाषा) उत्तराखंड के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महराज ने मंगलवार को कहा कि अन्य प्रदेशों की भांति उत्तराखंड के मंत्रियों को भी अपने विभाग के अधिकारियों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) पर अपने विचार रखने का अधिकार होना चाहिए।

मंत्री ने यहां जारी एक बयान में अपनी मांग के समर्थन में कई तर्क पेश करते हुए कहा कि प्रदेश की ज्यादातर जनता चाहती है कि उनके मंत्रियों को भी अन्य राज्यों के उनके समकक्षों की तरह यह अधिकार मिले। उन्होंने कहा कि इससे विकास कार्यों में न केवल अधिक पारदर्शिता आएगी बल्कि विभागों की उचित समीक्षा भी हो सकेगी।

महाराज ने दावा किया कि हाल में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में सभी मंत्रियों ने इस मामले में अपनी सहमति दे दी है और एसीआर एक अधिकारी के चरित्र, आचरण, क्षमताओं और पूरे वर्ष के प्रदर्शन का आकलन है ।

उन्होंने सवाल उठाया, ‘जब अन्य राज्यों के मंत्रियों को यह अधिकार है और उत्तराखंड में नारायणदत्त तिवारी की सरकार के दौरान भी मंत्रियों को यह अधिकार था तो इस परंपरा को फिर से लागू क्यों नहीं किया जा सकता?’

मंत्री ने कहा, ‘हमने पंचायती राज विभाग में एक पुराने आदेश को बहाल किया था जिसमें पंचायत स्तर पर किए गए विकास कार्यों में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए ब्लॉक प्रमुखों को ब्लॉक विकास अधिकारियों (बीडीओ) और जिला पंचायत प्रमुखों को मुख्य विकास अधिकारियों (सीडीओ) की एसीआर लिखने की अनुमति दी गई थी। ‘

उन्होंने कहा ​कि अब मंत्रियों को भी विभागीय अधिकारियों की एसीआर लिखने की पुरानी प्रथा को फिर लागू करने में संकोच नहीं करना चाहिए।

महाराज ने सवाल किया, ‘यह बात संदेह से परे है कि मंत्री विभाग का मुखिया होता है। यदि मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव एसीआर पर अपनी राय लिख सकते हैं तो मंत्री क्यों नहीं?’

महाराज ने कहा कि यह सही है कि मुख्यमंत्री व्यवस्था में एक स्वीकार्य प्राधिकारी हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मंत्री अपनी राय नहीं दे सकते ।

इस संबंध में उदाहरण देते हुए महाराज ने कहा कि किसी मामले की सुनवाई के दौरान निचली अदालत, सत्र अदालत और उच्च न्यायालय सभी अपनी राय देते हैं लेकिन अंतिम फैसला उच्चतम न्यायालय के पास होता है ।

मंत्री ने कहा कि यह नहीं माना जाना चाहिए कि मंत्री अपने अधीन काम करने वाले अधिकारियों के खिलाफ ही लिखेंगे।

भाषा दीप्ति दीप्ति अमित

अमित

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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