नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी के दक्षिणी दिल्ली क्षेत्र में हुए आग हादसे में जान गंवाने वाले ज्यादातर लोगों की मौत जलने से नहीं, बल्कि घने धुएं के कारण दम घुटने से हुई. यह धुआं मालवीय नगर के हौज रानी स्थित गेस्ट हाउस फ्लोरिश स्टेज़ की ग्राउंड फ्लोर पर लगी आग से फैला था.
यह गेस्ट हाउस मुख्य रूप से पास के मैक्स अस्पताल में इलाज करा रहे विदेशी मरीजों और उनके साथ आए लोगों के ठहरने के लिए इस्तेमाल होता था.
मैक्स अस्पताल के एक डॉक्टर के अनुसार, इस समय वेंटिलेटर पर मौजूद सबसे गंभीर मरीज वे हैं जिन्होंने आग से बचने के लिए तीसरी मंजिल से छलांग लगाई थी. मैक्स अस्पताल के ग्रुप मेडिकल डायरेक्टर डॉ. संदीप बुधिराजा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि धुएं से फेफड़ों को नुकसान पहुंचने के अलावा, गिरने से उनके हाथ-पैरों की लंबी हड्डियों, पेल्विस और रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोटें आई हैं.
उन्होंने कहा, “जलने के बहुत कम मामले हमारे पास आए. सिर्फ एक मरीज 25 प्रतिशत तक जला हुआ था और वह वेंटिलेटर पर था. हालत स्थिर होने के बाद उसे सफदरजंग अस्पताल रेफर कर दिया गया. बाकी मामलों में केवल मामूली जलने की चोटें थीं.”
बुधिराजा ने बताया कि ज्यादातर मामलों में धुआं और जहरीली गैसों के कारण दम घुटने से फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचा, जिससे लोगों की मौत हुई.
उन्होंने कहा, “कुल 39 मरीज हमारे पास लाए गए थे, जिनमें से 18 को मृत घोषित किया गया. मौत का मुख्य कारण धुआं अंदर जाने से दम घुटना था. 15 मरीज आईसीयू में भर्ती हैं, जिनमें से 8 वेंटिलेटर पर हैं और उनका इलाज चल रहा है.”
उन्होंने बताया कि मरीज तीन तरह की चोटों के साथ अस्पताल पहुंचे—कुछ मामलों में जलने की चोटें, धुआं अंदर जाने से फेफड़ों को नुकसान, और दूसरी-तीसरी मंजिल से कूदने के कारण हड्डियां टूटने के साथ फेफड़ों की चोटें.
उन्होंने कहा, “फेफड़ों की चोटों के अलावा कई गंभीर मरीजों की हड्डियां भी टूट गई हैं क्योंकि उनमें से कई लोग ऊपरी मंजिलों से कूदे थे. उन्हें हाथ-पैरों की लंबी हड्डियों और पेल्विस में फ्रैक्चर हुआ है, जबकि एक मरीज की रीढ़ की हड्डी में चोट आई है. इनमें से कुछ मरीज अभी भी गंभीर हालत में हैं.”
उन्होंने बताया कि तीसरी और चौथी मंजिल से कूदने वाले मरीजों के हाथ और पैर टूट गए हैं.
डॉक्टर ने कहा कि आग की घटनाओं में ज्यादातर लोगों की मौत दम घुटने से होती है, क्योंकि आग की लपटों से पहले धुआं लोगों तक पहुंच जाता है और उसे सांस के जरिए अंदर लेने पर फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचता है.
उन्होंने कहा, “जब कोई व्यक्ति धुआं अंदर लेता है तो शरीर को ऑक्सीजन मिलना कम हो जाता है और वह बेहोश हो सकता है. धुएं में कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली गैसें भी होती हैं, जो फेफड़ों को और नुकसान पहुंचाती हैं. इसके अलावा गर्म धुआं फेफड़ों को अंदर से जला भी सकता है. ऑक्सीजन की कमी, जहरीली गैसों का असर और गर्म धुएं से हुई चोट—इन तीनों के कारण मौत हो जाती है, और इस मामले में भी यही हुआ.”
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