नयी दिल्ली, 11 मार्च (भाषा) मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त हमलों से पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के बीच बुधवार को कहा कि लोकतांत्रिक ढांचे व संस्थाओं के निर्माण से ही किसी देश में ‘परिवर्तन’ आ सकता है, न कि ‘बमबारी’ से।
नशीद ने यहां एक सम्मेलन से इतर ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा कि भले ही पुरानी विश्व व्यवस्था बदल रही है और एक नई व्यवस्था उभर रही है लेकिन ऐसा नहीं लगता कि अमेरिका स्वतंत्र विश्व का नेता है।
पश्चिम एशिया में संघर्ष 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमले के बाद शुरू हुआ, जिसके जवाब में ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों वाले कई खाड़ी देशों पर हमला किया, जिससे वैश्विक विमानन परिचालन, तेल की कीमतों पर असर पड़ा तथा एक गंभीर ऊर्जा संकट उत्पन्न हो गया।
नशीद ने बातचीत के दौरान बताया कि इस संघर्ष ने मालदीव को किस तरह प्रभावित किया है।
मालदीव की अर्थव्यवस्था विदेशी पर्यटन पर बहुत अधिक निर्भर है।
नशीद ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, “हम पर्यटन पर निर्भर हैं, यही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। और जब दुबई और दोहा जैसे पश्चिम एशिया के प्रमुख पर्यटन केंद्र प्रभावित होते हैं, तो इसका पर्यटकों के आगमन पर बड़ा असर पड़ता है। मालदीव में पर्यटन अब लगभग 30 प्रतिशत कम हो गया है।”
नशीद ने पर्यटकों के आगमन में कमी से आय में होने वाली कमी को अपने देश के लिए बुरा संकेत बताते हुए कहा, “देखिए, हमें बहुत सारा कर्ज चुकाना है। जब पर्यटन प्रभावित होता है, तो सरकारी राजस्व गिर जाता है और जब सरकारी राजस्व गिरता है, तो यह एक चुनौती बन जाती है…। हम दिवालिया होने के कगार पर आ सकते हैं।”
उन्होंने कहा, “ईंधन और बाकी सभी चीजों की कीमतें भी बढ़ रही हैं इसलिए हमारे लोगों के लिए यह आसान नहीं होने वाला है।”
नशीद, मालदीव के पहले लोकतांत्रिक रूप से चुने गए राष्ट्रपति थे, जिन्होंने नवंबर 2008 से फरवरी 2012 तक द्वीप राष्ट्र की सेवा की।
नशीद और भारत के पड़ोसी देशों के कई अन्य नेता 11 से 13 मार्च तक बेंगलुरु स्थित थिंक-टैंक सिनर्जिया द्वारा आयोजित तीन दिवसीय सम्मेलन में भाग ले रहे हैं।
भाषा जितेंद्र नरेश
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