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Wednesday, 28 October, 2026
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थेनी जेल से 17 कैदियों के फरार होने के बाद तमिलनाडु का बड़ा फैसला, हथियारों से लैस होंगे जेल गार्ड

भागने वालों में से 17 में से 13 को अब तक पकड़ा जा चुका है. राज्य की जेलों में व्यापक सुधार की प्रक्रिया शुरू हो गई है, जिसमें अलार्म सिस्टम लगाना और मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOP) की समीक्षा करना शामिल है.

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चेन्नई: थेनी जिले की थेक्कमपट्टी जेल से 17 विचाराधीन कैदियों के फरार होने की घटना के बाद, तमिलनाडु के जेल और सुधार सेवा विभाग ने बुधवार से सभी सेंट्रल और जिला जेलों में हथियारों से लैस सुरक्षाकर्मियों को तैनात करने का आदेश दिया है.

थेनी जेल से कैदियों के फरार होने की घटना ने थेक्कमपट्टी सब-जेल की सुरक्षा में कई खामियों को उजागर किया है. सोमवार रात जेल में ड्यूटी पर सिर्फ चार कर्मचारी थे, जबकि नौ कर्मचारियों की जरूरत थी. घटना के समय जेल अधीक्षक परिसर से बाहर गए हुए थे. एक अन्य सुरक्षाकर्मी खाना खरीदने बाहर गया था. जेल के सभी नौ वॉचटावरों पर कोई सुरक्षाकर्मी तैनात नहीं था और मुख्य गेट भी खुला छोड़ दिया गया था.

सोमवार को कैदियों ने झूठा अलार्म बजाया कि एक कैदी को मिर्गी का दौरा पड़ा है. इसके बाद जेल कर्मचारियों ने तीन गेट खोल दिए और उन्हें अंदर से बंद किए बिना ही वहां पहुंच गए. यह सुरक्षा नियमों का उल्लंघन था. इसके बाद कैदियों ने सुरक्षाकर्मियों पर हमला किया, उनसे चाबियां छीन लीं और उनकी पिटाई की. फिर वे तीन स्तरों वाली सुरक्षा व्यवस्था को चकमा देते हुए मुख्य गेट से आसानी से बाहर निकल गए.

जेल में कैदियों की संख्या तय क्षमता से काफी ज्यादा थी. यहां 200 कैदियों को रखने की अनुमति थी, लेकिन 334 कैदी रखे गए थे. एक ही सेल में 17 कैदियों को रखने की बात को लेकर भी सरकारी अधिकारियों की आलोचना हो रही है.

सभी जेलों में सुरक्षा जांच का काम पहले से चल रहा था. इसकी योजना पिछले हफ्ते चेन्नई की पुजल सेंट्रल जेल से दो कैदियों के फरार होने की घटना के बाद बनाई गई थी. 24 घंटे के भीतर दोनों कैदी अलग-अलग घटनाओं में फरार हुए थे. इनमें एक 21 वर्षीय नेपाली विचाराधीन कैदी था और दूसरा 42 वर्षीय व्यक्ति था, जिसे बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण देने वाले कानून (पॉक्सो एक्ट) के तहत दोषी ठहराया गया था. हालांकि, दोनों को दो दिनों के भीतर फिर से पकड़ लिया गया था. सुरक्षा में चूक के कारण सात सहायक जेलरों को निलंबित कर दिया गया था.

सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव के तहत अब वॉचटावर पर तैनात सुरक्षाकर्मियों को फरार होने की किसी भी कोशिश को रोकने के लिए गोली चलाने की अनुमति होगी. जेल विभाग के पुलिस महानिदेशक संदीप राय राठौर ने यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद राज्य की सभी जेलों में सुरक्षा के और उपाय लागू किए जाएंगे और मानक संचालन प्रक्रिया में भी बदलाव किया जाएगा.

राठौर ने पुष्टि की कि वॉचटावरों पर हथियारों से लैस सुरक्षाकर्मी तैनात होंगे. उन्हें निर्देश दिया जाएगा कि फरार होने की किसी भी कोशिश पर तुरंत गोली चलाएं. यह एक बड़ा बदलाव है, क्योंकि तमिलनाडु की ज्यादातर जेलों में वॉचटावर पर तैनात सुरक्षाकर्मियों के पास अभी हथियार नहीं होते हैं. सभी जेलों में काम करने वाले अलार्म सिस्टम रखना भी जरूरी होगा.

यह घटना पिछले तीन दशकों में राज्य की सबसे बड़ी जेल से फरारी की घटनाओं में से एक है. जेल अधिकारियों ने माना है कि कैदियों के फरार होने की वजह इंसानी गलती और सुरक्षा में चूक थी. मंगलवार को अलग-अलग पदों पर तैनात जेल के नौ कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया. मामले की विस्तृत जांच की जा रही है. मंगलवार शाम तक पुलिस ने बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाकर फरार हुए 17 कैदियों में से 13 को फिर से पकड़ लिया था. इस अभियान में विशेष टीमें, ड्रोन और स्थानीय लोगों से मिली जानकारी का इस्तेमाल किया गया.

बाकी चार कैदियों की तलाश अभी जारी है. पुलिस और विशेष टीमों के जवान उन्हें पकड़ने के लिए लगातार अभियान चला रहे हैं. तमिलनाडु-केरल सीमा और आसपास के जिलों में भी कड़ी जांच की जा रही है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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