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Thursday, 9 July, 2026
होमदेशओमान में पकड़े गए महादेव ऐप के प्रमोटर को भारत लाने में देरी क्यों हो सकती है

ओमान में पकड़े गए महादेव ऐप के प्रमोटर को भारत लाने में देरी क्यों हो सकती है

ED ने सौरव चंद्राकर के प्रत्यर्पण की औपचारिक मांग के लिए केस की फाइलें गृह मंत्रालय को भेजी हैं. चंद्राकर 2019 से भारत से बाहर हैं और 2023 से अवैध सट्टेबाजी के मामले में वांछित हैं.

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नई दिल्ली: भारत की ओर से महादेव ऑनलाइन बुक के फरार प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को ओमान से वापस लाने की कोशिशों में देरी हो सकती है. चंद्राकर पर इस बेटिंग ऐप के जरिए 6,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के कथित जुआ सिंडिकेट चलाने का आरोप है. दिप्रिंट को जानकारी मिली है कि फर्जी पासपोर्ट मामले की वजह से प्रत्यर्पण प्रक्रिया में रुकावट आ सकती है.

सूत्रों ने बताया कि पिछले महीने की शुरुआत में रॉयल ओमान पुलिस ने चंद्राकर को फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट हासिल करने और रखने के मामले में हिरासत में लिया था.

प्रवर्तन निदेशालय ने मामला औपचारिक रूप से प्रत्यर्पण की मांग के लिए गृह मंत्रालय को भेज दिया है, लेकिन यह प्रक्रिया पासपोर्ट मामले के नतीजे पर निर्भर करेगी. चंद्राकर 2019 से भारत से बाहर है और 2023 से अवैध सट्टेबाजी मामले में वांछित है.

मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने दिप्रिंट को बताया कि अपडेट किए गए केस दस्तावेज आगे की प्रक्रिया और औपचारिक प्रत्यर्पण अनुरोध भेजने के लिए गृह मंत्रालय को भेज दिए गए हैं.

अधिकारी ने आगे कहा, “हालांकि, ओमान में उसके खिलाफ फर्जी पासपोर्ट का मामला चलने की खबरें इस प्रक्रिया को मुश्किल बना सकती हैं और इसमें देरी हो सकती है. हमें अभी तक अधिकारियों से इस मामले की खास जानकारी आधिकारिक रूप से नहीं मिली है.”

अधिकारी मानते हैं कि फर्जी पासपोर्ट से जुड़े मामले की सुनवाई प्रक्रिया को जटिल बना सकती है.

ओमान के कानून के तहत, किसी व्यक्ति के खिलाफ अगर देश में कोई मामला चल रहा है तो उसे बिना मुकदमे और जरूरत पड़ने पर सजा पूरी किए बिना प्रत्यर्पित नहीं किया जा सकता. भारत और ओमान ने दिसंबर 2004 में प्रत्यर्पण संधि पर हस्ताक्षर किए थे, जो सितंबर 2005 में लागू हुई.

2017 तक चंद्राकर छत्तीसगढ़ के भिलाई जिले में सिर्फ जूस की दुकान चलाने वाला व्यक्ति था. 2023 में वह उस समय चर्चा में आया जब ED ने दुबई में उसकी शादी के दौरान हुए वित्तीय लेन-देन और महंगे खर्चों का खुलासा किया.

अपनी अभियोजन शिकायत में दिए गए अनुमान के अनुसार, चंद्राकर ने संयुक्त अरब अमीरात के रास अल खैमाह में अपनी शादी में 200 करोड़ रुपये नकद खर्च किए थे.

करीब 37 करोड़ रुपये सिर्फ टिकट बुक करने और भारत समेत अन्य जगहों से बुलाए गए मशहूर लोगों को लाने-ले जाने पर खर्च किए गए थे. इन लोगों को शादी में मेहमान के रूप में या कार्यक्रम में प्रदर्शन करने के लिए बुलाया गया था.

केंद्रीय जांच एजेंसी ने छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और अन्य राज्यों में अवैध जुए को लेकर दर्ज दर्जनों FIR के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था.

ED की जांच में पता चला कि चंद्राकर ने भिलाई के ही रहने वाले रवि उप्पल के साथ मिलकर कोरोना महामारी के दौरान महादेव ऑनलाइन बुक शुरू किया था. इसके जरिए ऑनलाइन जुए और पिरामिड स्कीम का जाल बनाया गया, ताकि पैसे निकाले जा सकें.

गेम के नाम पर प्लेटफॉर्म से जुड़े लोगों से ठगे गए पैसे हवाला चैनलों के जरिए उप्पल और चंद्राकर तक पहुंचाए गए.

सूत्रों ने पहले दिप्रिंट को बताया था कि महादेव ऑनलाइन बुक एक मोबाइल ऐप है, जो कथित तौर पर लाइव गेम जैसे पोकर, दूसरे कार्ड गेम और किस्मत वाले खेलों के अलावा वर्चुअल क्रिकेट, बैडमिंटन, टेनिस और फुटबॉल जैसे खेलों पर अवैध सट्टेबाजी के लिए प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराता है.

यह लोगों को तीन पत्ती, पोकर और ‘ड्रैगन टाइगर’ जैसे कार्ड गेम खेलने की सुविधा भी देता है.

जब इस प्लेटफॉर्म के तेजी से फैलने में वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और नेताओं की कथित भूमिका की बातें सामने आईं, तो छत्तीसगढ़ आर्थिक अपराध शाखा ने मामला दर्ज किया. बाद में इसे केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दिया गया.

ED के पास उसके खिलाफ इंटरपोल की ओर से नवंबर 2023 में जारी किया गया रेड कॉर्नर नोटिस (RCN) है. करीब एक साल बाद उसे UAE अधिकारियों ने हिरासत में लिया था और भारत ने प्रत्यर्पण अनुरोध भेजा था, लेकिन अभी तक उस पर कार्रवाई नहीं हुई है.

इस साल की शुरुआत में इंटरपोल की फाइलों के नियंत्रण आयोग (CCF) ने चंद्राकर की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने अपने खिलाफ जारी रेड नोटिस हटाने की मांग की थी. उसने आरोप लगाया है कि एजेंसियों की कार्रवाई उसके खिलाफ राजनीतिक कारणों से की जा रही है.

इस बीच, चंद्राकर ओमान चला गया, जहां जून की शुरुआत में ओमानी अधिकारियों ने उसे हिरासत में ले लिया. इसके बाद भारतीय एजेंसियों ने उसके प्रत्यर्पण की मांग की.

चंद्राकर ने वानुआतु का पासपोर्ट भी हासिल किया था और वह ऑस्ट्रेलिया गया था, जहां 2023 में उसे इमिग्रेशन अधिकारियों ने हिरासत में लिया था.

ED को यह भी पता चला है कि उसने वानुआतु के पासपोर्ट के आधार पर ऑस्ट्रेलिया की नागरिकता हासिल करने की कोशिश की थी, लेकिन यह सफल नहीं हो सकी. अब यह जानकारी भी ED की अभियोजन शिकायत का हिस्सा है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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