कोलकाता, 26 मई (भाषा) भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (जेडएसआई) के एक अध्ययन में अंडमान सागर के तटीय क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर प्रवाल विरंजन का पता चला है। संस्थान की निदेशक धृति बनर्जी ने यह बात कही।
विरंजन 83.6 प्रतिशत तक है और यह अल नीनो घटना के प्रभाव तथा 2016 में समुद्र की सतह के तापमान में वृद्धि के कारण हुआ है।
उन्होंने बुधवार को कहा कि जेडएसआई के वैज्ञानिकों द्वारा विरंजन से पहले और बाद में किए गए सर्वेक्षणों के दौरान विस्तृत अध्ययन में पता चला कि 2016 में अंडमान में बड़े पैमाने पर विरंजन के कारण जीवित प्रवाल आवरण में 23.58 प्रतिशत का क्षय हुआ।
बनर्जी ने कहा कि इसके अलावा, वैश्विक प्रवाल चट्टान निगरानी नेटवर्क ‘स्टेटस ऑफ कोरल रीफ्स ऑफ द वर्ल्ड: 2020’ के हालिया प्रकाशन में कठोर प्रवाल भित्तियों में 1978 में 32.3 प्रतिशत से 2019 में 29.5 प्रतिशत तक की क्रमिक कमी की सूचना दी गई।
उन्होंने कहा, ‘हमारे लिए इस नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र को बड़े पैमाने पर विलुप्त होने से पहले संरक्षित करने के लिए खुद को पर्याप्त रूप से जागरूक करने का समय आ गया है।’
भाषा नेत्रपाल उमा
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