Saturday, 2 July, 2022
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सबूतों का अभाव, केरल HC ने सिस्टर अभया मर्डर केस में मुख्य आरोपियों को दी जमानत

न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति सी जयचंद्रन की खंडपीठ ने अदालत में दायर याचिका को देखते हुए उन्हें शर्तों के साथ जमानत पर रिहा कर दिया.

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तिरुअनंतपुरम (केरल): केरल हाईकोर्ट ने बृहस्पतिवार को सिस्टर अभया मर्डर केस में सिस्टर सेफी और फादर थॉमस कोट्टूर के आजीवन कारावास की सजा पर रोक लगा दी.

कोट्टूर, सिस्टर सेफी, एक नन के साथ, 23 दिसंबर, 2020 को सीबीआई कोर्ट, तिरुवनंतपुरम द्वारा 19 वर्षीय नन सिस्टर अभया की हत्या के लिए दोषी ठहराया गया था. इसके बाद उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई. 19 वर्षीय कैथोलिक नन का शव केरल के कोट्टायम जिले के सेंट पायस कॉन्वेंट के अंदर एक कुएं में 27 मार्च 1992 को मिला था और जिस मामले की स्थानीय पुलिस ने सबसे पहले जांच की थी, उसे अपराध शाखा में स्थानांतरित कर दिया गया था.

दोनों जांचों ने इसे आत्महत्या साबित किया. एक्टिविस्ट जोमोन पुथेनपुरक्कल समेत एक एक्शन काउंसिल का गठन किया गया, जिन्होंने निष्कर्षों को चुनौती दी और मामला 1993 में सीबीआई को स्थानांतरित कर दिया गया था.

न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति सी जयचंद्रन की खंडपीठ ने अदालत में दायर याचिका को देखते हुए उन्हें शर्तों के साथ जमानत पर रिहा कर दिया.

सीबीआई ने इस मामले को अपने हाथ में लेने के बाद, 2008 में, सीबीआई ने दो कैथोलिक पादरियों, फादर थॉमस कोट्टूर और फादर जोस पुथरुक्कयिल और नन, सीनियर सेफी की गिरफ्तारी की. लेकिन सबूतों के अभाव में, पुथुरुक्कयिल को 2018 में अदालत ने बरी कर दिया.

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रात को कॉन्वेंट में चोरी करने के लिए आए चोर अडक्का राजू के एक बयान दिया कि उसने आरोपी को देखा था, कुछ पुलिस अधिकारियों के बयानों और निष्कर्षों के साथ-साथ महत्वपूर्ण साबित हुए, जिन्होंने शुरुआत में मामले की जांच की थी. इस मामले में महत्वपूर्ण गवाहों सहित लगभग आठ गवाह मुकर गए थे.

जब यह घटना हुई तब अभया कैथोलिक चर्च द्वारा संचालित कॉलेज में प्री-डिग्री की छात्रा थी और पियस दसवें कॉन्वेंट हॉस्टल की रहने वाली थी.

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