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Saturday, 19 September, 2026
होमदेशहत्या के बाद नाले में मिला युवराज का शव, ‘लावारिस’ बताकर हुआ अंतिम संस्कार, परिवार को बाद में पता चला

हत्या के बाद नाले में मिला युवराज का शव, ‘लावारिस’ बताकर हुआ अंतिम संस्कार, परिवार को बाद में पता चला

31 साल के युवराज मनचंदा के परिवार को उनकी पहचान करने के लिए बुलाए जाने से दो दिन पहले ही उनके शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया था. बहन का आरोप है कि पुलिस ने हर जरूरी प्रक्रिया का उल्लंघन किया.

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गुरुग्राम: हरसिमरन मनचंदा ने अपने छोटे भाई को ढूंढने में पांच दिन बिताए, इसके बाद उन्होंने उसके लापता होने की शिकायत दर्ज कराई. इसके बाद उन्होंने पुलिस से किसी जानकारी का इंतज़ार करते हुए पांच और दिन बिताए. आखिरकार 16 सितंबर को जब पुलिस की तरफ से जानकारी मिली, तो उन्हें एक ऐसे शव की तस्वीरें दिखाई गईं, जिसका दो दिन पहले ही गुरुग्राम पुलिस ने ‘लावारिस’ शव के रूप में अंतिम संस्कार कर दिया था.

उनके भाई 31 साल के युवराज सिंह मनचंदा गुरुग्राम के सेक्टर 29 में अडाणी रियल्टी कंपनी में मैनेजर थे और 6 सितंबर से लापता थे. उन्हें आखिरी बार दिल्ली के लाजपत नगर में परिवार के साथ खरीदारी करते देखा गया था. वहां से निकलते समय उन्होंने अपनी बहनों से कहा था कि गुरुग्राम में उनकी एक मीटिंग है और वह रात 10 बजे तक घर लौट आएंगे, लेकिन वह कभी वापस नहीं आए.

परिवार को इन 10 दिनों के दौरान यह नहीं पता था कि युवराज की पहले ही मौत हो चुकी थी. कथित तौर पर जिस सहकर्मी से मिलने वह गए थे, उसी ने उनकी गर्दन में दो गोलियां मारीं और उन्हें सेक्टर 70 के नाले में फेंक दिया.

पहले अंतिम संस्कार, बाद में परिवार को बताया

गुरुग्राम पुलिस ने 10 सितंबर की सुबह सेक्टर-70 के सीवर से एक सड़ा-गला शव बरामद किया. बादशाहपुर पुलिस स्टेशन के अधिकारियों ने अज्ञात मौत का मामला दर्ज किया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. चार दिन बाद, 14 सितंबर को शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया.

परिवार से 16 सितंबर को संपर्क किया गया, यानी अंतिम संस्कार के दो दिन बाद. परिवार से तस्वीरों और शव के सामान के आधार पर युवराज की पहचान करने के लिए कहा गया.

यहीं से परिवार का गुस्सा शुरू होता है.

फरीदाबाद के एक निजी अस्पताल में डॉक्टर हरसिमरन मनचंदा ने 11 सितंबर को लाजपत नगर पुलिस स्टेशन में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई थी. यह शिकायत गुरुग्राम में शव मिलने के एक दिन बाद दर्ज की गई थी. अपनी शिकायत में उन्होंने कहा था कि 6 सितंबर को परिवार ने लाजपत नगर में युवराज के साथ दोपहर का खाना खाया था. इसके बाद वह परिवार की कार से गुरुग्राम के लिए निकले थे.

उन्होंने पुलिस को दिए बयान में कहा, “हमने शाम 7 बजे उन्हें फोन किया था, तब उन्होंने कहा था कि वह रात 10 बजे तक वापस आ जाएंगे. हमें उनका आखिरी व्हाट्सएप मैसेज सुबह 4:16 बजे मिला, इसके बाद उनका कोई पता नहीं चला.”

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में परेशान और रोती हुई हर्सिमरन आरोप लगाती दिखाई दे रही हैं कि अगर गुरुग्राम पुलिस ने बरामद शव की जानकारी तुरंत जोनल इंटीग्रेटेड पुलिस नेटवर्क पर अपलोड कर दी होती, तो परिवार को कुछ दिनों के अंदर ही जानकारी मिल सकती थी, हफ्तों बाद नहीं. ZIPNET पोर्टल का उद्देश्य ही लावारिस शवों की पहचान में परिवारों और दूसरे पुलिस स्टेशनों की मदद करना है. परिवार का कहना है कि इसके बजाय यह जरूरी कदम समय पर पूरा होने से पहले ही शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया.

ZIPNET एक ऑनलाइन डेटाबेस सिस्टम है, जिसका इस्तेमाल पुलिस विभाग लापता लोगों, अज्ञात शवों, चोरी हुए वाहनों, लापता मोबाइल फोन आदि की जानकारी साझा करने के लिए करते हैं.

अब परिवार ने पुलिस से पोस्टमार्टम रिपोर्ट, DNA सैंपल, तस्वीरें, जांच से जुड़े कागजात और युवराज का निजी सामान सुरक्षित रखने और उन्हें सौंपने की मांग की है. परिवार को डर है कि अब शव के चले जाने के बाद ये चीजें भी कहीं खो न जाएं.

पुलिस ने समय को लेकर अपना पक्ष रखा

शुक्रवार को दिप्रिंट ने गुरुग्राम पुलिस के एक प्रवक्ता से संपर्क किया. प्रवक्ता ने मामले को संभालने के पुलिस विभाग के तरीके का बचाव किया. प्रवक्ता ने कहा कि 10 सितंबर को नाले से शव बरामद किया गया था और उसे पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया था. साथ ही, बादशाहपुर पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता की धारा 194 के तहत अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज किया गया था.

प्रवक्ता ने कहा कि शव के 6 सितंबर से ही नाले में पड़े होने की संभावना थी और मिलने तक वह करीब पांच दिनों तक पानी में रहा था. इस वजह से शव बुरी तरह सड़-गल गया था. प्रवक्ता के मुताबिक, सामान्य प्रक्रिया के तहत पुलिस को किसी अज्ञात शव का अंतिम संस्कार करने से पहले 72 घंटे इंतजार करना होता है. उन्होंने कहा कि इस मामले में 72 घंटे का समय पूरा किया गया था और उसके बाद दूसरे राज्यों और सभी पुलिस स्टेशनों को इसकी जानकारी दी गई थी.

परिवार के इस खास आरोप पर कि शव की जानकारी कभी ZIPNET पर अपलोड नहीं की गई, प्रवक्ता ने कहा कि उनकी तरफ से जानकारी सभी संबंधित पक्षों को भेजी गई थी, लेकिन विभाग यह पुष्टि नहीं कर सकता कि यह जानकारी कब भेजी गई या समय रहते इसे पोर्टल पर अपलोड किया गया था या नहीं.

दिल्ली पुलिस ने हत्या का मामला सुलझाया

एक तरफ परिवार शव के अंतिम संस्कार को लेकर सवाल उठा रहा था, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस ने अलग से हत्या के मामले को सुलझा लिया.

दिल्ली पुलिस के जांचकर्ताओं ने युवराज की आखिरी फोन कॉल्स को उनकी पूर्व ऑफिस सहकर्मी अन्या वात्स से जोड़ा. पुलिस को पता चला कि युवराज ने अपने परिवार को बताया था कि वह अन्या से मिलने गुरुग्राम जा रहा है. जब अन्या का फोन बंद हो गया, तो पुलिस ने उसकी गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू की. आखिरकार पुलिस ने उस नए सिम कार्ड का पता लगा लिया, जिसे अन्या ने हत्या के बाद खरीदा था. यह सिम उत्तराखंड की एक जगह पर एक्टिव था. इसके बाद दिल्ली पुलिस ने अन्या वात्स और उसके लिव-इन पार्टनर संयम सचदेवा को गिरफ्तार कर लिया.

एक सूत्र के मुताबिक, दोनों ने पूछताछ के दौरान अपना अपराध कबूल कर लिया. पुलिस ने कहा कि तीनों के बीच पैसों को लेकर विवाद था, जो बढ़ गया. इसके बाद अन्या और संयम ने युवराज की गर्दन में दो गोलियां मारीं. दोनों ने शव को करीब सात घंटे तक अपनी कार में रखा. इस दौरान वे यह तय करने की कोशिश करते रहे कि शव को कहां ठिकाने लगाया जाए. आखिरकार उन्होंने शव को सेक्टर 70 के नाले में फेंक दिया और उत्तराखंड भाग गए.

दिल्ली पुलिस ने कहा है कि मामले की जांच अभी जारी है. फिलहाल पैसों के विवाद को हत्या की वजह माना जा रहा है. हालांकि, पूछताछ के दौरान अन्या ने बार-बार अपने बयान बदले हैं. दोनों आरोपियों को गुरुवार को अदालत में पेश किया गया और उन्हें पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया.

हालांकि, मनचंदा परिवार के लिए आरोपियों की गिरफ्तारी से मामला खत्म नहीं हुआ है. अब उनके सवाल यह नहीं हैं कि युवराज को किसने मारा—इसका जवाब मिल चुका है. उनके सवाल यह हैं कि उन्हें यह जानने में इतनी देर क्यों हुई कि वे अपने बेटे और भाई को पहले ही खो चुके थे, और उन्हें उसके अंतिम संस्कार की रस्में निभाने का मौका तक क्यों नहीं मिला.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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