तिरुवनंतपुरम/कोच्चि, 26 जून (भाषा) केरल में सत्तारूढ़ माकपा और कांग्रेस नीत विपक्षी गठबंधन संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) ने वन्यजीव अभयारण्य एवं राष्ट्रीय उद्यान के चारों ओर एक किलोमीटर चौड़ा पारिस्थितिकी संवेनशील क्षेत्र (ईएसजेड) बनाए जाने के उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर रविवार को एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए।
तिरुवनंतपुरम में संवाददाताओं से बातचीत में माकपा के प्रदेश सचिव कोडियेरी बालाकृष्णन ने दावा किया कि वर्ष 2011 में तत्कालीन केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्री जयराम रमेश बफर जोन के विचार के साथ आए थे और तब की केरल की यूडीएफ सरकार ने यह जांचने के लिए आयोग का गठन किया था कि इसे इस दक्षिणी राज्य में लागू किया जा सकता है या नहीं।
उन्होंने बताया कि इसके बाद आयोग, जिसमें कांग्रेस नेता वी डी सतीशन भी शामिल थे, ने अनुशंसा की कि वन्यजीव अभयारण्य और राष्ट्रीय उद्यानों के चारों ओर 10 किलोमीटर चौड़ा बफर जोन बनाया जा सकता है।
वहीं, दूसरी ओर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सतीशन ने दावा किया कि वर्ष 2019 में मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की हुई बैठक में फैसला लिया गया था कि एक किलोमीटर चौड़ा बफर जोन होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अब उच्चतम न्यायालय ने भी यह कह दिया है और माकपा वायनाड तथा इडुकी में इसके खिलाफ प्रदर्शन कर रही है। कोच्चि में संवाददाताओं से बातचीत में सतीशन ने सवाल किया, ‘‘वे लोगों को भ्रमित करने की कोशिश क्यों कर रहे हैं?’’
बालाकृष्णन ने इस संबंध में संवाददाताओं द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि वर्ष 2020 और इसके बाद 2021 में राज्य के वन विभाग ने केंद्र के समक्ष ऐसे बफर जोन या पारिस्थितिकी संवेदनशील क्षेत्र से कृषि भूमि और आवासीय भूमि को अलग रखने का प्रस्ताव किया।
उन्होंने कहा कि वन विभाग ने इस संबंध में उच्चतम न्यायालय का रुख करने का भी फैसला किया।
बालाकृष्णन ने कहा कि राज्य सरकार के प्रस्ताव पर केंद्र से अंतिम चरण का विचार-विमर्श चल रहा था कि तभी उच्चतम न्यायालय का निर्देश आ गया।
उन्होंने भरोसा दिया कि उच्चतम न्यायालय के निर्देश से प्रभावित सभी लोगों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार सभी आवश्यक कदम उठाएगी।
गौरतलब है कि शीर्ष अदालत ने हाल में निर्देश दिया था कि राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य सहित संरक्षित प्रत्येक वन के चारों ओर एक किलोमीटर का पारिस्थितिकी संवेदनशील क्षेत्र होगा तथा उस इलाके में खनन गतिविधियां प्रतिबंधित रहेंगी।
केरल के पहाड़ी इलाके खासतौर पर इडुकी, वायनाड, कोट्टयम, पथनमथिट्टज्ञा जिलों के विभिन्न राजनीतिक और किसान संगठन तीन जून को शीर्ष अदालत से आए इस फैसले का विरोध कर रहे हैं।
भाषा धीरज नेत्रपाल
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