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Friday, 17 April, 2026
होमदेश'केंद्र ने HC जज के बच्चों को वकीलों के पैनल में शामिल किया': रीक्यूजल केस में केजरीवाल का हलफनामा

‘केंद्र ने HC जज के बच्चों को वकीलों के पैनल में शामिल किया’: रीक्यूजल केस में केजरीवाल का हलफनामा

AAP प्रमुख और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री ने RTI के जवाब का हवाला देते हुए कहा कि जस्टिस कांता के बेटे और बेटी केंद्र सरकार के पैनल में शामिल वकील हैं, जिससे 'पक्षपात की आशंका' और बढ़ जाती है.

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नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट में चल रहे रीक्यूजल मामले में एक और नया मोड़ आ गया है. दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, जिन पर दिल्ली एक्साइज पॉलिसी केस में 22 अन्य लोगों के साथ आरोप लगे हैं, अब एक अतिरिक्त हलफनामा लेकर आए हैं. इसमें जज के बच्चों के केंद्र सरकार द्वारा पैनल में शामिल किए जाने से जुड़े नए तथ्य बताए गए हैं.

सार्वजनिक जानकारी और आरटीआई के जवाब में मिली जानकारी के आधार पर, केजरीवाल ने दिल्ली हाई कोर्ट की जज जस्टिस स्वर्णा कांत शर्मा के रीक्यूजल की मांग करते हुए यह हलफनामा दिया है. इसमें उनके बच्चों के केंद्र के वकील के रूप में पैनल में शामिल होने से जुड़े तथ्य हैं. यह हलफनामा उनके 6 अप्रैल को पहली बार कोर्ट में पेश होने के बाद सामने आया.

केजरीवाल ने कहा कि सरकार के विधि विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, एडवोकेट ईशान शर्मा और शांभवी शर्मा, जो जस्टिस कांत शर्मा के बेटे और बेटी हैं, उन्हें केंद्र सरकार ने अपने पैनल में शामिल किया है.

हलफनामे में बताया गया है कि ईशान शर्मा को सुप्रीम कोर्ट के लिए ग्रुप ए पैनल काउंसल के रूप में शामिल किया गया है. वहीं शांभवी शर्मा को दिल्ली हाई कोर्ट के लिए सरकारी वकील के रूप में और ग्रुप सी पैनल काउंसल के पद पर रखा गया है. केजरीवाल ने यह भी कहा कि इससे पहले ईशान शर्मा दिल्ली हाई कोर्ट के साथ भी पैनल में शामिल थे.

पैनल में शामिल वकील वह होते हैं जिन्हें सरकार, सार्वजनिक उपक्रम या किसी संस्था द्वारा एक निश्चित समय के लिए अपने मामलों में प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना जाता है. उन्हें सरकारी वकीलों की एक सूची में शामिल किया जाता है ताकि वे मुकदमों को संभाल सकें या तय शर्तों और फीस के आधार पर कानूनी सलाह दे सकें.

केजरीवाल ने यह भी कहा कि ये केंद्र सरकार के साथ लगातार पेशेवर जुड़ाव हैं. इसमें सरकारी काम, केस, अदालत में उपस्थिति और सरकार से मिलने वाले काम के आधार पर आर्थिक लाभ भी शामिल होते हैं.

13 सितंबर 2022 को केंद्र द्वारा जारी नोटिफिकेशन का हवाला देते हुए केजरीवाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में मामलों का बंटवारा सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया द्वारा किया जाता है. वही अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल और पैनल काउंसल, जिनमें ग्रुप ए और सी शामिल हैं, को मामले देते हैं.

केजरीवाल ने आगे कहा कि उनके खिलाफ एक्साइज पॉलिसी केस में सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया तुषार मेहता उनकी रीक्यूजल याचिका का विरोध कर रहे हैं और उनके पक्ष में आए डिस्चार्ज ऑर्डर के खिलाफ दलील दे रहे हैं.

केजरीवाल ने कहा कि इससे सीधे और गंभीर हितों के टकराव की स्थिति बनती है. उन्होंने कहा, “वही कानून अधिकारी और कानूनी व्यवस्था जो अभियोजन पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रही है, वही उस व्यवस्था का हिस्सा है जिसके जरिए केंद्र सरकार के केस और काम उस जज के परिवार के सदस्यों को दिए जाते हैं जो इस मामले की सुनवाई कर रही हैं.”

इसके अलावा, केजरीवाल ने मौखिक बहस के लिए अतिरिक्त समय भी मांगा. उन्होंने कहा कि सोमवार को अदालत ने यह संकेत नहीं दिया था कि वह सामान्य समय से ज्यादा बैठकर उसी दिन सुनवाई खत्म कर देगी.

अपने जवाबी तर्क देने के अधिकार पर जोर देते हुए केजरीवाल ने कहा कि सिर्फ 2023 में ही जस्टिस शर्मा के बेटे को केंद्र द्वारा 2,487 मामले दिए गए थे. जबकि पिछले साल उन्हें 1,663 मामले दिए गए थे. यह जानकारी इस साल 18 मार्च को आरटीआई के जवाब में सामने आई, ऐसा हलफनामे में कहा गया है.

आखिर में, इस मामले को “राजनीतिक रूप से संवेदनशील आपराधिक मुकदमा” बताते हुए केजरीवाल ने कहा कि वह केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी के मुख्य विपक्षी हैं, इसलिए धारणा बहुत मायने रखती है. उन्होंने कहा कि सीबीआई को पिंजरे का तोता नहीं दिखना चाहिए, बल्कि उसे इस धारणा से ऊपर उठना चाहिए.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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