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Monday, 2 February, 2026
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कर्नाटक सरकार ने रमजान के दौरान उर्दू स्कूलों के समय में बदलाव किया

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बेंगलुरु, दो फरवरी (भाषा) कर्नाटक सरकार ने शैक्षणिक वर्ष 2025-26 में रमजान के महीने के दौरान राज्य भर के उर्दू माध्यम के प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और उच्च विद्यालयों के समय में बदलाव करने का निर्णय लिया है।

राज्य के गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने सोमवार को कहा कि सरकार के इस कदम को अल्पसंख्यकों का तुष्टीकरण कहना सही नहीं है।

सरकार द्वारा जारी एक परिपत्र में कहा गया है कि यह निर्णय सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और गैर-सहायता प्राप्त उर्दू माध्यम के स्कूलों पर लागू होगा और यह फैसला मौजूदा आदेशों की समीक्षा और कर्नाटक राज्य प्राथमिक विद्यालय शिक्षा संघ (आर), बेंगलुरु द्वारा प्रस्तुत एक अभ्यावेदन के बाद लिया गया है।

सोमवार को सार्वजनिक हुए 30 जनवरी के परिपत्र में कहा गया है ‘इससे पहले, 31 अक्टूबर, 2002 को जारी एक स्थायी आदेश के माध्यम से, राज्य में उर्दू माध्यम के निम्न प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और उच्च विद्यालयों को केवल सुबह आठ बजे से दोपहर 12.45 बजे तक कक्षाएं संचालित करने की अनुमति दी गई थी, और उक्त स्थायी आदेश के नियमों के अनुसार समीक्षा करने और आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है।’

सरकार ने आठ मार्च, 2023 के अपने उस आदेश का हवाला दिया, जिसके तहत राज्य पाठ्यक्रम का पालन करने वाले स्कूलों के लिए शैक्षणिक वर्ष 2023-24 के लिए एक गतिविधि कार्य योजना लागू की गई थी।

उस परिपत्र के अनुसार, दैनिक शैक्षणिक गतिविधियों के लिए विद्यालय के नियमित घंटे सुबह 10 बजे से शाम 4.20 बजे तक निर्धारित किए गए थे।

हालांकि, रमजान और उर्दू माध्यम संस्थानों के लिए लंबे समय से चले आ रहे विशेष प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए, सरकार ने एसोसिएशन के अध्यक्ष द्वारा 17 जनवरी, 2026 को प्रस्तुत एक अभ्यावेदन के बाद मामले की नए सिरे से समीक्षा की।

आदेश में कहा गया है, ‘शैक्षणिक वर्ष 2025-26 में, राज्य के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और गैर-सहायता प्राप्त उर्दू माध्यम के निम्न प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और उच्च विद्यालयों के समय में परिवर्तन रमजान के महीने के प्रारंभ की तिथि से 20 मार्च, 2026 तक लागू होगा।’

इस कदम को उचित ठहराते हुए परमेश्वर ने कहा कि इनका उद्देश्य उर्दू माध्यम के बच्चों को अन्य बच्चों के बराबर लाना है।

उन्होंने कहा, ‘अगर कोई अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति की तरह हर मायने में आपके बराबर नहीं है, तो आपको क्या लगता है कि संविधान में शुरू से ही अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षण क्यों दिया गया था? आपको क्या लगता है कि संविधान में पिछड़े वर्गों का ज़िक्र क्यों किया गया है? ये वो लोग हैं जिन्हें हज़ारों सालों से उपेक्षित किया गया है। क्या आप नहीं चाहते कि ये लोग दूसरों के बराबर हों और एक समतावादी समाज का निर्माण करें?’

मंत्री ने कहा कि समय में किया गया बदलाव कार्यक्रमों के संदर्भ में सरकार द्वारा दिया गया थोड़ा सा प्रोत्साहन है।

मंत्री ने कहा, ‘अगर इसे बर्दाश्त नहीं किया जाता है, तो इसका मतलब है कि आप लोगों के साथ समान व्यवहार किए जाने के खिलाफ हैं।’

भाषा नोमान दिलीप

दिलीप

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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