नई दिल्ली: राजस्थान हाई कोर्ट के जज संजीव प्रकाश शर्मा पर एक और बड़ा आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता ने CJI सूर्यकांत को चौथा पत्र भेजा है. इसमें उन्होंने जस्टिस शर्मा पर एक आंतरिक न्यायिक जांच में दखल देने, गोपनीयता भंग करने और प्रशासनिक शक्तियों का गलत इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है.
जस्टिस मेहता ने इससे पहले 2, 10 और 17 अगस्त को तीन पत्र लिखे थे. इन पत्रों में उन्होंने उस समय राजस्थान हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रहे शर्मा पर “कुप्रशासन”, “गलत काम”, “भाई-भतीजावाद” और “पक्षपात” के आरोप लगाए थे.
जस्टिस शर्मा अपने कोर्ट रूम के बाहर वकीलों के एक समूह के विरोध प्रदर्शन के बाद छुट्टी पर चले गए थे. उन्होंने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को बेबुनियाद बताया था.
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने 26 अगस्त को कहा था कि जस्टिस मेहता के शर्मा पर लगाए गए आरोपों पर सार्वजनिक रूप से फैसला नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा था कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जज को “निष्पक्ष मौका दिया जाना चाहिए.”
30 अगस्त को लिखे अपने चौथे पत्र में जस्टिस मेहता ने कहा कि उनके पास जस्टिस शर्मा के मनमाने, संदिग्ध और साफ तौर पर “मनमाने तरीके से अधिकार का इस्तेमाल करने वाले” कामों को लेकर “और जानकारी” और “सामग्री” है. जस्टिस मेहता का मूल हाई कोर्ट भी राजस्थान हाई कोर्ट है.
जस्टिस मेहता ने नियमों में मनमाने तरीके से बदलाव, जमीन के विवाद में न्यायिक दखल और राजस्थान हाई कोर्ट में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार और प्रशासनिक व्यवस्था के बिगड़ने के आरोप लगाए हैं.
उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट की एक शिकायत समिति बनाई गई थी, जो एक न्यायिक अधिकारी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच कर रही थी. उस अधिकारी पर आरोप था कि उसने अपने मोबाइल फोन पर एक महिला अधिकारी की आपत्तिजनक तस्वीरें दिखाई थीं.
जस्टिस मेहता ने लिखा, “21 मई 2026 और 9 जुलाई 2026 के समिति के दो प्रस्तावों में साफ तौर पर दर्ज है कि कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस शर्मा ने जांच की कार्यवाही में सीधे दखल दिया. इससे समिति की स्वतंत्रता प्रभावित हुई और इस तरह का दखल पूरी जांच को प्रभावित कर सकता है. साथ ही, इस संवेदनशील कार्यवाही की गोपनीयता भी भंग हुई.”
उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्थान हाई कोर्ट की तीन महिला जजों वाली समिति ने इन बातों को रिकॉर्ड किया और जांच को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया.
उन्होंने आरोप लगाया, “समिति ने यह भी कहा कि कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने समिति के रिकॉर्ड रजिस्ट्री के दूसरे अधिकारियों और न्यायिक अधिकारियों के साथ साझा करवाए. इससे गंभीर आरोपों का सामना कर रहे न्यायिक अधिकारी के खिलाफ शुरू की गई जांच की गोपनीयता भंग हुई.”
31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जस्टिस संजय के. अग्रवाल को राजस्थान हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाने की सिफारिश की थी.
जस्टिस मेहता ने CJI को लिखे अपने तीन पत्रों में जस्टिस शर्मा पर गंभीर आरोप लगाए थे और उनसे राज्य के बाहर से किसी स्थायी मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति करने की अपील की थी.
जस्टिस मेहता को मई 2011 में राजस्थान हाई कोर्ट का जज नियुक्त किया गया था. फरवरी 2023 में वह गुवाहाटी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने और उसी साल नवंबर में उन्हें सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया गया.
जस्टिस शर्मा को नवंबर 2016 में राजस्थान हाई कोर्ट का जज नियुक्त किया गया था और जनवरी 2022 में उनका तबादला पटना हाई कोर्ट कर दिया गया था.
स्वास्थ्य कारणों से राजस्थान वापस भेजे जाने की उनकी मांग को मार्च 2023 में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने स्वीकार नहीं किया था.
इसके बजाय उनका तबादला पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट कर दिया गया था. इसके बाद कॉलेजियम ने मई 2025 में उन्हें राजस्थान वापस भेजने की सिफारिश की थी.
यह भी पढ़ें: अगर बांग्लादेश मक्का समझौते में शामिल होता है तो भारत के लिए बढ़ सकती हैं मुश्किलें