नयी दिल्ली, 18 अगस्त (भाषा) जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए नए परीक्षा पैटर्न पर शिक्षाविदों ने संदेह जताया है।
जेएनयू में ऐसे पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए दशकों पुरानी विश्लेषणात्मक पद्धति के बदले बहुविकल्पीय प्रश्नों पर आधारित केंद्रीय विश्वविद्यालय संयुक्त प्रवेश परीक्षा (सीयूसीईटी) को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
जेएनयू में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए उम्मीदवारों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा होती है और आशंका जतायी जा रही है कि बहुविकल्पीय प्रश्न (एमसीक्यू) आधारित परीक्षा से छात्रों की गुणवत्ता प्रभावित होगी।
जेएनयू की कुलपति शांतिश्री धूलिपुडी पंडित के अनुसार विश्वविद्यालय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए सीयूईटी प्रारूप में बदलाव की केंद्र से अपील करता रहा है
उन्होंने कहा, ‘‘मास्टर कार्यक्रमों के लिए, हमें ज्ञान के अलावा विषय की समग्र समझ, राय और महत्वपूर्ण सोच का परीक्षण करने की आवश्यकता होती है। एमसीक्यू एक अलग पैटर्न है।’’
जेएनयू ने इस साल की शुरुआत में घोषणा की थी कि वह सभी स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में दाखिला सीयूईटी के माध्यम से लेगा।
जेएनयू की प्रोफेसर बिष्णुप्रिया दत्त ने कहा, ‘हमें विश्वविद्यालय की अनूठी प्रकृति और विभिन्न केंद्रों और पाठ्यक्रमों की विशेषता को भी ध्यान में रखना होगा… विश्वविद्यालय देश भर की सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाओं को आकर्षित करता है।’
उन्होंने कहा, ‘अगर हमें सभी छात्रों को समान अवसर मुहैया कराना है, तो सीयूईटी-पीजी एक विश्लेषणात्मक परीक्षा हो सकती है, लेकिन एमसीक्यू आधारित परीक्षा के आधार पर मास्टर पाठ्यक्रमों के उम्मीदवारों का परीक्षण करना सही नहीं है।’
प्रोफेसर आयशा किदवई ने कहा कि विश्वविद्यालय में दाखिले के लिए अपनी प्रवेश परीक्षा प्रणाली थी जिसमें छात्रों का उनके लेखन कौशल और उनकी राय के आधार पर विश्लेषण किया जाता था।
भाषा अविनाश नरेश
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