Monday, 27 June, 2022
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झारखंड में पैसे की कमी से खिलाड़ी छोड़ रहे खेल, CM हेमंत ने विधायकों के साथ क्रिकेट मैच में खर्च किए 42 लाख

रेसलर रीता सुरीन कहती हैं, 'वो मजदूरी और शादियों में डेकोरेशन का काम कर अपना खर्चा चलाती हैं. मौका मिलने पर रेसलिंग का अभ्यास करती हैं. फिलहाल वह इग्नू से हिन्दी विषय में पीजी में दाखिला लेने जा रही हैं.'

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रांची: रांची से 40 किलोमीटर दूर गुमला जिले की 26 साल की रीता सुरीन रेसलर रही हैं. राज्य के लिए उन्होंने कई मेडल भी जीते हैं लेकिन खेलना छोड़ दिया है, क्योंकि उनके पास पैसे नहीं थे. सिमडेगा की नूतन कुमारी हॉकी खिलाड़ी हैं. नेशनल लेवल पर खेल चुकी हैं, ट्रेनिंग और पैसों के अभाव में खेलना छोड़ दिया है. सिमडेगा की ही करिश्मा परवार, डिपलीन केरकेट्टा जैसे हॉकी खिलाड़ी भी इस लिस्ट में शामिल हैं. एथलेटिक्स की खुशबू कुमारी अपने खेल को जारी रखने के लिए आए दिन सहयोग के लिए इधर-उधर भटक रही हैं. यही नहीं, सिमडेगा और गुमला जिले की प्रमोदिनी लकड़ा सहित पांच से अधिक महिला हॉकी खिलाड़ी बरियातू स्कूल के हॉस्टल में रहती हैं और हॉकी का अभ्यास करती हैं. बदले में इन्हें हॉस्टल को प्रतिमाह 1500 रुपए फीस देने के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है.

वहीं, दूसरी तरफ झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन को क्रिकेट मैच खेलने का मन हुआ. पहला मैच 11 मार्च 2021 को सीएम एकादश बनाम विधानसभा अध्यक्ष एकादश के बीच हुआ. इस आयोजन में कुल 30 लाख 85 हजार 616 रुपए खर्च हुए.

22 मार्च को दूसरा मैच सीएम एकादश बनाम पत्रकार एकादश हुआ. इसके आयोजन में भी 11 लाख, 33 हजार, 636 रुपए खर्च हुए. दोनों ही आयोजन को मिलाकर कुल 42 लाख, 19 हजार, 252 रुपए खर्च दिए गए.

इंडियन एक्सप्रेस में छपी ख़बर और एक आरटीआई (कॉपी मौजूद है) से मिली जानकारी के मुताबिक ये बिल अभी भुगतान नहीं किया गया है. लेकिन खेल विभाग की तरफ से इसे पास कर दिया गया है. कैबिनेट जैसे ही इसे पास करेगी, बिल का भुगतान कर दिया जाएगा. इसके तहत स्पोर्ट्स किट, कैटरिंग, मेडल-ट्रॉफी, फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, बुके और इवेंट मैनेजमेंट वालों को पेमेंट किया जाना है.


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मैन ऑफ द मैच बने हेमंत सोरेन, खर्च को लेकर पूर्व खेल मंत्री ने यह कहा

विधानसभा अध्यक्ष एकादश के साथ जब मैच हुआ तो सीएम हेमंत सोरेन ने इसमें कुल 11 रन बनाएं. इस बेहतरीन प्रदर्शन के लिए उन्हें मैन ऑफ द मैच चुना गया था. टेनिस वाली गेंद से हुए इस पूरे आयोजन में राज्य के सभी 71 विधायकों ने हिस्सा लिया था. क्या पक्ष क्या विपक्ष.

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बीजेपी विधायक और इस आयोजन में शामिल हुए पूर्व खेल मंत्री अमर कुमार बाऊरी ने दिप्रिंट को बताया कि, ‘विधानसभा सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच काफी गर्म माहौल रहता है. इसे सामान्य करने के लिए क्रिकेट मैच के आयोजन की परंपरा रही है. हमारे सरकार के कार्यकाल में भी क्रिकेट मैच हुए हैं, उस दौरान कितना खर्च किया जाता रहा, फिलहाल वो मुझे याद नहीं. इसको लेकर जो प्रश्न उठे हैं, वो कोविड के टाइम में इतने खर्च को लेकर है, इस पर वर्तमान सरकार विचार कर सकती है.’

मजदूरी और शादियों में काम कर जीवन चला रही रेसलर

इसके इतर दिप्रिंट से बात करते हुए रेसलर रीता सुरीन कहती हैं, ‘वो मजदूरी और शादियों में डेकोरेशन का काम कर अपना खर्चा चलाती हैं. मौका मिलने पर रेसलिंग का अभ्यास करती हैं. फिलहाल वह इग्नू से हिन्दी विषय में पीजी में दाखिला लेने जा रही हैं.’

वहीं राज्य हॉकी टीम की सेंटर फॉरवर्ड खिलाड़ी प्रमोदिनी लकड़ा कहती हैं, ‘समीरा टोप्पो, अभिलाषा मिंज, श्वेता कुल्लू सहित हम चार लड़कियां हॉस्टल में हैं. सभी के पिता किसान हैं. सभी अपने घर से हर महीने 1400 रुपया देती हैं, तब जाकर रांची में रहना संभव हो पा रहा है.’

राज्यभर के लिए होने वाले टूर्नामेंट में स्कूलों को शामिल नहीं किया गया

बीते 6 दिसंबर को बालक वर्ग का नेहरू कप हॉकी टूर्नामेंट खत्म हुआ है. ये एकमात्र ऐसा टूर्नामेंट है जिसमें राज्यभर के स्कूल हिस्सा लेते हैं. बजाय राज्यभर के स्कूलों को मौका देने के, केवल राज्य सरकार के 11 आवासीय और डे-बोर्डिंग सेंटरों के खिलाड़ियों को शामिल कर यह आयोजन करा लिया गया. वहीं बीते अक्टूबर में बालिका वर्ग के लिए हुए इस टूर्नामेंट में केवल चार सेंटरों की लड़कियों को इसमें शामिल किया गया.

जबकि नेहरू हॉकी प्रतियोगिता का नियम है कि यह सबसे पहले प्रखंड स्तर पर आयोजित होती है और प्रखंड स्तर में जितने भी सरकार से मान्यता प्राप्त विद्यालय होते हैं वे इसमें हिस्सा लेते हैं और उसमें जो विद्यालय की टीम विजेता होती है वह जिला स्तर के प्रतियोगिता में भाग लेती है और जिला स्तर की प्रतियोगिता में जो विद्यालय की टीम विजेता होती है वह राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में हिस्सा लेती है और इसी प्रकार राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में विजेता विद्यालय की टीम राष्ट्रीय नेहरू हॉकी प्रतियोगिता में जाती है.

दोनों ही मसले पर खेल मंत्री हफीजुल हसन ने अपनी प्रतिक्रिया देने से साफ इंकार कर दिया.

गरीबी के पायदान पर झारखंड दूसरे नंबर पर

हाल ही में जारी एनएफएचएस की रिपोर्ट के मुताबिक गरीबी के पायदान पर झारखंड दूसरे नंबर पर है. राज्य की 42.16 फीसदी आबादी गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रही है. इस रिपोर्ट के मुताबिक चतरा जिले में 60.74 फीसदी आबादी गरीबी रेखा से नीचे है.

टूर्नामेंट में विधायक खिलाड़ियों के साथ झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन | फोटो- दिप्रिंट

खिलाड़ी 33 थे, तो 100 लोगों को क्रिकेट किट क्यों बांटा गया?

बीजेपी प्रवक्ता प्रुतल शाहदेव कहते हैं, ‘खेल को बढ़ावा देना चाहिए सरकार को, लेकिन इस तरीके के लूट को नहीं. तीन टीमों ने मैच में हिस्सा लिया. इस लिहाज से देखें तो 33 खिलाड़ियों के बीच किट बांटा जा सकता था, लेकिन यहां 100 लोगों को यह किट बांटा गया है. टेनिस बॉल (रबर गेंद) वाले खेल में भी हेलमेट, थाईगार्ड, पैड, ग्लब्स जैसी चीजों का बंदरबांट किया गया है. ये सरासर लूट है. हालांकि प्रतुल शाहदेव ने यह नहीं बताया कि, पूर्व की रघुवर सरकार में हुए ऐसे आयोजनों में कितना खर्च हुआ था.

खेल को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ‘मुख्यमंत्री आमंत्रण फुटबॉल प्रतियोगिता’ का आयोजन राज्यभर में करा रही है. इसके लिए प्रति जिला 14 लाख रुपए आवंटित किए गए हैं. गोड्डा जिले में भी ये आयोजन चल रहा है. लेकिन नियम के मुताबिक इसका आयोजन पंचायत स्तर से जिला स्तर पर होना था. ईटीवी में छपी एक खबर के मुताबिक प्रतियोगिता के तहत 4 दिसंबर तक जिले के 201 पंचायतों में मैच आयोजित कर विजेता टीम को चयनित करना था. जो प्रखंड स्तर पर होने वाले प्रतियोगिता में शामिल होती, लेकिन पंचायत स्तर पर प्रतियोगिता आयोजित हो ही नहीं पाई.

अब प्रखंड स्तर पर आनन-फानन में मैच आयोजित किए जा रहे हैं. बीते 6 दिसंबर को गोड्डा सदर प्रखंड के पथरा मैदान में फुटबॉल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया. इसके लिए स्थानीय मुखिया ने नेट और पोल की व्यवस्था की लेकिन गेंद की व्यवस्था हो ही नहीं पाई. मैच के पहले दिन 34 टीमों को शामिल होना था पर सिर्फ एक टीम मैच खेलने पहुंची और पहले दिन कोई मैच ही नहीं हो सका.

मैच के दूसरे दिन पांच टीमें पहुंचीं. मैच शुरू होते ही एक खिलाड़ी के सीने की हड्डी टूट गयी, जिसे जैसे-तैसे खाट से अस्पताल पहुंचाया गया. इसकी वजह थी कि कोई एंबुलेंस उपलब्ध नहीं था.

आने वाले विधानसभा सत्र में भी शायद ही इस मसले पर सत्ता पक्ष या विपक्ष के किसी विधायक की तरफ से इस पर कोई सवाल या आपत्ति जाहिर हो. क्योंकि दोनों ही पक्ष ने क्रिकेट किट का लाभ लिया है.

(आनंद दत्ता स्वतंत्र पत्रकार हैं)


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