नई दिल्ली: सोमवार देर रात झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड स्टाफ सेलेक्शन कमीशन-कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल (JSSC-CGL) परीक्षा और निजी एजेंसी TDPL की ओर से कराई गई सभी परीक्षाओं को रद्द करने का ऐलान किया. इसके बाद रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में खुशी का माहौल बन गया.
झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा पार्टी के छात्र नेता और सदस्य देवेंद्र नाथ महतो ने सदर अस्पताल में झारखंड की मंत्रियों दीपिका पांडे सिंह और इरफान अंसारी की मौजूदगी में अपनी भूख हड़ताल खत्म की. दो और छात्रों—राहुल क्रांति और उम्मे हबीबा, ने भी अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी.
एक आयोजक ने दिप्रिंट को बताया कि रांची के 30 साल के रूपेश कुमार पाल और 28 साल की सबिता कुमारी 15 दिन बाद भी भूख हड़ताल पर हैं.
घोषणा के बाद प्रदर्शनकारी छात्रों ने जश्न मनाया. वहीं, JSSC-CGL परीक्षा के जरिए भर्ती हुए और अपनी-अपनी पोस्ट पर काम कर चुके उम्मीदवारों ने प्रोजेक्ट भवन में धरना दिया. वे अपनी नियुक्तियों को लेकर स्पष्टता और न्याय की मांग कर रहे थे.
सरकार ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों की ज्यादातर बड़ी मांगें मान ली हैं. हालांकि, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग नहीं मानी गई है.
हालांकि, छात्रों ने कहा है कि सभी मांगों पर सहमति बनने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा.
छात्र नेता पीयूष कुमार ने मीडिया से कहा, “हम पहले यह देखना चाहते हैं कि JSSC का नोटिफिकेशन वास्तव में वापस लिया गया है या नहीं. TDPL ने अंतिम मेरिट लिस्ट तैयार की थी. हम CDPO और FSO परीक्षाओं को लेकर भी सरकार का रुख समझना चाहते हैं. इस पर अभी स्थिति साफ नहीं है.”
कुमार ने आगे कहा, “तीसरी बात उम्र की कटऑफ को लेकर है. हमने 2018 की कटऑफ की मांग की थी, लेकिन सरकार का इस पर रुख साफ नहीं है. CBI जांच को लेकर सरकार का क्या रुख है? इस पर भी हमें कुछ संदेह हैं. इसलिए इन सभी मुद्दों पर सहमति बनने तक आंदोलन जारी रहेगा.”
कुमार JPSC चाइल्ड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट ऑफिसर (CDPO) और फूड सेफ्टी ऑफिसर (FSO) परीक्षाओं की बात कर रहे थे. उन्होंने राज्य में भर्ती परीक्षाओं के लिए उम्र की कटऑफ 2018 तय करने की मांग भी दोहराई.
इसके जवाब में मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने देर रात मीडिया से कहा कि सरकार छात्रों की सभी मांगें मान चुकी है.
उन्होंने CBI जांच नहीं कराने के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि केंद्रीय एजेंसी परिणाम देने में नाकाम रही है. उन्होंने कहा कि CBI के पास पेपर लीक से जुड़े 17 मामले लंबित हैं और 2015 से देशभर में पेपर लीक और कथित गड़बड़ियों के 152 मामले सामने आए हैं.
उन्होंने कहा कि इन मामलों में न तो केंद्र सरकार और न ही केंद्रीय एजेंसियां कोई ठोस नतीजा हासिल कर पाई हैं. इसलिए सरकार ने CID जांच के लिए समय सीमा तय की है. 90 दिनों के अंदर चार्जशीट दाखिल की जाएगी और जल्द फैसला देने के लिए मामले की सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट में होगी.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी सोमवार को घोषणा की कि सरकार ने परीक्षा सुधारों के लिए IAS अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में एक समिति बनाने का फैसला किया है. यह समिति सुधार की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए अलग-अलग संस्थानों, बुद्धिजीवियों और विशेषज्ञों से बात करेगी.
स्वीकार की गई मांगें
9 अगस्त को छात्रों के प्रतिनिधिमंडल के साथ छह घंटे चली लंबी बैठक के बाद झारखंड सरकार तीन परीक्षाएं रद्द करने की मांग पर राजी हुई थी. साथ ही 14वीं JPSC कंबाइंड सिविल सर्विसेज एग्जाम (CSE) में ED जांच कराने पर भी विचार करने की बात कही थी.
बातचीत के बाद सरकार ने कहा था कि 14वीं JPSC और 2023-25 की बैकलॉग भर्तियों से जुड़ी गड़बड़ियों को दो स्तर पर सुलझाया जाएगा.
CID आपराधिक मामलों की जांच करेगी. वित्तीय मामलों और अवैध पैसों के लेन-देन के सबूतों को देखते हुए ED से जांच कराने का अनुरोध किया जाएगा.
इसके बाद उन्होंने कहा था कि फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाया जाएगा और आरोपियों के खिलाफ 90 दिनों के अंदर चार्जशीट दाखिल की जाएगी.
भर्ती परीक्षाओं में ढांचागत सुधारों की छात्रों की मांग पर सरकार ने कहा था कि प्रक्रिया का मार्गदर्शन करने के लिए आईआईटी-आईएसएम, आईआईएम रांची और XLRI के विशेषज्ञों की एक समिति बनाई जाएगी.
हालांकि, प्रदर्शनकारी छात्रों ने कहा था कि जब तक JSSC-CGL परीक्षा का रिजल्ट रद्द नहीं किया जाता और सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की CBI जांच का आदेश नहीं दिया जाता, तब तक वे आंदोलन जारी रखेंगे.
JSSC-CGL परीक्षा रद्द हो चुकी है, लेकिन छात्रों का कहना है कि वे “आखिरी मांग पूरी होने तक पीछे नहीं हटेंगे.”
छात्र नेता रविंद्र पासवान ने मीडिया से कहा, “आज JPSC-JSSC Reform Forum की ओर से हम छात्रों के हित में ऐतिहासिक और साहसिक फैसला लेने के लिए मुख्यमंत्री और राज्य सरकार को धन्यवाद देते हैं. मुख्यमंत्री जी, आपने बहुत साहसिक कदम उठाया है. हमारी सिर्फ एक मांग और है: जिन सभी परीक्षाओं को आप रद्द करने की बात कह चुके हैं और जो हमारी मांगों की चिट्ठी में लिखी हैं, उन सभी में CBI जांच का आदेश दिया जाए. अगर आप CBI जांच का आदेश देते हैं, तो हम सभी छात्र आपके साथ हैं.”
उन्होंने कहा कि पांडे और अंसारी ने छात्रों से आंदोलन खत्म करने की अपील की, लेकिन सरकार ने अभी तक CBI जांच की मांग नहीं मानी है.
उन्होंने जोर देकर कहा, “हम अभी भी CBI जांच की मांग पर कायम हैं. हम मुख्यमंत्री की ओर से दिए गए आश्वासनों, खास तौर पर आधिकारिक नोटिफिकेशन और प्रेस रिलीज का अध्ययन करेंगे, जिनके जारी होने की उम्मीद है. इसके बाद कल हम आपको अपने आंदोलन की रणनीति के बारे में जरूर बताएंगे… हमारी मांग अभी भी यही है कि CBI जांच होनी चाहिए.”
‘राहुल गांधी का शुक्रिया’
अपनी भूख हड़ताल खत्म करने के बाद, देवेंद्र नाथ महतो ने झारखंड सरकार, मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता राहुल गांधी को उनकी “उदारता” के लिए शुक्रिया कहा.
स्टूडेंट लीडर उम्मे हबीबा ने उनकी मांगें सुनने के लिए सरकार और हेमंत सोरेन का शुक्रिया अदा किया.
हबीबा ने कहा, “हमारी सरकार ने साबित कर दिया है कि यह आदिवासियों और मूल निवासियों की सरकार है, और सच में उनके हितों की परवाह करती है. उन्होंने साबित कर दिया है कि ‘हेमंत है तो हिम्मत है’…मैं मुश्किल CGL भर्ती प्रक्रिया को रद्द करने का भरोसा देने और इतना बड़ा फैसला लेने के लिए मुख्यमंत्री का दिल से शुक्रिया अदा करना चाहती हूं.”
उन्होंने आगे कहा, “मैं राहुल गांधी का भी शुक्रिया अदा करना चाहती हूं, जिनके प्रतिनिधि लगातार हमसे मिलकर सपोर्ट और भरोसा देते रहे… मैं इरफान अंसारी और दीपिका पांडे के साथ-साथ जयराम महतो और देवेंद्र महतो समेत सभी का शुक्रिया अदा करती हूं. सभी ने यह लड़ाई लड़ी और अच्छे से लड़ी.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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