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Tuesday, 18 August, 2026
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नितिन नवीन की टीम नड्डा की टीम जितनी ‘युवा’ नहीं, फिर भी RSS और BJP नेता क्यों खुश हैं

BJP नेताओं का कहना है कि कोशिश युवा पीढ़ी की सोच और उम्मीदों को दिखाने के साथ-साथ अनुभवी नेताओं का मार्गदर्शन देने की भी है.

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नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेताओं का कहना है कि पार्टी की नई टीम ‘निरंतरता और बदलाव’ के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करती है. यह टीम युवा पीढ़ी की सोच को दिखाती है और साथ ही संगठन में अनुभव की अहमियत को भी मानती है.

65 सदस्यों वाली इस टीम की औसत उम्र करीब 55 साल है. हालांकि, इसमें 40 साल से कम उम्र के छह सदस्य, 40 से 49 साल की उम्र के 15 सदस्य और 50 से 59 साल की उम्र के 21 सदस्य हैं. यह जानकारी BJP ने दी है.

एक वरिष्ठ पार्टी नेता ने कहा, “इससे पता चलता है कि पार्टी पूरी तरह से युवा नेतृत्व की ओर नहीं जा रही है, बल्कि युवा और अनुभवी नेताओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है. यह नए चेहरों को मौका देने के लिए भी जरूरी है, लेकिन साथ ही अनुभवी नेताओं के जरिए उन्हें पर्याप्त मार्गदर्शन देना भी जरूरी है.”

एक वरिष्ठ BJP नेता ने कहा, “हमने नई टीम में निरंतरता और बदलाव के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है. इसे 2029 के चुनावों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है. इसलिए उस युवा पीढ़ी तक पहुंचना जरूरी है, जो अगले चुनाव में वोट देगी.”

पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन की उम्र सिर्फ 46 साल है. इसलिए कई लोगों को उम्मीद थी कि नई टीम भी उसी तरह युवा होगी. वहीं, पार्टी को युवाओं की उम्मीदों को समझ नहीं पाने के लिए काफी आलोचना का सामना करना पड़ा था. खासकर Gen Z के मामले में, जो नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के केंद्र में थी और बाद में यह प्रदर्शन देश के कई हिस्सों में फैल गया था.

एक वरिष्ठ BJP नेता ने कहा, “ऐसा महसूस किया गया कि हमें ज्यादा से ज्यादा युवा चेहरों को शामिल करने की कोशिश करनी चाहिए, क्योंकि पार्टी अध्यक्ष खुद मिलेनियल हैं. लेकिन साथ ही, कई चर्चाओं के दौरान यह भी कहा गया कि मार्गदर्शन के लिए अनुभवी लोगों की जरूरत होती है. यही वजह है कि नई टीम में युवा और अनुभवी चेहरों का मिश्रण रखा गया है.”

उदाहरण के लिए, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के पूर्व नेता और फिलहाल दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोफेसर डॉ. स्वदेश सिंह को नई BJP टीम में राष्ट्रीय सचिव बनाया गया है. सिंह और अनिल एंथनी (जिन्हें राष्ट्रीय सचिव के पद पर बरकरार रखा गया है) दोनों 40 साल के हैं, जबकि उत्तर प्रदेश की संगीता यादव, जिन्हें राष्ट्रीय सचिव बनाया गया है, और ऋतुराज सिन्हा 45 साल के हैं.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के विचारक और लेखक रतन शारदा ने दिप्रिंट को बताया कि औसत उम्र कम की गई है और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई गई है. जब उनसे कहा गया कि J.P. नड्डा के नेतृत्व वाली टीम वास्तव में नबीन की टीम से अपेक्षाकृत ज्यादा युवा थी, तो शारदा ने कहा कि ज्यादातर पदाधिकारी या तो 40 या 45 साल से कम उम्र के हैं.

उन्होंने समझाया, “कुछ लोग अनुभवी हो सकते हैं और 60 साल से ज्यादा उम्र के भी हो सकते हैं, इसलिए औसत उम्र इतनी आती है, लेकिन यह औसत से कम है, इसलिए हम इस पर बहुत ज्यादा जोर नहीं दे सकते. अगर आप 45 साल से कम उम्र के लोगों और 60 साल से ज्यादा उम्र के कुछ लोगों का अनुपात देखें, तो आपको पता चलेगा कि औसत उम्र एक चीज है. लेकिन कुल मिलाकर, मुझे लगता है कि उस संगठन में युवाओं का अनुपात बहुत ज्यादा है.”

‘अनुभव ज़रूरी’

शारदा ने कहा कि नई टीम में ‘नए तरीके से काम करने और नई ऊर्जा लाने’ पर ध्यान दिया गया है.

उन्होंने कहा, “लेकिन साथ ही अनुभव भी ज़रूरी है. आपको अरुण जेटली जैसे लोगों की जरूरत होती है, जो पूरी टीम को मजबूती देते हैं और अपने अनुभव से उनका मार्गदर्शन कर सकते हैं. मैंने BJP में कई मीडिया लोगों से बात की है. वे बताते थे कि जेटली जी शाम को उनके साथ बैठते थे, उन्हें बताते थे, उनके साथ मजाक करते थे, बताते थे कि उन्होंने क्या सही या गलत किया है और समझाते थे कि चीजों को कैसे आगे बढ़ाना चाहिए. इसलिए जब कुछ अनुभवी लोग इन लोगों का मार्गदर्शन करेंगे, तो ऐसा ही होगा.”

शारदा ने कहा कि इसके बिना, “एक बहुत ताकतवर पार्टी के बहुत ताकतवर दफ्तर में, बहुत शानदार मुख्यालय में बैठना और इन सभी जगहों पर शामिल होना—जो 10 साल पहले की तुलना में अब काफी अलग हैं—बहुत आसानी से किसी को भी बहका सकता है.”

उन्होंने कहा, “मैं ऐसा इसलिए जानता हूं क्योंकि मैंने वहां लोगों को अचानक अपना रुख बदलते और अहंकारी होते देखा है. इसलिए इसे नियंत्रण में रखना जरूरी है. यही वजह है कि कुछ अनुभवी लोगों की जरूरत होती है.”

वरिष्ठ बीजेपी नेता के अनुसार, महासचिवों को बीजेपी में सबसे महत्वपूर्ण पदों में से एक माना जाता है. वे पार्टी से जुड़े नीतिगत फैसले लेते हैं और कई योजनाओं के लिए नियमित समीक्षा बैठकें करते हैं, खासकर चुनावों से पहले योजनाएं बनाने के लिए. आठ महासचिवों में से दो को पद पर बरकरार रखा गया है, जबकि छह नए नाम शामिल किए गए हैं. इनमें स्मृति ईरानी, बिप्लब देब, सतीश पूनिया और हरीश द्विवेदी शामिल हैं.

एक वरिष्ठ BJP नेता ने कहा, “विनोद तावड़े और सुनील बंसल दोनों को राष्ट्रीय महासचिव के तौर पर टीम में बरकरार रखा गया है. तावड़े RSS से आते हैं और लंबे समय तक ABVP के कार्यकर्ता रहे हैं. उन्हें अपने संगठनात्मक कौशल के लिए जाना जाता है. बंसल को पश्चिम बंगाल में बड़ी जीत सुनिश्चित करने के लिए इनाम मिला है, उस समय जब किसी ने इसकी उम्मीद नहीं की थी. ये दोनों और दूसरे नए चेहरे पूरी टीम को जरूरी अनुभव देंगे.”

इसके अलावा, आदिवासी समुदाय से आने वाले गजेंद्र पटेल को महासचिव की जिम्मेदारी दी गई है. पदाधिकारी ने बताया कि राम माधव और स्मृति ईरानी की भी वापसी हुई है और दोनों के पार्टी की गतिविधियों में अहम भूमिका निभाने की संभावना है. एक अन्य नेता ने कहा, “गजेंद्र पटेल 51 साल के हैं, बिप्लब देब 54, स्मृति ईरानी 50 और हरीश द्विवेदी 52 साल के हैं. इसलिए महासचिवों के बीच भी पीढ़ीगत बदलाव करने का ध्यान रखा गया है, लेकिन साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया है कि मार्गदर्शन के लिए अनुभवी चेहरे मौजूद रहें.”

नेता ने कहा, “उत्तर प्रदेश को ज्यादा प्रतिनिधित्व देने का ध्यान रखा गया है, जहां अगले साल चुनाव होने हैं. उत्तर प्रदेश से पूर्व लोकसभा सदस्य हरीश द्विवेदी महासचिव हैं, जबकि युवा नेता और उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य संगीता यादव को राष्ट्रीय सचिव बनाया गया है.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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