नयी दिल्ली, 15 अक्टूबर (भाषा) जल शक्ति मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को विश्व हस्त स्वच्छता दिवस मनाया और कहा कि भारत ने जल जीवन मिशन तथा स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के माध्यम से ग्रामीण समुदायों में पानी के सुरक्षित इस्तेमाल, बेहतर स्वच्छता और साफ-सफाई की अच्छी आदतों की नींव रखी है।
मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि जल जीवन मिशन (जेजेएम) के तहत अब 15.9 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों के पास नल से पेयजल का कनेक्शन है, जबकि स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) (एसबीएम-जी) के तहत 12.24 करोड़ से अधिक घरेलू शौचालयों का निर्माण किया गया है। इस मिशन ने खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) स्थिति को बनाए रखने में भी मदद की है।
मंत्रालय ने कहा, “विश्व हस्त स्वच्छता दिवस जन स्वास्थ्य और कल्याण के एक आवश्यक आधार के रूप में स्वच्छता के प्रति हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता को नए सिरे से मजबूत करने का अवसर है।”
मंत्रालय ने कहा कि ये दोनों पहल देश में जल, स्वच्छता और साफ-सफाई (वॉश) व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा हैं। इस व्यवस्था में बुनियादी ढांचा, जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी मिलकर स्वास्थ्य को लंबे समय तक लाभ पहुंचाते हैं।
मंत्रालय ने कहा, “इस प्रगति को बनाए रखने के लिए स्वच्छता की जरूरी आदतों को लगातार अपनाना आवश्यक है। विशेष रूप से, साबुन से हाथ धोने को रोजमर्रा की आदत बनाना जरूरी है, ताकि संक्रमणों को रोका जा सके, परिवारों की सुरक्षा की जा सके और स्वस्थ, स्वच्छ तथा चुनौतियों का सामना करने में सक्षम समुदायों का निर्माण किया जा सके।”
हर साल 15 अक्टूबर को मनाया जाने वाला विश्व हस्त स्वच्छता दिवस, हाथ धोने को रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाने के महत्व को रेखांकित करता है।
मंत्रालय ने कहा, “2026 का संदेश स्पष्ट है: जागरूकता को कार्रवाई में बदलना होगा और कार्रवाई को आदत बनाना होगा।”
मंत्रालय ने यूनिसेफ के अनुमानों का हवाला देते हुए कहा कि दुनिया भर में हर साल हाथों की अस्वच्छता के कारण दस्त संबंधी बीमारियों से लगभग 3.94 लाख और श्वसन संक्रमणों से 3.56 लाख लोगों की मौत होती है। इन बीमारियों का खतरा बच्चों को विशेष रूप से अधिक है।
भाषा तान्या अविनाश
अविनाश
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.