Friday, 27 May, 2022
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लॉकडाउन में लंबी दूरी तय कर उत्तर प्रदेश में अपने गांव पहुंचे प्रवासी मजदूर काम करने खेतों की तरफ लौटे

दिप्रिंट ने शाहजहांपुर और बरेली के सीमाई इलाके में बीलपुर गांव में कुछ मजदूरों से बात की. इन लोगों ने लॉकडाउन के दौरान अपने अनुभवों को साझा किया.

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बीलपुर/ उत्तर प्रदेश: हजारों प्रवासी मजदूर जो राज्य सरकारों की बसें पकड़कर या साइकिल या पैदल अपने घरों की तरफ लौटे थे उनमें से कई ने अपने खेतों में काम करना शुरू कर दिया है.

कोविड-19 से जुड़ी खबरों को रिपोर्ट करने जब दिप्रिंट राज्यों का सफर कर रहा है तब उत्तर प्रदेश के कुछ मजदूर खेतों में काम करते दिखे.

इनमें से ज्यादातर मजदूर उत्तर प्रदेश और बिहार के थे.

मनरेगा के तहत मजदूरों को इस संकट के दौरान काम मिल सके इसका प्रबंध प्रशासन ने किया है.

दिप्रिंट ने शाहजहांपुर और बरेली के सीमाई इलाके में बीलपुर गांव में कुछ मजदूरों से बात की. इन लोगों ने लॉकडाउन के दौरान अपने अनुभवों को साझा किया.

After reaching home in late March, the workers had quarantined themselves for 14 days and then started working on farmlands | Photo: Jyoti Yadav | ThePrint
मजदूर थककर अपने खेत में बैठा हुआ है. मार्च के अंत में यह अपने घर पहुंचा था जिसके बाद उसने अपने को 14 दिन के लिए क्वारेंटाइन कर लिया. अब वो फिर से अपनी खेती में लग गया | ज्योति यादव/दिप्रिंट
Around 110 workers are on fields near Chakroad | Photo: Jyoti Yadav | ThePrint
चाकरोड के पास 110 लोग खेतों में काम कर रहे हैं जिनमें एक 10 वर्षीय भी शामिल है | ज्योति यादव/दिप्रिंट
The migrant workers have walked hundreds of kilometers. But they still have to work so that they can feed their family | Photo: Jyoti Yadav | ThePrint
खेतों तक पहुंचने के लिए मजदूरों को दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों से हजारों किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ी है. अब वो अपने परिवारों को खिलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं | ज्योति यादव/दिप्रिंट
On the fields there are bottles of sanitisers and special attention is given to social distancing | Photo: Jyoti Yadav | ThePrint
महामारी को रोकने के लिए मजदूरों को हैंड सैनिटाइजर दिया गया है | ज्योति यादव/दिप्रिंट
Ram kumar, 35 years old labourer from Bilpur village, says that hardships are the predominant factor in his life but the only thing that stays constant and never leaves his side is his cycle | Photo: Jyoti Yadav | ThePrint
बीलपुर गांव के 35 वर्षीय राम कुमार के लिए ये एक और संघर्ष है. इस बीच उनकी साइकिल उनकी सबसे बड़ी साथी है | ज्योति यादव/दिप्रिंट

(इस खबर को अंग्रेज़ी में देखने के लिए यहां क्लिक करें)

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