श्रीनगर, छह अक्टूबर (भाषा) जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत मतदाता सूची से नाम हटाए जाने पर सवाल उठाने संबंधी उच्चतम न्यायालय की टिप्पणियों का स्वागत किया।
हालांकि, उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार से जवाब लेने के बाद अदालत इस मामले में किस हद तक सुधार कराती है, यह देखना होगा।
अब्दुल्ला ने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू नहीं की जाएगी, क्योंकि पूरे देश में लागू होने वाले ऐसे कानून पर संसद में बहस होनी चाहिए और उसे वहां पारित किया जाना चाहिए।
उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘यह अच्छी बात है कि उच्चतम न्यायालय अब मतदाता सूची से हटाए गए नामों के मामले में सवाल उठा रहा है। उच्चतम न्यायालय ने निर्वाचन आयोग और भारत सरकार से जवाब भी मांगा है। अदालत के माध्यम से इसमें किस हद तक सुधार होगा, यह हमें इंतजार करके देखना होगा।’’
‘इंडिया’ गठबंधन के सांसदों के निर्वाचन आयोग कार्यालय तक मार्च के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘‘यह प्रक्रिया जारी रहेगी। हम बार-बार यह मुद्दा उठाते रहे हैं, लेकिन बहुत कम लोगों ने इस पर ध्यान दिया। अब मीडिया ने भी इस बारे में बात करना शुरू कर दिया है।’’
यूसीसी लागू किए जाने के सवाल पर अब्दुल्ला ने दोहराया कि समान नागरिक संहिता तब तक वास्तव में ‘समान’ नहीं होगी, जब तक इसे हर जगह लागू नहीं किया जाता।
हालांकि, अब्दुल्ला ने भारत में रह रहे अवैध बांग्लादेशियों और रोहिंग्या शरणार्थियों के बीच अंतर करने की मांग की।
उन्होंने कहा, ‘‘जो लोग बिना अनुमति के बांग्लादेश से आए हैं…., वह पूरी तरह अलग मामला है। लेकिन रोहिंग्याओं को बेवजह निशाना बनाया जा रहा है। जब उन्हें उनके देश से निकाल दिया गया था, तब हमने उन्हें यहां शरण दी, रहने के लिए थोड़ी जगह दी और कुछ समय तक यहां रहने की अनुमति दी, जब तक उनके देश में हालात बेहतर नहीं हो जाते। अब अचानक उनके खिलाफ कार्रवाई करना मुझे कुछ अजीब लगता है।’’
भाषा संतोष मनीषा
मनीषा
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