कोलकाता, 23 सितंबर (भाषा) इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) ने बुधवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय से अनुरोध किया कि वह निर्वाचन आयोग को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के एक धड़े को आवंटित ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न पर रोक लगाने का निर्देश दे।
निर्वाचन आयोग ने हाल में नौशाद सिद्दीकी के नेतृत्व वाले आईएसएफ को ‘लिफाफा’ चिह्न के बजाय ‘अलमारी’ चिह्न आवंटित किया है। आईएसएफ ने 2024 का लोकसभा चुनाव और पश्चिम बंगाल में इस साल अप्रैल में हुआ विधानसभा चुनाव ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न पर लड़ा था।
निर्वाचन आयोग के फैसले को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने वाली आईएसएफ ने सवाल उठाया कि क्या निर्वाचन निकाय ने किसी दूसरी पार्टी को यह चुनाव चिह्न आवंटित करने में अपनी शक्तियों का उचित और तर्कसंगत रूप से इस्तेमाल किया था।
आयोग की ओर से पेश वकील अनामिका पांडे ने दलील दी कि आईएसएफ एक गैर-पंजीकृत राजनीतिक दल है और इसलिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस जैसे मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के विपरीत, इसके पास किसी चुनाव चिह्न को बनाए रखने का अधिकार नहीं है।
उन्होंने कहा कि मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के पास एक विशिष्ट चुनाव चिह्न को बनाए रखने का अधिकार होता है।
पांडे ने अदालत से कहा कि आईएसएफ को ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न केवल दो चुनावों में इस्तेमाल करने के लिए ही आवंटित किया गया था।
आईएसएफ का प्रतिनिधित्व करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता विकास भट्टाचार्य ने दलील दी कि भले ही आईएसएफ एक पंजीकृत पार्टी न हो, लेकिन यह एक मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल है और ‘लिफाफा’ चिह्न के साथ चुनाव लड़ता आ रहा है।
उन्होंने दलील दी कि निर्वाचन आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के भीतर एक आंतरिक विवाद का फैसला करते हुए, विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाली ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ को ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न आवंटित कर दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या शक्ति का इस तरह इस्तेमाल करना उचित था।
निर्वाचन आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों को पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा क्षेत्रों में छह अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव में पार्टी के नाम और ‘जोड़ा फूल’ चुनाव चिह्न का इस्तेमाल न करने का 17 सितंबर को निर्देश दिया था।
भट्टाचार्य ने अदालत से अनुरोध किया कि वह निर्वाचन आयोग को निर्देश दे कि वह किसी ऐसे चुनाव में किसी अन्य अपंजीकृत पार्टी को ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न आवंटित न करे, जिसमें दोनों पार्टियां चुनाव लड़ रही हों।
उन्होंने अनुरोध किया कि भारत निर्वाचन आयोग ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगा दे और इसे दोनों में से किसी भी दल को न दे।
अदालत ने निर्वाचन आयोग के वकील के अनुरोध पर मामले की सुनवाई एक दिन के लिए स्थगित कर दी।
अदालत ने निर्देश दिया कि इस मामले पर बृहस्पतिवार को दोबारा सुनवाई की जाए।
नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा क्षेत्रों के उपचुनाव छह अक्टूबर को निर्धारित हैं, जबकि चुनाव प्रचार चार अक्टूबर को समाप्त होगा।
आईएसएफ ने नंदीग्राम निर्वाचन क्षेत्र में अपना उम्मीदवार उतारा है।
भाषा
देवेंद्र अविनाश
अविनाश
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