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Wednesday, 15 April, 2026
होमदेशनोएडा में हिंसक प्रदर्शन के बाद औद्योगिक इकाइयां पटरी पर लौटी, पुलिस ने किया ‘फ्लैग मार्च’

नोएडा में हिंसक प्रदर्शन के बाद औद्योगिक इकाइयां पटरी पर लौटी, पुलिस ने किया ‘फ्लैग मार्च’

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नोएडा, 15 अप्रैल (भाषा) उत्तर प्रदेश के नोएडा स्थित विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में बीते एक सप्ताह से जारी हिंसक धरना प्रदर्शन के बाद बुधवार को अधिकतर इकाइयां खुल गईं और वहां कामगार काम करने के लिए आए।

क्षेत्र में शैक्षणिक संस्थान भी खुल गए हैं।

पुलिस द्वारा की जा रही गिरफ्तारियों के बीच कई कंपनी में बहुत कम कामगार आए और अधिकतर श्रमिकों को यह डर सता रहा है कि कहीं उन्हें उपद्रवी मानकर गिरफ्तार न कर लिया जाए।

मिक अपनी मांगों को लेकर सुबह कुछ स्थानों पर इकट्ठा होना शुरू हुए, जिन्हें पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने समझा-बुझाकर वापस काम पर भेज दिया। किसी के भी हिंसक होने के प्रयास किए जाने पर पुलिस ने हिरासत में लिए जाने की चेतावनी दी।

यहां के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों के वेतन में 21 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित की गई उच्च स्तरीय समिति की संस्तुति के बाद मंगलवार को की गई।

इस पहल से कई श्रमिक संतुष्ट हैं जबकि कुछ श्रमिक इससे असंतुष्ट है। वहीं बुधवार सुबह से ही पूरे क्षेत्र में पुलिस अधिकारी गश्त पर रहे।

पुलिस ने जगह-जगह ‘‘फ्लैग मार्च’’ निकाला और संवेदनशील क्षेत्रों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।

नोएडा के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्र में हिंसक प्रदर्शन से बेपटरी हुई व्यवस्थाओं को पटरी पर लाने के लिए शासन-प्रशासन सख्ती से निपट रहा है।

जगह-जगह अर्धसैनिक बलों के साथ चौकियां स्थापित कर पुलिस के जवान तैनात किए गए हैं, जबकि संवेदनशील इलाकों में पुलिस आयुक्त और जिलाधिकारी व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे हैं।

नोएडा में बुधवार को करीब 11,098 औद्योगिक इकाइयां और शैक्षणिक संस्थान खुले। कुछ शैक्षणिक संस्थानों पर सुबह मजदूरों ने फिर से विरोध प्रदर्शन किया, जिन्हें पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने समझा-बुझाकर वापस काम पर भेज दिया।

पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह और जिलाधिकारी मेधा रूपम ने श्रमिकों समेत छात्र-छात्राओं के अभिभावकों को सुरक्षा का पूरा भरोसा दिया है।

वेतन समेत अन्य मांगों को लेकर नोएडा औद्योगिक क्षेत्र के श्रमिकों का करीब एक सप्ताह से जारी विरोध प्रदर्शन हिंसा में बदल गया था और आंदोलन के दौरान उपद्रव की घटनाएं भी सामने आईं थीं।

इस दौरान करीब 500 औद्योगिक इकाइयों में तोड़फोड़ की गई, सड़क पर खड़े वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया और कुछ वाहनों को आगे के हवाले कर दिया गया।

इस उपद्रव से उद्यमियों में दहशत फैल गई, जिसके बाद औद्योगिक संगठनों ने शासन प्रशासन पर दबाव बनाया और ऐलान किया गया था कि जब तक सुरक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं होगी, तब तक इकाइयों का संचालन पूरी तरह बंद रखा जाएगा।

भाषा सं मनीषा यासिर

मनीषा

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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