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Monday, 9 March, 2026
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भारत में चीता की संख्या 50 के पार, कुनो में ज्वाला ने 5 शावकों को जन्म दिया

पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि भारतीय शावकों का जन्म भारत के प्रोजेक्ट चीता के लिए एक महत्वपूर्ण पल है.

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नई दिल्ली: केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने घोषणा की कि नामीबिया में जन्मी चीता ज्वाला ने 9 मार्च को पांच शावकों को जन्म दिया है, जिसके बाद भारत में चीतों की संख्या अब 50 से ज्यादा हो गई है. कुनो नेशनल पार्क में जन्मे ये शावक भारत के प्रोजेक्ट चीता के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हैं.

यादव ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “प्रोजेक्ट चीता के लिए गर्व का पल है, क्योंकि नामीबियाई चीता ज्वाला, जो तीसरी बार मां बनी है, ने आज कुनो नेशनल पार्क में पांच शावकों को जन्म दिया.”

इन शावकों के जन्म के बाद भारत में जन्मे चीता शावकों की संख्या 33 हो गई है. यह भारत में चीता का दसवां सफल लिटर (एक साथ जन्मे शावकों का समूह) भी है.

28 फरवरी को प्रोजेक्ट चीता को और मजबूती मिली जब बोत्सवाना से नौ चीते मध्य प्रदेश लाए गए. इस नए समूह में छह मादा और तीन नर चीते थे, जिन्हें भारतीय वायुसेना के विमान से 10 घंटे से ज्यादा की उड़ान में लाया गया.

पर्यावरण मंत्री ने कहा कि इन भारतीय शावकों के जन्म के बाद भारत में चीतों की कुल संख्या 53 हो गई है.

यादव की पोस्ट में कहा गया, “यह उपलब्धि पशु चिकित्सकों, फील्ड स्टाफ और सभी जुड़े लोगों की मेहनत, कौशल और समर्पण को दिखाती है, जो जमीन पर लगातार काम कर रहे हैं.”

भारत का प्रोजेक्ट चीता

भारत में प्रोजेक्ट चीता की शुरुआत सितंबर 2022 में हुई थी, जब पहला समूह—आठ चीते (पांच मादा और तीन नर) नामीबिया से लाए गए थे.

फरवरी 2023 में 12 चीतों का एक और समूह लाया गया. यह समझौता केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) और दक्षिण अफ्रीका की सरकार के बीच हुए एक समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत हुआ था.

भारत में इस बिग कैट प्रजाति के जानवर को फिर से बसाने की प्रक्रिया पूरी तरह आसान नहीं रही. नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से भारत लाए गए 20 चीतों में से नौ वयस्क चीते अलग-अलग कारणों से भारत में मर गए. भारत में जन्मे 10 शावकों की भी बचपन में मौत हो गई.

हालांकि, अधिकारियों को उम्मीद है कि इन चुनौतियों के बावजूद चीतों का नया समूह प्रोजेक्ट चीता को आगे बढ़ाने में जरूरी मदद देगा.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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