नयी दिल्ली, 27 फरवरी (भाषा) भारतीय युवाओं ने मानसिक स्वास्थ्य भागफल (एमएचक्यू) स्कोर में खराब प्रदर्शन किया है और जारी एक वैश्विक मानसिक स्वास्थ्य अध्ययन में शामिल 84 देशों में उनका स्थान 60वां रहा है।
अमेरिका स्थित सैपियन लैब्स द्वारा किए गए अध्ययन ‘ग्लोबल माइंड हेल्थ इन 2025’ से यह भी बात सामने आयी है कि 18-34 आयु वर्ग के भारतीय युवाओं ने ना केवल वैश्विक स्तर पर खराब प्रदर्शन किया है, बल्कि 55 वर्ष से अधिक आयु के भारतीयों की तुलना में मानसिक स्वास्थ्य मापदंडों पर भी उनका प्रदर्शन खराब रहा है। 55 वर्ष से अधिक आयु के भारतीयों का 49वां स्थान रहा है।
अध्ययन के अनुसार, भारत में युवाओं का औसत एमएचक्यू स्कोर लगभग 33 था, जिसे ‘तनावग्रस्त या संघर्षरत’ श्रेणी के अंतर्गत परिभाषित किया गया है, जबकि 55 वर्ष से अधिक आयु वालों का औसत लगभग 100 था, जो ‘प्रबंधन या सफलता’ श्रेणी को दर्शाता है।
सैपियन लैब्स संस्थापक और मुख्य वैज्ञानिक तारा त्यागराजन ने रिपोर्ट में कहा, ‘जब से हमने 2019 में मापन शुरू किया है, 55 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों का मानसिक स्वास्थ्य लगातार लगभग 100 के स्कोर पर बना हुआ है, जो कि सामान्य आबादी के मानसिक स्वास्थ्य की अपेक्षित सीमा है। दूसरी ओर, 35 वर्ष से कम आयु के युवा, जो कोविड-19 महामारी से पहले ही अपने माता-पिता और दादा-दादी की तुलना में संघर्ष कर रहे थे, महामारी के दौरान उनकी स्थिति में तेजी से गिरावट आई, जिससे वे अभी तक उबर नहीं पाए हैं।’
भौगोलिक दृष्टि से, सभी देशों में 18-34 आयु वर्ग के लोगों की स्थिति अधिक आयु के वयस्कों की तुलना में खराब रही। जिन देशों में मानसिक स्वास्थ्य अपेक्षाकृत बेहतर है, वे मुख्य रूप से उप-सहारा अफ्रीका में स्थित हैं और इनमें घाना, नाइजीरिया, जिम्बाब्वे, केन्या और तंजानिया शामिल हैं। सबसे निचले पायदान पर जापान, ताइवान, हांगकांग, ब्रिटेन और चीन हैं।
भाषा अमित रंजन
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