नई दिल्ली: खुद को भारतीय नागरिक बताने वाला 30 साल के आसपास का एक व्यक्ति पिछले दो हफ्तों से मलेशिया के कुआलालंपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर फंसा हुआ है. उसे दिल्ली में इसलिए प्रवेश नहीं दिया गया क्योंकि वह वैध भारतीय पासपोर्ट नहीं दिखा सका.
उस व्यक्ति ने अपना नाम आकाश बताया है और कहा है कि वह पंजाब के जालंधर का रहने वाला है. पिछले महीने दिल्ली एयरपोर्ट पर भारतीय इमिग्रेशन अधिकारियों ने उसे इसलिए वापस लौटा दिया क्योंकि उन्होंने न्यूजीलैंड द्वारा शरण मांगने वालों को जारी किए जाने वाले पहचान पत्र को भारत में प्रवेश के लिए वैध यात्रा दस्तावेज मानने से इनकार कर दिया.
भारतीय सुरक्षा तंत्र से जुड़े सूत्रों ने दिप्रिंट को बताया कि उसे ऑकलैंड जाने वाली मलेशिया एयरलाइंस की फ्लाइट में बैठा दिया गया, लेकिन कुआलालंपुर में ठहराव के दौरान वह वहीं फंस गया, क्योंकि न भारत और न ही न्यूजीलैंड उसे स्वीकार करने को तैयार था.
सूत्रों के मुताबिक, ऐसा लगता है कि आकाश पहले भारत से भागकर न्यूजीलैंड गया था और उसने अपनी जान को खतरा बताते हुए वहां शरण मांगी थी. हालांकि उसे औपचारिक रूप से शरणार्थी का दर्जा मिला था या नहीं, यह साफ नहीं है.
एक सूत्र ने शनिवार को कहा, “वह न्यूजीलैंड सरकार द्वारा जारी किए गए पहचान पत्र के जरिए भारत में प्रवेश करना चाहता था. जब उससे भारतीय पासपोर्ट दिखाने को कहा गया तो उसने कहा कि उसका पासपोर्ट खो गया है. किसी को भी वैध यात्रा दस्तावेज के बिना भारत में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा सकती.”
न्यूजीलैंड का सर्टिफिकेट ऑफ आइडेंटिटी एक यात्रा दस्तावेज है, जिसे वहां का डिपार्टमेंट ऑफ इंटरनल अफेयर्स उन गैर-नागरिकों को जारी करता है जो अपने देश से पासपोर्ट नहीं ले सकते. न्यूजीलैंड इमिग्रेशन वेबसाइट के मुताबिक, यह दस्तावेज धारक को न्यूजीलैंड छोड़ने और वापस लौटने की अनुमति देता है. इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से शरणार्थियों, बिना नागरिकता वाले लोगों या ऐसे निवासियों के लिए होता है जो राष्ट्रीय पासपोर्ट हासिल नहीं कर सकते.
वेबसाइट पर कहा गया है, “सर्टिफिकेट ऑफ आइडेंटिटी ऐसे व्यक्ति को जारी किया जा सकता है जो न्यूजीलैंड का नागरिक नहीं है और अपने नागरिकता वाले देश से पासपोर्ट हासिल नहीं कर सकता.” वेबसाइट के मुताबिक यह प्रमाणपत्र दो साल तक वैध रहता है और इसे रखने से व्यक्ति की राष्ट्रीयता या नागरिकता की स्थिति पर कोई असर नहीं पड़ता.
ऊपर बताए गए सूत्र ने कहा कि आकाश ने दिल्ली पहुंचने पर यह नहीं बताया था कि उसने न्यूजीलैंड में शरण मांगी थी या उसे शरण मिली थी. सूत्र ने कहा, “इसके बाद उसे मलेशिया एयरलाइंस की फ्लाइट से वापस न्यूजीलैंड भेज दिया गया.”
सूत्र ने आगे कहा, “उसे इसलिए वापस भेजा गया क्योंकि उसके पास वैध पासपोर्ट नहीं था. सही यात्रा दस्तावेजों के बिना अधिकारी कैसे तय कर सकते हैं कि वह वास्तव में भारतीय नागरिक है या कोई और? इमिग्रेशन क्लियर करने के लिए वैध पासपोर्ट होना जरूरी है.”
‘मैं फर्श पर सो रहा हूं’
यह मामला तब सामने आया जब कुआलालंपुर से आकाश द्वारा जारी किया गया एक वीडियो ऑनलाइन वायरल हुआ. वीडियो में उसने कहा कि वह आठ दिनों से एयरपोर्ट पर फंसा हुआ है और भारतीय अधिकारियों से मदद की अपील की. उसने कहा कि उसके पास पैसे, खाना, सामान या कपड़े बदलने तक के लिए कुछ नहीं है. उसने कहा कि वह न्यूजीलैंड वापस नहीं जा सकता क्योंकि उसके पास वहां का वैध वीजा नहीं है.
भारत लौटने के अपने फैसले के बारे में बताते हुए आकाश ने कहा कि न्यूजीलैंड में उसकी स्थिति खराब हो गई थी और उसके पिता बीमार हो गए थे.
उसने कहा, “मैं हमेशा के लिए वापस आ रहा था. मेरे कागज पूरे नहीं हुए थे और कुछ भी ठीक नहीं चल रहा था. मेरे पिता भी बीमार थे, इसलिए मैंने घर लौटने का फैसला किया. 23 अप्रैल को मैंने फ्लाइट ली और 24 अप्रैल को पहुंचा. मेरा पासपोर्ट खत्म हो चुका था क्योंकि मेरे दस्तावेज तैयार नहीं थे. मैंने न्यूजीलैंड में ट्रैवल डॉक्यूमेंट बनवाया और वापस आ गया. लेकिन जब मैं पहुंचा तो उन्होंने मुझे अंदर आने से मना कर दिया.”
उसने आरोप लगाया कि भारतीय इमिग्रेशन अधिकारियों ने उसकी पहचान की जांच के लिए उसे दिल्ली एयरपोर्ट पर दो दिनों तक रोके रखा और फिर वापसी की फ्लाइट में बैठा दिया. अधिकारियों ने उससे कहा कि भारत में प्रवेश के लिए जरूरी दस्तावेज चाहिए. उसने कहा कि वह बार-बार बता रहा था कि उसके पास न्यूजीलैंड लौटने के लिए वैध वीजा नहीं है.
उसने कहा, “मैंने उनसे कहा कि मेरे पास न्यूजीलैंड का वीजा नहीं है, लेकिन उन्होंने जबरदस्ती मुझे मलेशिया की फ्लाइट में बैठा दिया. मैंने यहां मलेशिया में भारतीय हाई कमीशन से बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड जाओ और दस्तावेज बनवाओ. मुझे समझ नहीं आ रहा क्या करूं. कृपया मेरी मदद करें. मैं फर्श पर सो रहा हूं. मैंने खाना नहीं खाया है. मेरे पास कपड़े या कंबल तक नहीं है. मैं यहां फंसा हुआ हूं और अपने परिवार के पास घर लौटने के लिए परेशान हूं.”
सुरक्षा तंत्र से जुड़े एक अन्य सूत्र ने कहा कि इस मामले का एक साफ समाधान मौजूद है. अगर आकाश मलेशिया स्थित भारतीय हाई कमीशन से भारतीय पासपोर्ट बनवाने में सफल हो जाता है, तो उसे भारत में प्रवेश दिया जा सकता है.
सूत्र ने कहा कि प्रक्रिया चल रही है और आकाश जल्द भारत लौट सकता है.
दिप्रिंट ने न्यूजीलैंड इमिग्रेशन को ईमेल भेजकर उस व्यक्ति के वहां के वीजा की स्थिति के बारे में जानकारी मांगी है. जवाब मिलने पर खबर को अपडेट किया जाएगा.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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