नयी दिल्ली, 25 अगस्त (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को कहा कि भारत को एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) प्रणाली, ‘जन धन’ और आधार जैसी पहलों में अपने अनुभव फिजी के साथ साझा करने में खुशी होगी।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारी आधुनिक और बहुआयामी साझेदारी के हिस्से के रूप में, भारत को फिजी के सामाजिक-आर्थिक विकास में भागीदार बनने का सौभाग्य प्राप्त है, जिसमें स्वास्थ्य, क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण तथा जलवायु लचीलापन जैसी फिजी की प्राथमिकताओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।’’
मुर्मू ने यह बात फिजी के प्रधानमंत्री सिटिवेनी लिगाममादा राबुका और उनके प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक के दौरान कही, जिन्होंने यहां राष्ट्रपति भवन में मुर्मू से मुलाकात की थी।
राष्ट्रपति ने कहा कि क्षमता निर्माण हमेशा से भारत और फिजी के बीच संबंधों का एक महत्वपूर्ण स्तंभ रहा है, जिसमें भारतीय संस्थानों में फिजी के अधिकारियों के लिए भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग (आईटीईसी) प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शामिल हैं।
राष्ट्रपति कार्यालय की तरफ से बताया गया कि उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीकों ने भारत में वित्तीय समावेशन में क्रांति ला दी है और नयी दिल्ली को यूपीआई भुगतान प्रणाली, ‘जन धन’ तथा आधार जैसी पहलों में अपने अनुभव फिजी के साथ साझा करने में प्रसन्नता होगी।
मुर्मू ने कहा कि भारत प्रशांत द्वीपीय देशों (पीआईसीएस) के साथ अपने संबंधों और विकास के लिए साझेदारी को मजबूत करने के वास्ते प्रतिबद्ध है, जिनमें फिजी एक विशेष साझेदार बना हुआ है।
उन्होंने कहा कि फिजी में एक सुपर-स्पेशलिटी अस्पताल की स्थापना के लिए आज एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जो स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के हमारे साझा दृष्टिकोण में एक मील का पत्थर है।
भारत और फिजी के बीच लंबे समय से जारी संबंधों को रेखांकित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि गिरमिटिया समुदाय का योगदान न केवल हमारे मजबूत आपसी संबंधों को बनाए रखने में महत्वपूर्ण रहा है, बल्कि फिजी की बहुसांस्कृतिक पहचान, विविध समाज और अर्थव्यवस्था को आकार देने में भी इसकी अहम भूमिका रही है।
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प्रशांत नेत्रपाल
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