नयी दिल्ली, 11 मार्च (भाषा) महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र के एक कार्यक्रम में महिला नेतृत्व वाले विकास की दिशा में भारत की प्रगति को रेखांकित किया और लैंगिक समानता को आगे बढ़ाने तथा न्याय तक पहुंच को मजबूत करने के लिए देश की प्रतिबद्धता जताई।
महिलाओं की स्थिति पर आयोग के 70वें सत्र (सीएसडब्ल्यू-70) में मंगलवार को सामान्य चर्चा के दौरान भारत का राष्ट्रीय वक्तव्य देते हुए ठाकुर ने कहा कि “सबका साथ, सबका विकास” का देश का मूलमंत्र समावेशी विकास की उसकी सोच का मार्गदर्शन करता रहा है।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, उन्होंने कहा कि लगभग 90 लाख स्वयं सहायता समूहों की 10 करोड़ से अधिक महिलाओं ने जमीनी स्तर पर नेतृत्व और उद्यमिता को बढ़ावा देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदल दिया है।
मंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि ‘अटल इन्क्यूबेशन सेंटर योजना’ के तहत समर्थित 1,000 से अधिक स्टार्टअप का नेतृत्व महिलाएं कर रही हैं, जबकि आठ लाख से अधिक महिला निदेशक सक्रिय भारतीय कंपनियों से जुड़ी हुई हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान (पीएम-दिशा) के तहत 25 लाख से अधिक ग्रामीण महिलाओं को डिजिटल सेवाओं में प्रशिक्षित किया गया है, जिससे लैंगिक डिजिटल असमानता को पाटने में मदद मिली है।
ठाकुर ने कहा कि निरंतर नीतिगत हस्तक्षेपों ने भारत की महिला श्रम बल भागीदारी दर को 41.7 प्रतिशत तक बढ़ाने में योगदान दिया है।
सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की भागीदारी पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटों के आरक्षण का प्रावधान करता है, जबकि 14 लाख से अधिक महिलाएं — जो सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों का लगभग 46 प्रतिशत हैं — पंचायती राज संस्थाओं में सेवाएं दे रही हैं।
भाषा आशीष सुरेश
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