नयी दिल्ली, 11 मार्च (भाषा) अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने बुधवार को कहा कि भारत कच्चे तेल के सबसे बड़े उपभोक्ताओं और प्रसंस्करणकर्ताओं में से एक है और ऊर्जा बाजार की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए दोनों देशों का ‘‘मिलकर’’ काम करना आवश्यक है।
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई जब कांग्रेस सरकार पर दबाव बनाए हुए है और आरोप लगा रही है कि वाशिंगटन भारत की ऊर्जा नीति को प्रभावित करता है।
पश्चिम एशिया में संकट के बाद ऊर्जा बाजार में उत्पन्न व्यवधानों को देखते हुए, अमेरिका द्वारा भारतीय रिफाइनरियों को रूसी कच्चे तेल की खरीद के लिए 30 दिन की छूट प्रदान करने के बाद से विपक्षी दल सरकार को निशाना बना रहा है।
अमेरिकी राजदूत ने कहा, ‘‘भारत विश्वभर में तेल की कीमतों को स्थिर बनाए रखने में एक महत्वपूर्ण भागीदार रहा है। अमेरिका इस बात को स्वीकार करता है कि रूस से तेल की निरंतर खरीद इसी प्रयास का एक हिस्सा है।’’
उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा, ‘‘भारत तेल के सबसे बड़े उपभोक्ताओं और प्रसंस्करणकर्ताओं में से एक है और अमेरिकियों और भारतीयों के लिए बाजार की स्थिरता के लिए अमेरिका और भारत का मिलकर काम करना आवश्यक है।’’
कांग्रेस ने भारत को रूस से तेल की खरीदने की ‘‘अस्थायी रूप से अनुमति दिए जाने’’ संबंधी अमेरिका के नये बयान को लेकर बुधवार को कटाक्ष करते हुए कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए ‘‘आत्मसमर्पण का प्रमाणपत्र’’ है।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के साथ जारी संघर्ष के बीच ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भारत को समुद्र में पोत पर पहले से मौजूद रूसी तेल ‘‘स्वीकार’’ करने की ‘‘अनुमति अस्थायी रूप से’’ दी है और इस अल्पकालिक कदम से रूस को कोई बड़ा वित्तीय लाभ नहीं होगा।
भाषा
देवेंद्र पवनेश
पवनेश
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