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Wednesday, 16 September, 2026
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मणिपुर में जातीय संघर्ष की दिशा बदली. नई सरकार के बाद से कुकी-जो और नगा संघर्ष में 27 लोगों की मौत

मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह के नेतृत्व वाली नई बीजेपी सरकार ने फरवरी में कार्यभार संभाला. मई 2023 में शुरू हुआ संघर्ष अब तक ज्यादातर कुकी-जो और मैतेई के बीच हिंसा के लिए जाना जाता था.

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नई दिल्ली: इस साल मणिपुर में नई सरकार के आने के बाद राज्य में जातीय संघर्ष ने नया रूप ले लिया है और इसकी दिशा भी बदली है. मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह के नेतृत्व वाली नई भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सरकार के 4 फरवरी को कार्यभार संभालने के बाद से कुकी-जो और नगा समुदायों के बीच हुई झड़पों में कम से कम 27 लोगों की मौत हो चुकी है और 100 से ज्यादा घर जला दिए गए हैं. सबसे ताज़ा घटना मंगलवार को हुई, जब दो कुकी महिलाओं को अज्ञात लोगों ने गोली मार दी.

एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद एक साल तक राष्ट्रपति शासन रहा. इसके बाद युमनाम खेमचंद सिंह मुख्यमंत्री बने. नई सरकार बनने के बाद कुकी-जो और नगा समुदायों के बीच एक नया जातीय संघर्ष शुरू हो गया. मई 2023 में शुरू हुआ जातीय संघर्ष अब तक ज्यादातर कुकी-जो और मैतेई समुदायों के बीच हिंसा के लिए जाना जाता था.

हिंसा की पहली घटना राज्य में नई सरकार बनने के तीन दिन बाद मणिपुर के उखरुल जिले के लिटान सारेइखोंग इलाके में सामने आई. 7 फरवरी को कुकी-जो समुदाय के लोगों के एक समूह ने कथित तौर पर एक तांगखुल व्यक्ति के साथ मारपीट की.

अगली दोपहर स्थिति और बिगड़ गई, जब नगा गांवों के लोग लिटान सारेइखोंग गांव के प्रमुख के पास पहुंचे और मांग की कि आरोपियों को उनके सामने पेश किया जाए. उस शाम पथराव में कुछ लोग घायल हो गए, जिनमें एक पुलिस अधिकारी भी शामिल था. इसके बाद आगजनी की घटना हुई, जिसमें एक सशस्त्र समूह के सदस्यों ने कथित तौर पर गोलियां चलाईं. 8 और 9 फरवरी को स्थिति और बिगड़ गई, जब दोनों आदिवासी समुदायों—कुकी-जो और नगा ने लगातार दो दिनों तक एक-दूसरे के घरों में आग लगा दी.

इस घटना में कई लोग घायल हुए, जिन्हें इम्फाल के रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज ले जाया गया. उखरुल के जिला मजिस्ट्रेट आशीष दास ने तब मीडिया को बताया था कि 8 फरवरी को सुबह होने से पहले दोनों समुदायों के लोगों ने पांच से छह घरों में आग लगा दी थी. उन्होंने कहा, “तेज हवा के कारण आग फैल गई और 20 घर जल गए.”

इसके बाद 7 अप्रैल को मणिपुर के बिष्णुपुर जिले में बम हमले के बाद दो बच्चे—पांच साल के एक लड़के और छह महीने की एक बच्ची की मौत हो गई और उनकी मां घायल हो गई. पुलिस ने बताया कि घटना रात 1 बजे हुई, जब उग्रवादियों ने मोइरांग ट्रोंगलाओबी इलाके के एक घर पर बम फेंका. उस समय दोनों बच्चे और उनकी मां सो रहे थे.

इसके बाद इम्फाल घाटी के अलग-अलग इलाकों में स्थानीय लोगों ने कई विरोध प्रदर्शन किए. इस दौरान ट्रोंगलाओबी के पास एक भीड़ ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवानों पर हमला कर दिया और आरोप लगाया कि बल घाटी के लोगों की सुरक्षा करने में नाकाम रहा. इसके बाद पुलिस ने गोलीबारी की. इसमें कम से कम तीन लोगों की मौत हुई और करीब 30 लोग घायल हुए.

13 मई को चुराचांदपुर से कांगपोकपी जा रहे कुकी समुदाय के तीन चर्च नेताओं और उनके ड्राइवर की घात लगाकर किए गए हमले में हत्या कर दी गई. इस हमले में एक सक्रिय नगा उग्रवादी समूह, जेलियांग्रोंग यूनाइटेड फ्रंट (ZUF) के संदिग्ध उग्रवादियों का हाथ माना गया. इसके बाद कुकी समुदाय ने 20 नगा लोगों को बंधक बना लिया, जबकि नगा समुदाय ने 28 कुकी लोगों को बंधक बना लिया.

करीब एक महीने बाद, 10 जून को कुकियों के कब्जे में रखे गए नगा बंधकों में से छह लोगों के क्षत-विक्षत शव मणिपुर के कांगपोकपी जिले में सुरक्षा बलों को मिले. इससे दोनों समुदायों के बीच फिर से हिंसा भड़क गई.

1 और 2 जुलाई के बीच कुकी और नगा गांवों से आगजनी की कई घटनाओं की खबरें सामने आईं. 1 जुलाई को कुकी गांव फाइमोल और तांगखुल नगा गांव शांगखालोक में कम से कम 29 घरों में आग लगा दी गई. उसी दिन तीसरी घटना तांगखुल नगा गांव हुइमाइन थाना से सामने आई, जहां कई घरों में आग लगा दी गई. एक दिन बाद नोनई जिले के एक कुकी गांव में कई घरों में आग लगा दी गई.

लगातार बढ़ती हिंसा के बीच 24 अगस्त को फिर हिंसा की खबर सामने आई. कई घरों में आग लगा दी गई और गोलीबारी की एक घटना में 54 साल का एक अर्धसैनिक जवान घायल हो गया. इसके तीन दिन बाद, मणिपुर के कुकी बहुल कांगपोकपी जिले में मकुई अशांग और थानाम्बा नगा गांवों के बीच अज्ञात बंदूकधारियों ने घात लगाकर चार नगा नागरिकों की हत्या कर दी. 31 अगस्त को कांगपोकपी जिले में आईटी रोड के पास अज्ञात लोगों की गोलीबारी में कम से कम तीन लोगों की मौत हुई और चार अन्य घायल हो गए. कांगपोकपी के पुलिस अधीक्षक (SP) अभिनव ने दिप्रिंट को यह जानकारी दी.

इन्फोग्राफिक: मान्या अग्रवाल/दिप्रिंट
इन्फोग्राफिक: मान्या अग्रवाल/दिप्रिंट

13 सितंबर को अज्ञात बंदूकधारियों ने दो अलग-अलग घटनाओं में कुकी-जो समुदाय के चार नागरिकों की हत्या कर दी, जिनमें दो महिलाएं भी थीं. हालांकि किसी सशस्त्र समूह ने इन हमलों की जिम्मेदारी नहीं ली, लेकिन कुकी-जो संगठनों ने हमलों के लिए नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालिम यानी NSCN (इसाक-मुइवा) और ZUF को जिम्मेदार ठहराया.

पहला हमला कथित तौर पर तमेंगलोंग जिले के टोलेन गांव में सुबह करीब 4 बजे किया गया. सीनह सिंगसिट और उनकी पत्नी लिंगजंगाई की हत्या कर दी गई, जबकि उनका छह साल का बेटा घायल हो गया. महिला की मौके पर ही मौत होने की बात कही गई, जबकि उसके पति ने पास के अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. नाबालिग का इलाज चल रहा है. बताया गया है कि उसके शरीर के अंदर गोली फंसी हुई है.

वहीं, दूसरी घटना नोनई जिले के लॉन्गपी गांव में दोपहर करीब 3 बजे हुई. स्थानीय लोगों ने बताया कि बंदूकधारियों ने चावल ले जा रहे तीन लोगों पर घात लगाकर हमला किया और उनमें से दो की मौके पर ही हत्या कर दी. मृतकों की पहचान जूली गांगते और थांग्रोएल गांगते के रूप में हुई. तीसरे व्यक्ति, एक महिला, के लापता होने की खबर है.

पुलिस ने बताया कि 15 सितंबर को अज्ञात बंदूकधारियों ने दोपहर करीब 3 बजे लेइसांगफाई गांव में दो कुकी महिलाओं को गोली मार दी. उनकी पहचान फालनेइचिंग उर्फ चोंगा सितलहौ (78) और किमजालहिंग उर्फ किमनियो सिंगसोन (28) के रूप में हुई. सूत्रों के मुताबिक, सितलहौ लकड़ी इकट्ठा कर रही थीं, तभी हमलावरों ने उन पर गोली चला दी. वहीं, सिंगसोन नर्सिंग का कोर्स पूरा करने के बाद खेती में अपने माता-पिता की मदद करने के लिए घर लौटी थीं. उन्हें भी उसी जगह गोली मारकर हत्या कर दी गई.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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