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Saturday, 16 May, 2026
होमहेल्थपरीक्षा विकेंद्रीकरण और फास्ट-ट्रैक कोर्ट—NEET लीक के बाद IMA ने शिक्षा मंत्री को लिखा पत्र

परीक्षा विकेंद्रीकरण और फास्ट-ट्रैक कोर्ट—NEET लीक के बाद IMA ने शिक्षा मंत्री को लिखा पत्र

IMA ने बताया कि पिछले चार वर्षों में यह परीक्षा दो बार रद्द की जा चुकी है, और साथ ही यह भी कहा कि इन विवादों का असर परीक्षार्थियों की पूरी एक पीढ़ी पर पड़ा है.

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नई दिल्ली: NEET-UG 2026 को बड़े स्तर पर प्रश्न पत्र लीक होने के आरोपों के बाद रद्द किए जाने के बाद, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के सामने नौ मांगें रखीं हैं. इनमें परीक्षा का विकेंद्रीकरण, फास्ट-ट्रैक अदालतों की स्थापना और पेपर लीक के जिम्मेदार लोगों को कड़ी सजा सुनिश्चित करना शामिल है.

डॉक्टरों की सर्वोच्च संस्था के रूप में, IMA ने कहा कि पिछले चार वर्षों में पेपर लीक और अनियमितताओं के कारण यह परीक्षा दो बार रद्द हो चुकी है. संस्था ने कहा कि पूरे देश में एक ही चरण में, एक ही दिन, फिजिकल प्रश्न पत्रों के माध्यम से राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (स्नातक) आयोजित करना अब व्यावहारिक नहीं रह गया है.

एक पत्र में, IMA के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनिलकुमार जे. नायक ने लिखा कि बार-बार होने वाले विवादों ने अभ्यर्थियों की पूरी पीढ़ी को प्रभावित किया है. “ऐसी घटनाओं ने 22.5 लाख से अधिक छात्रों और उनके परिवारों को भारी मानसिक आघात, तनाव, कठिनाई और अनिश्चितता दी है, जो इस अत्यधिक प्रतिस्पर्धी परीक्षा की तैयारी में वर्षों की मेहनत लगाते हैं.”

NEET-UG 2026, जिसमें 551 शहरों के 5,500 से अधिक केंद्रों पर 22.5 लाख से ज्यादा छात्र शामिल हुए थे, परीक्षा तिथि से पहले कथित तौर पर प्रश्न पत्र लीक होने के बाद रद्द कर दिया गया.

शुक्रवार को प्रधान ने NEET-UG 2026 को 21 जून के लिए फिर से निर्धारित किया. उन्होंने यह भी घोषणा की कि 2027 से परीक्षा कंप्यूटर आधारित टेस्ट मोड में कराई जाएगी.

IMA की मुख्य मांगों में परीक्षा का विकेंद्रीकरण करके राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पारदर्शी ढांचे के तहत अधिक जिम्मेदारी देना, लीक मामले की रोजाना सुनवाई के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों की स्थापना करना और मामले में शामिल हर व्यक्ति और संस्था की पहचान के लिए व्यापक और निष्पक्ष जांच करना शामिल है.

IMA ने उन्नत तकनीकी सुरक्षा उपायों, जनता का भरोसा बहाल करने के लिए स्वतंत्र निगरानी और प्रभावित छात्रों तथा अभिभावकों के लिए आसान परामर्श सुविधा की भी मांग की.

बड़े मुद्दे पर डॉ. नायक ने लिखा. “चिकित्सा पेशा नैतिकता, भरोसे और विश्वसनीयता पर आधारित है. इसलिए, भविष्य के डॉक्टरों के चयन की प्रक्रिया में भी इन्हीं सिद्धांतों का पालन होना चाहिए.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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