नयी दिल्ली, 22 अक्टूबर (भाषा) सरकार द्वारा परिसीमन से जुड़े महिला आरक्षण विधेयक को पारित कराने के लिए संसद का विस्तारित सत्र बुलाए जाने की अटकलों के बीच एक शीर्ष अधिकारी ने बृहस्पतिवार को कहा कि सत्रावसान नहीं होने की स्थिति में ऐसी बैठक महज दो दिन के नोटिस पर बुलाई जा सकती है।
दोनों सदनों की बैठक बीते 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने के बावजूद मानसून सत्र का अब तक सत्रावसान नहीं हुआ है।
ऐसी अटकलें हैं कि सरकार महिला आरक्षण कानून में संशोधन पारित कराने के लिए संसद की विशेष सत्र या विस्तारित बैठक बुला सकती है।
चर्चा है कि सरकार प्रस्तावित विधेयक को शीतकालीन सत्र तक टालना नहीं चाहती।
अप्रैल में बजट सत्र के दौरान विस्तारित बैठक में पर्याप्त संख्या में सदस्यों का समर्थन नहीं मिलने के कारण विधेयक लोकसभा में पारित नहीं हो सका था।
अधिकारी ने कहा, ‘‘यदि सत्रावसान कर दिया जाता है, तो अगला सत्र बुलाने के लिए न्यूनतम 14 दिन का नोटिस आवश्यक है। यदि सत्रावसान नहीं किया गया है, तो दो दिन में विस्तारित बैठक बुलाई जा सकती है।’’
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में मानसून सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने के बारे में पूछे जाने पर कहा कि अनुच्छेद 85 के प्रावधानों का पालन किया जा रहा है। अनुच्छेद 85 संसद के सत्र बुलाने और सत्रावसान से संबंधित है।
अतीत में ऐसे कई उदाहरण रहे हैं, जब लंबे समय तक सत्रावसान नहीं हुआ। ऐसे मामलों में यह अवधि 87 दिन तक रही है।
ऐसे कई अन्य उदाहरण भी हैं। मसलन, 1987 में 76 दिन, 1989 में 54 दिन, 2006 में 49 दिन, 2013 में 49 दिन और 1963 में 41 दिन तक सत्रावसान नहीं हुआ था।
संसद का सत्रावसान किसी संसदीय सत्र को औपचारिक रूप से समाप्त करने की प्रक्रिया है। भारत में सत्रावसान का आदेश राष्ट्रपति, केंद्रीय मंत्रिपरिषद की सलाह पर देते हैं।
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