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सुप्रीम कोर्ट, फाइल फोटो | मनीषा मोंडल, दिप्रिंट
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नई दिल्ली: एडवोकेट उत्सव बैंस के हलफनामें में कहा गया है कि मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई को फंसाने की कोशिश की जा रही है. इस पर अदालत में कई चौंकाने वाले तथ्य भी पेश किये गए हैं, गर्मा-गर्म बहस हुई, नोंक-झोंक भी हुई, सम्मान में दाग का आरोप लगा और माफी की मांग की गई और नौबत वॉक आउट तक की आ गई.

न्यायाधीश सीबीआई के निदेशकों, गुप्तचर ब्यूरो और पुलिस कमीश्नर से मिले और उन्होंने बैंस के आरोपों पर विचार किया जोकि उनके पास एक बंद लिफाफे में पहुंचा था.

तीन जजों की खंडपीठ में अरुण मिश्रा, रोहिंटन नरिमन और दीपक गुप्ता ने कहा कि जो सूचना बैंस ने दी है उसे गुप्त रखा जाए, क्योंकि इसमें कथित रूप से मुख्य न्यायाधीश पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाने का षड़यंत्र रचा जा रहा है.
इस संबंध में कोर्ट ने तीन अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वो बैंस द्वारा दी गई सामग्री की जांच करें.

अदालत ने अपने ऑर्डर में कहा ‘उत्सव बैंस ने खासकर तपन चक्रबर्ती और मानव शर्मा का नाम अपने हलफनामे में लिया है. उन्होंने कुछ नाम और भी दिए हैं और आरोप लगाए है कि अदालत की खंडपीठ को फिक्स करने का षडयंत्र चलाया जा रहा है,’

बेंच ने कहा, ‘ये गंभीर आरोप एक युवा वकील ने लगाए हैं जिसका पूरा करियर उसके सामने है और वो जानता है कि गलत हलफनामें से उसके करियर पर क्या असर होगा.’

दोनो पूछताछ आपस में ओवरलैप नहीं होनी चाहिए

सोमवार को दायर की गई अपनी याचिका में बैंस ने बताया कि यह शिकायत निंदनीय थी और सीजेआई का इस्तीफा देने के लिए एक बड़ी साजिश का एक हिस्सा भी थी. बैंस ने सीजेआई को इस्तीफा देने के लिए एक फिक्सर रोमेश शर्मा के साथ मिलकर काम करने की बात भी कही.

इस मामले की सुनवाई करते हुए, अदालत ने ‘बार’ को आश्वासन दिया कि इस मामले में पारित कोई भी आदेश सीजेआई गोगोई के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों की लंबित जांच को प्रभावित नहीं करेगा. जिस बात की चिंता इंदिरा जयसिंह ने जताई थी. उन्होंने निवेदन किया कि दोनों पूछताछ को एक दूसरे से ओवरलैप नहीं करना चाहिए.

शिकायतकर्ता के लिए नहीं बल्कि एक इंसान के तौर पर पेश हो रहीं जयसिंह ने कहा कि वह महिला वकील न्यायपालिका की स्वतंत्रता और अखंडता के बारे में चिंतित थीं.

जयसिंह ने मुखर रूप से कहा, ‘हमारी एकमात्र चिंता यह है कि पूर्व महिला कर्मचारी द्वारा दायर हलफनामे की एक स्वतंत्र जांच हो.’

जयसिंह ने कहा कि कॉर्पोरेट हस्तक्षेप और यौन उत्पीड़न के दोनों आरोप न्यायपालिका की स्वतंत्रता को कमजोर कर सकते हैं.

पीठ ने जयसिंह को आश्वासन दिया, कि इसमें प्राथमिकता फिक्सर की पहचान और अस्तित्व का पता लगाना था.

बार और बेंच के बीच इस बात पर बहस तेज हो गई कि क्या सबसे अधिक महत्वपूर्ण है. न्यायमूर्ति मिश्रा ने जयसिंह से कहा, ‘हम पूछताछ करेंगे. केवल हम ही नहीं, बल्कि आप भी खतरे में हैं.’ जस्टिस मिश्रा ने जयसिंह से कहा, ‘क्या हमें न्याय के फिक्स होने पर लगे आरोपों को नजरअंदाज कर देना चाहिए.’

नाटकीय घटनाक्रम

शुरुआत में, अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल, जो इस मामले में अदालत की सहायता कर रहे हैं, ने बताया कि बैंस का फेसबुक पोस्ट और सबमिशन एक दूसरे से मेल नहीं खाते हैं और दोनों काफी अलग थे.

अपनी पोस्ट में, बैंस ने कहा था कि असंतुष्ट न्यायाधीशों के एक समूह ने सीजेआई के खिलाफ साजिश रची थी. शीर्ष कानून अधिकारी ने कहा, हालांकि, हलफनामे में इसका कोई उल्लेख नहीं है.

बैंस ने अपने सभी स्रोतों का खुलासा करने में आंशिक विशेषाधिकार का भी दावा किया. इस के लिए, एजी ने कहा मुझे समझ में नहीं आता कि कोई कैसे कुछ आरोप लगा सकता है, और बाकी के दावे को विशेषाअधिकार बता सकता है.’

इस पर, बैंस ने अपराध किया और अपने सम्मान की रक्षा करने की कोशिश की. बार और बेंच एक साथ एजी वेणुगोपाल के बचाव में आए और बैंस से माफी मांगी.

जब बैंस ने अनुपालन नहीं किया, तो उन्हें न्यायमूर्ति नरीमन ने फटकार लगाई. एक बार तो, न्यायाधीश ने बैंस को अदालत कक्ष से बाहर निकालने की धमकी तक दे दी.

न्यायमूर्ति नरीमन ने कहा, ‘तुम्हें उन (वेणुगोपाल) पर संदेह करने का कोई कारण नहीं है. वह बार के सबसे सम्मानित सदस्य हैं. हम सभी उनपर ऊपर निर्भर हैं. यदि आपको जरा सा भी संदेह है, तो हम आपको बाहर निकाल देंगे.’

उन्होंने कहा,’अगर उनका मन मुझे बाहर करना है, तो मैं खुद बाहर निकल जाऊंगा.’ बैंस इसके बाद बाहर निकलने लगे.

न्यायमूर्ति मिश्रा ने बैंस को बाहर जाने से रोका और विनम्रता से सबमिशन की सलाह दी.

मामले की सुनवाई अब गुरुवार को होगी.

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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