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Tuesday, 22 September, 2026
होमदेशपूर्व पत्नी के फोन में स्पाइवेयर डालने की बात कबूल करने के बाद हिमाचल के व्यक्ति पर केस दर्ज

पूर्व पत्नी के फोन में स्पाइवेयर डालने की बात कबूल करने के बाद हिमाचल के व्यक्ति पर केस दर्ज

एफआईआर में आरोप है कि कमल राज ने अपनी अलग रह रही पत्नी पर नज़र रखने के लिए स्पाइवेयर का इस्तेमाल किया क्योंकि उसने उस पर एक सेना अधिकारी के साथ अफेयर का आरोप लगाया था. कोर्ट ऑफ इंक्वायरी के बाद सेना ने पूर्व पति की शिकायत खारिज कर दी थी.

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गुरुग्राम: हिमाचल प्रदेश के एक व्यक्ति ने अपनी अलग रह रही पत्नी के फोन और कंप्यूटर को गुप्त तरीके से एक्सेस किया था और एक सेना अधिकारी के साथ उनके अफेयर के आरोपों की सेना की जांच के दौरान ऐसा करने की बात कबूल की थी. यह बात महिला की पुलिस शिकायत के मुताबिक सामने आई है.

जसप्रीत कौर ने आरोप लगाया कि करीब दो साल तक उन्हें पता ही नहीं था कि उनके अपने फोन के जरिए उन पर नज़र रखी जा रही है. उन्हें इसका पता तब चला, जब उन्होंने सेना की उस जांच के रिकॉर्ड पढ़े, जिसकी शुरुआत उनके पूर्व पति ने खुद कराई थी.

पंचकुला पुलिस ने 12 सितंबर को दर्ज पुलिस शिकायत में उनके पूर्व पति कमल राज (42) और उनकी फाइनेंशियल फर्म की दो पूर्व कर्मचारियों, सपना और अनिशा यादव, के नाम दर्ज किए हैं. तीनों पर हैकिंग और डेटा चोरी का आरोप है.

हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के लाग गांव के रहने वाले कमल राज ने 19 नवंबर 2012 को चंडीगढ़ की कौर से शादी की थी. एफआईआर में इसे प्रेम और परिवार की सहमति से हुई शादी बताया गया है. उनका बेटा 2017 में पैदा हुआ.

दोनों साथ में काम भी करते थे. वे बराबर के पार्टनर के तौर पर ओमकार फाइनेंशियल सर्विसेज चलाते थे. यह फर्म ग्राहकों को वित्तीय सेवाएं देती थी. इनमें से कई ग्राहक सेना से जुड़े थे. ऑफिस पहले चंडीमंदिर कैंटोनमेंट इलाके से चलता था. बाद में इसे पंचकुला के सेक्टर 5 स्थित मानसा देवी कॉम्प्लेक्स के DSS 98 में शिफ्ट कर दिया गया. सपना और अनिशा यादव वहां कर्मचारी थीं.

शादी ज्यादा समय तक नहीं चली. दोनों सितंबर 2022 में अलग हो गए, लेकिन फर्म दोनों की पार्टनरशिप में चलती रही. कौर का कहना है कि यहीं से चीज़ें खराब होने लगीं.

आरोप

अपनी शिकायत में कौर ने कहा कि कमल राज ने ऑफिस में एक सीसीटीवी कैमरा लगाया था, जिसे मोबाइल फोन से देखा जा सकता था. उन्होंने कहा कि उन्होंने कई बार उससे इसका पासवर्ड मांगा. उन्होंने पुलिस को बताया कि वह फर्म की 50 प्रतिशत पार्टनर थीं और सुरक्षा के कारण कैमरे तक पहुंच चाहती थीं, लेकिन उन्हें कभी पासवर्ड नहीं दिया गया.

21 अगस्त 2024 को कमल राज ने सेना के अधिकारियों से शिकायत की. इसमें आरोप लगाया कि उसकी पत्नी का एक सेना अधिकारी के साथ अफेयर है. सेना ने 8 नवंबर को कोर्ट ऑफ इंक्वायरी (CoI) का आदेश दिया. इसमें छह गवाहों से पूछताछ की गई और कमल राज पहले गवाह थे.

एफआईआर में उनके बयान के कुछ हिस्से दर्ज हैं. कौर का आरोप है कि उन्होंने शपथ लेकर माना था कि उन्होंने गुप्त तरीके से उनके फोन और कंप्यूटर को एक्सेस किया था. एफआईआर के मुताबिक, उन्होंने QuickSpy नाम के स्पाइवेयर का नाम लिया था और कहा था कि इसे उन्होंने एक निजी जासूस से खरीदा था.

सेना ने उनकी शिकायत खारिज कर दी. सेना ने कहा कि कोई अफेयर नहीं था और सेना अधिकारी के साथ महिला का संपर्क पूरी तरह पेशेवर था.

जांच रिपोर्ट के आधार पर कौर ने पंचकुला की अदालत में अपने पूर्व पति के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया. इस मामले में अदालत ने सेना से जांच के रिकॉर्ड मंगवाए.

कमल राज के अपने बयानों के आधार पर कौर ने एफआईआर दर्ज कराने के लिए पुलिस से संपर्क किया.

कौर ने कहा कि सेना की जांच में क्लीन चिट मिलने के बावजूद नुकसान पहले ही हो चुका था. उनके कुछ ग्राहक सेना से जुड़े थे और उन्होंने कहा कि इनमें से कई ग्राहक उनसे छूट गए. उन्होंने आरोप लगाया कि तीनों आरोपियों ने सबसे पहले सर्विस प्रोवाइडर से उनके कॉल डिटेल रिकॉर्ड हासिल करने की कोशिश की, लेकिन वे ऐसा नहीं कर पाए क्योंकि कानून इसकी अनुमति नहीं देता था. इसके बाद उन्होंने स्पाइवेयर का सहारा लिया, ऐसा उनका आरोप है.

एफआईआर के मुताबिक, उनके कॉल, मैसेज और आने-जाने की गतिविधियों को रिकॉर्ड किया गया. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनकी कार और घर में सुनने वाले टूल्स लगाए गए थे और उनके ग्राहकों का डेटा उनके डिवाइस से चुराया गया.

कौर का कहना है कि उनके खिलाफ की गई शिकायत का मकसद उन पर आपसी सहमति से तलाक लेने का दबाव बनाना था. उनका कहना है कि उन्हें गुजारा भत्ता और बच्चे के खर्च की रकम छोड़ने के लिए कहा गया था. एफआईआर में उन्होंने कहा है कि बाद में आपसी सहमति से तलाक की डिक्री भी हो गई. उनका बेटा उनके साथ रहता है.

उन्होंने यह भी कहा कि चोरी किया गया डेटा अभी भी आरोपियों के पास है और उन्हें डर है कि इसका इस्तेमाल उनके खिलाफ किया जा सकता है.

9 मई को पुलिस उपायुक्त के कार्यालय में शिकायत दी गई थी और 11 मई को उसे संबंधित अधिकारी को भेजा गया. इसके बाद इसे कार्रवाई के लिए मानसा देवी कॉम्प्लेक्स पुलिस स्टेशन भेजा गया. जांच के बाद मामला दर्ज किया गया.

आरोपियों के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2008 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है. एफआईआर में कथित अपराध की अवधि 1 जुलाई 2024 से 12 सितंबर 2026 तक बताई गई है.

अब तक किसी गिरफ्तारी की सूचना नहीं है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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