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Wednesday, 28 October, 2026
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बिजली कंपनियों की लिस्टिंग पर केंद्र का हरियाणा पर दबाव, कर्मचारियों को प्राइवेटाइजेशन का डर

केंद्रीय बिजली सचिव ने हरियाणा से 4 बिजली कंपनियों की लिस्टिंग की लंबित मंजूरियां जल्द देने को कहा. इंजीनियरों को निजीकरण का डर, 3 नवंबर को सीएम सैनी के सामने उठाएंगे मुद्दा.

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चंडीगढ़: नई दिल्ली से आए एक पत्र ने हरियाणा के बिजली विभाग के कर्मचारियों की चिंता फिर बढ़ा दी है. यह उस समय हुआ है, जब कर्मचारियों ने पूरे राज्य में चली हड़ताल कुछ ही दिन पहले खत्म की है.

केंद्रीय बिजली सचिव पंकज अग्रवाल ने 19 अक्टूबर को हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी को पत्र लिखकर राज्य की 4 बिजली कंपनियों को शेयर बाजार में लिस्ट कराने की प्रक्रिया तेज़ करने को कहा है. ये कंपनियां हैं- उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड (UHBVNL), दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड (DHBVNL), हरियाणा पावर जनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPGCL) और हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड (HVPNL).

दिप्रिंट के पास मौजूद पत्र में कहा गया है कि ये चारों कंपनियां लिस्टिंग के लिए योग्य हैं. इसमें 15 मई 2026 को केंद्रीय बिजली मंत्री की ओर से भेजे गए पहले के पत्र का भी ज़िक्र है, जिसमें यही मांग की गई थी. पत्र के मुताबिक, लिस्टिंग से इन कंपनियों को निवेश आकर्षित करने, आधुनिकीकरण के लिए पूंजी जुटाने और राज्य के बजट से मिलने वाली मदद पर कम निर्भर रहने में मदद मिलेगी.

अग्रवाल ने दो अड़चनों की ओर भी इशारा किया. उन्होंने लिखा कि कृषि उपभोक्ताओं के लिए अलग बिजली वितरण कंपनी (डिस्कॉम) अभी पूरी तरह काम नहीं कर रही है. HPGCL और HVPNL ने भी लिस्टिंग की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए अभी तक किसी सलाहकार की नियुक्ति नहीं की है. पत्र में कहा गया है कि यह कदम “काफी समय से” लंबित है.

उन्होंने रस्तोगी से लंबित मुद्दों को दूर करने के लिए “व्यक्तिगत हस्तक्षेप” करने को कहा. साथ ही कहा कि बिजली कंपनियों को हर गतिविधि के हिसाब से एक रोडमैप तैयार कर केंद्र के साथ साझा करना चाहिए. अग्रवाल ने लिखा कि हरियाणा लिस्टिंग का समर्थन करने वाले शुरुआती राज्यों में रहा है और शासन और पारदर्शिता में उदाहरण पेश कर सकता है.

अग्रवाल ने लिखा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बिजली मंत्रियों के सम्मेलन में 12 नवंबर 2024 को राज्य की डिस्कॉम की लिस्टिंग के लिए रोडमैप पर चर्चा हुई थी. उन्होंने कहा कि इसके बाद कई राज्यों ने लिस्टिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी है.

हालांकि, हरियाणा के बिजली मंत्री अनिल विज ने कहा कि वह इस पर टिप्पणी नहीं कर सकते क्योंकि उन्होंने वह पत्र देखा ही नहीं है.

दिप्रिंट ने जब विज से इस बारे में बात की तो उन्होंने कहा, “मुझे मीडिया के लोगों के सवालों के बाद मुख्य सचिव को बिजली सचिव का पत्र भेजे जाने के बारे में पता चला है, लेकिन मैंने अभी तक वह पत्र नहीं देखा है.”

विज ने 17 अक्टूबर 2024 को हरियाणा के बिजली मंत्री का पद संभाला था. यह वह दिन था जब अक्टूबर 2024 के हरियाणा विधानसभा चुनाव के बाद नायब सिंह सैनी सरकार ने शपथ ली थी. विज ने कहा कि उन्हें यह भी पक्का नहीं है कि वह 12 नवंबर 2024 को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बिजली मंत्रियों के सम्मेलन में शामिल हुए थे या नहीं.

बिजली विभाग के कर्मचारी कंपनियों की लिस्टिंग की योजना को निजीकरण की दिशा में पहला कदम मान रहे हैं. हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन के 3 नवंबर को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ होने वाली बैठक में यह मुद्दा उठाने की उम्मीद है.

एसोसिएशन ने मंगलवार को हिसार के विद्युत नगर में बैठक की. यही DHBVN का मुख्यालय है. बैठक में महासचिव रविंदर घंघास, वरिष्ठ उपाध्यक्ष बलजीत बेनीवाल और भिवानी जोनल बॉडी के सदस्य नारायण प्रकाश मौजूद थे. सदस्यों ने चारों कंपनियों को लिस्ट करने या उनका निजीकरण करने के किसी भी कदम को खारिज कर दिया.

उन्होंने कहा कि यह मुद्दा पहले से ही उनकी हड़ताल के नोटिस में शामिल था. घंघास ने सदस्यों को भरोसा दिलाया कि HVPN के पुनर्गठन और अन्य लंबित मांगों को भी सरकार के साथ होने वाली बैठक में उठाया जाएगा.

बुधवार को दिप्रिंट से बात करते हुए घंघास ने कहा कि राज्य सरकार से कहा गया है कि 4 कंपनियों की लिस्टिंग के रोडमैप के तहत कृषि उपभोक्ताओं के लिए अलग डिस्कॉम बनाई जाए. इसका उद्देश्य DHBVN और UHBVN को किसानों को बिजली कनेक्शन देने की जिम्मेदारी से अलग करना है. उन्होंने कहा कि किसान डिस्कॉम के लिए मूल रूप से घाटे वाला कारोबार हैं और यह शेयर बाजार में कंपनियों की लिस्टिंग के रास्ते में आ सकता है.

बिजली कर्मचारियों ने हाल ही में गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण का लाइसेंस एक निजी कंपनी को देने के कदम के खिलाफ पूरे राज्य में हड़ताल की थी. कई इलाकों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई थी. इसके बाद मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप से हड़ताल खत्म हुई.

राज्य के अपने आंकड़े दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का आधार देते हैं.

दिप्रिंट को मिले हरियाणा आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के मुताबिक, दोनों डिस्कॉम ने कई साल तक घाटे में रहने के बाद 2017-18 से हर साल मिलाकर शुद्ध मुनाफा दर्ज किया है. हालांकि, उनका संयुक्त मुनाफा 2023-24 में 164.64 करोड़ रुपये से घटकर 2024-25 में 85.76 करोड़ रुपये रह गया.

HVPNL का टैक्स के बाद मुनाफा 2024-25 में बढ़कर करीब 358.6 करोड़ रुपये हो गया, जो एक साल पहले 295.3 करोड़ रुपये था. सर्वेक्षण के मुताबिक, इसकी ट्रांसमिशन सिस्टम उपलब्धता 99.60 प्रतिशत थी. HPGCL ने 2024-25 में 7,166.8 करोड़ रुपये की कुल आय दर्ज की, जबकि उसका EBITDA यानी ब्याज, टैक्स, मूल्यह्रास और परिशोधन से पहले की कमाई 709.2 करोड़ रुपये रही.

हरियाणा सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दिप्रिंट को बताया कि यह कदम नया नहीं है. उन्होंने कहा कि लिस्टिंग का रोडमैप पहली बार 12 नवंबर 2024 को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बिजली मंत्रियों के सम्मेलन में चर्चा के लिए आया था और मौजूदा पत्र उसी का आगे का कदम है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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